Kapil Sibal का Amit Shah पर पलटवार, पूछा क्या मोदी ने पूरा वंदे मातरम् गाया
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो अंतरे गाने के कांग्रेस के फैसले को लेकर उसे ‘‘राष्ट्र-विरोधी’’ बताने संबंधी गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर शुक्रवार को पलटवार करते हुए सवाल किया कि क्या नरेंद्र मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते या अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाया था। सिब्बल ने सवाल किया कि ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण नहीं गाने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता भी क्या ‘‘राष्ट्र-विरोधी’’ हैं। निर्दलीय सांसद ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ के दो अंतरे गाने के कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के फैसले को ‘राष्ट्र-विरोधी’ बताया।
मेरा सवाल है: क्या भाजपा ने 1950 से निजी या आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके सभी अंतरे गाए? क्या (प्रधानमंत्री) मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते ऐसा किया? क्या (पूर्व) प्रधानमंत्री वाजपेयी ने ऐसा किया?’’ सिब्बल ने कहा, ‘‘तो क्या आप उस समय राष्ट्र-विरोधी थे?
यह आपकी वोट बैंक की राजनीति को उजागर करता है।’’ शाह ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो अंतरे गाने का पार्टी का फैसला ‘राष्ट्र-विरोधी’ है तथा इसका मकसद कानून की खुली अवहेलना कर ‘‘वोट बैंक’’ के लिए तुष्टीकरण करना है। कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शाह द्वारा निशाना साधे जाने के बाद बृहस्पतिवार को पलटवार करते हुए कहा था कि भाजपा छात्रों तथा राम मंदिर से कथित ‘चढ़ावा चोरी’ जैसे मामलों से ध्यान भटकाने के लिए राष्ट्रगीत को लेकर विवाद खड़े करना चाहती है जबकि उसके (भाजपा के) नेता ‘‘झूठे’’ और ‘‘नकली’’ राष्ट्रवादी हैं। यह जुबानी जंग कांग्रेस कार्य समिति के बुधवार को लिए गए उस फैसले के बाद शुरू हुई, जिसमें ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाने के बजाय केवल दो अंतरे गाने का निर्णय लिया गया।
Congress ने E20 policy की समीक्षा और बिना एथेनॉल पेट्रोल का विकल्प देने की मांग की
कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र की ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति की तत्काल समीक्षा करने तथा उपभोक्ताओं को बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार की इस नीति के कारण जनता को ‘‘महंगे खाने और महंगे सफर’’ दोनों की कीमत चुकानी पड़ रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ‘‘गाड़ी भी महंगी पड़े और रसोई भी, ऐसी जनविरोधी ईंधन नीति देश को स्वीकार्य नहीं हो सकती।’’ रमेश ने दावा किया कि एथेनॉल उत्पादन में गन्ने और अनाज के इस्तेमाल के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि करीब 25 लाख टन चीनी-लायक गन्ना एथेनॉल उत्पादन में चला गया, जिसके परिणामस्वरूप पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलोग्राम और गुड़ की कीमत 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
उन्होंने दावा किया कि चावल और मक्के का आटा भी क्रमश: 16 प्रतिशत और 11 प्रतिशत महंगा हुआ है, जबकि पशु आहार की कीमत में 10.34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कांग्रेस महासचिव ने ई20 के कारण वाहनों के माइलेज और उनकी अनुकूलता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, जो वाहन 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लिए तैयार नहीं हैं, उनमें खराबी का जोखिम हो सकता है और बिना समुचित परीक्षण के वाहनों में माइलेज कम होने की आशंका है।
रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने एथेनॉल उत्पादकों को लाभ पहुंचाने के लिए पेट्रोल के विकल्प सीमित कर दिए हैं, जबकि ई20 को लेकर वाहन मालिकों के बीच माइलेज और अनुकूलता संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने यह सवाल भी किया कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में कमी और पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाए जाने से लागत में आने वाली कमी के बावजूद पेट्रोल की कीमतों में कमी क्यों नहीं की गई? रमेश ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार ई20 नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्य समिति ने 19 अगस्त को ई20 के कारण कम माइलेज, वाहनों की अनुकूलता, उपभोक्ताओं के सीमित विकल्प और पर्यावरणीय क्षति से जुड़े सवालों पर भी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा, हमारी मांग है कि ई20 नीति की तत्काल समीक्षा होनी चाहिए और जनता को बिना इथेनॉल वाले विकल्प मिलने चाहिए। गाड़ी भी महंगी पड़े और रसोई भी, ऐसी जनविरोधी ईंधन नीति देश को स्वीकार्य नहीं हो सकती।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








