हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को सभी जिलों को अगले तीन दिन में किसानों का एग्रीस्टैक मंच पर लक्षित पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया। इसके लिए 24 अगस्त की शाम तक की समयसीमा तय की गई है। उन्होंने उपायुक्तों को राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय करने तथा युद्धस्तर पर पंजीकरण अभियान पूरा कराने के निर्देश दिए।
एग्रीस्टैक मंच केंद्र सरकार ने किसानों को विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी और प्रभावी तरीके से दिलाने के लिए विकसित किया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस मंच पर पंजीकृत किसानों को एक विशिष्ट किसान पहचान पत्र दिया जाएगा। साथ ही, उनके कृषि भूमि के भूखंडों को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि केंद्र सरकार ने यह मंच इसलिए शुरू किया है ताकि विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रभावी तरीके से किसानों तक पहुंचाया जा सके। एग्रीस्टैक के तहत प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट किसान पहचान पत्र दिया जा रहा है और उसकी कृषि भूमि को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच पर किसी किसान के किसी विशेष खेत में बोई गई फसल का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।
इसके अलावा गांवों और कृषि भूमि का डिजिटल तथा भौगोलिक मानचित्रण भी किया जा सकेगा।
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भारत में विदेशी निवेश को लेकर नियमों में बदलाव का असर अब दिखने लगा है। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, संशोधित व्यवस्था के तहत 20 अगस्त तक 29 विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रस्ताव दर्ज किए गए हैं। इन प्रस्तावों के जरिए देश में कुल 4,895.65 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। निवेश से जुड़े पक्ष मॉरीशस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और केमैन द्वीप जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। ये निवेश सूचना प्रौद्योगिकी, एआई, सूचना एवं संचार सेवाओं, विनिर्माण, दवा, आंकड़ा केंद्र और परिवहन सेवाओं जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित हैं।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, इन निवेश प्रस्तावों का सामने आना भारत की विदेशी निवेश व्यवस्था में हालिया बदलाव के बाद हुआ है। सरकार ने भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़े निवेश के नियमों में कुछ राहत दी है। अब ऐसे विदेशी निवेशकों को, जिनकी किसी सीमा साझा करने वाले देश से गैर-नियंत्रणकारी लाभकारी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, कुछ शर्तों के साथ स्वत: मार्ग से निवेश करने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए संबंधित क्षेत्र में तय निवेश सीमा, प्रवेश शर्तों और रिपोर्टिंग नियमों का पालन जरूरी है।
बता दें कि भारत ने अप्रैल 2020 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को कड़ा किया था। उस समय सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश या ऐसे निवेश जिनका लाभकारी मालिकाना हक किसी संबंधित देश में स्थित व्यक्ति या संस्था के पास था, उनके लिए सरकारी मंजूरी जरूरी कर दी गई थी। यह बदलाव उस समय देश की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच किया गया था।
गौरतलब है कि अब इस व्यवस्था में बदलाव प्रेस नोट-2, 2026 के माध्यम से किया गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने 15 मार्च को यह बदलाव जारी किया था, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को इसे मंजूरी दी थी। इसके बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन से जुड़े नियमों में जरूरी संशोधन 1 मई को अधिसूचित किए गए।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से निवेशकों को नियमों को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलेगी और निवेश प्रक्रिया में लगने वाला समय घटेगा। साथ ही इससे देश में कारोबार करना आसान बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। हालांकि स्वत: मार्ग की सुविधा मिलने के बावजूद निवेशकों को क्षेत्रवार नियमों और अनिवार्य रिपोर्टिंग का पालन करना होगा।
इस बदलाव के तहत लाभकारी स्वामित्व का आकलन धनशोधन निवारण नियम, 2005 में तय मानकों के अनुरूप करने की व्यवस्था भी की गई है। ऐसे में सरकार ने निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ निगरानी की व्यवस्था को भी बनाए रखा है। 20 अगस्त तक दर्ज 29 प्रस्ताव इसी बदली हुई व्यवस्था के शुरुआती प्रभाव को दिखाते हैं।
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