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US envoy Sergio Gor के J&K बयान को BJP ने बताया कूटनीतिक जीत, विपक्षी नेताओं ने उठाए सवाल

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा जम्मू-कश्मीर को भारत का एक अहम हिस्सा बताए जाने को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। वहीं, पड़ोसी पाकिस्तान ने गोर के बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी नताली बेकर को तलब किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गोर की बयान का स्वागत करते हुए इसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताया।

वहीं, कांग्रेस ने कहा कि अमेरिकी राजनयिक ने केवल साफगोई से बात की है, साथ ही यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के मामले में किसी तीसरे पक्ष का दखल केंद्र सरकार की ‘नाकामी’ है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी दूतावास प्रभारी को तलब करना दोनों देशों के बीच का द्विपक्षीय मामला है, जबकि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी)अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अमेरिका को गंभीरता से लेने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके दखल से दुनिया भर में केवल तबाही ही हुई है। गोर ने केंद्र शासित प्रदेश के दौरे के दौरान बुधवार को अब्दुल्ला से मुलाकात की।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद गोर ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जम्मू-कश्मीर ‘भारत का एक अहम हिस्सा’ है। संवाददाताओं द्वारा गोर के बयान पर पाकिस्तान के विरोध के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा, ‘‘यह (आपत्ति पत्र) पाकिस्तान और अमेरिका के बीच का मामला है। न तो आप और न ही मैं इसमें कुछ कर सकते हैं।

अमेरिका के (भारत में) राजदूत ने जो कुछ भी कहा है, वह कह चुके हैं। अब यह उन दोनों देशों के बीच की बात है।’’ मुख्यमंत्री ने अपने गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के साथ जुबानी जंग में शामिल होने से भी इनकार कर दिया। कांग्रेस का कहना था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इसलिए इस मामले में किसी तीसरे पक्ष का दखल नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस मामले में नहीं पड़ना चाहता। कांग्रेस का अपना नजरिया है। वह एक राजनीतिक और सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है।

उनका अपना नजरिया है और उन्हें ऐसा सोचने का हक है। मैं इस पर किसी तरह की बहस या तू-तू-मैं-मैं में नहीं पड़ना चाहता। मैं इस पर क्या कह सकता हूं?।’’ इससे पहले, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में मध्य शाल्टेंग सीट से विधायक तारिक कर्रा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और किसी भी तीसरे पक्ष का दखल केंद्र सरकार की ‘विफलता’ है।

कर्रा ने गोर की एक टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘ चाहे अमेरिका के राजदूत हों या विदेश मंत्री या दुनिया का कोई राजनयिक हो, अगर आज वे कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, तो उन्होंने कोई अनोखी बात नहीं कही है। यह हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और पूरी दुनिया यह बात जानती है।’’ जब कर्रा से पूछा गया कि क्या अमेरिकी राजदूत संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे थे क्योंकि उन्होंने जम्मू कश्मीर को भारत का आंतरिक या अभिन्न अंग नहीं बताया, तब उन्होंने कहा कि यह ‘भ्रम’ ‘मौजूदा सरकार की नाकाम नीति’ की वजह से है। उन्होंने कहा, ‘‘काफी समय से भारत सरकार के कामकाज में अमेरिका का दखल बहुत ज़्यादा रहा है।

और ऐसा तभी होता है, (क्योंकि) आज हमारे देश की नीति नाकाम रही है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘आपको याद होगा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिकी सरकार ने किस हद तक दखल दिया था... तो, मेरा कहने का मतलब यह है कि आपके या भारत के लोगों के मन में जो भी उलझन है, वह सब मौजूदा सरकार की नाकाम नीति की वजह से है।’’ गोर की टिप्पणियों को लेकर पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राजदूत को तलब किए जाने पर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ‘‘उन्हें बुलाना उनका अंदरूनी मामला है। हमारी नीति यह है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, था और हमेशा रहेगा।’’ कर्रा ने कहा, ‘‘जब भारत और पाकिस्तान के बीच के मामलों की बात आती है, तो शिमला समझौते के बाद, अगर कोई संबंधित पक्ष है, तो वे भारत और पाकिस्तान ही हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस किसी तीसरे पक्ष के दखल को नहीं मानती क्योंकि यह हमारी हमेशा से तय नीति रही है। आज अगर कहीं कोई दखल होता है या कोई प्रस्ताव दिया जाता है तो यह मौजूदा सरकार की नाकाम नीति है।’’ गोर की टिप्पणियों को एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताते हुए, भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति की सफलता का एक मजबूत प्रमाण है।

भाजपा की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्रीनगर से अमेरिकी राजदूत का बयान काफी कूटनीतिक महत्व रखता है, खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान ने बार-बार जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया जम्मू-कश्मीर की जमीनी हकीकत को तेजी से समझ रही है और पाकिस्तान का दुष्प्रचार बेनकाब हो गया है।’’ ठाकुर ने वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय विमर्श को शांति, विकास और लोकतांत्रिक शासन पर केंद्रित करने का श्रेय मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को दिया। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इस दौरे और गोर की टिप्पणियों ने जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के विमर्श का कड़ा जवाब दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान ने दशकों तक कश्मीर के बारे में एक झूठी कहानी गढ़ी है। आज, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने वह कहानी झूठी साबित हो गई। सच्चाई सभी के सामने है।

जम्मू-कश्मीर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और विकासशील प्रक्रिया की ओर अग्रसर है, और दुनिया से तेजी से जुड़ रहा है।’’ पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने हालांकि कहा कि अमेरिका को गंभीरता से लेने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि अमेरिकी दखलंदाजी से दुनिया भर में केवल तबाही ही हुई है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि अमेरिका को इतना गंभीरता से लेने की जरूरत है। हमने देखा है कि अमेरिका ने जहां भी दखल दिया है, वहां तबाही ही मचाई है, वियतनाम से लेकर ईरान तक।

वे हमारे मालिक नहीं हैं कि वे हमें कोई प्रमाण पत्र दें और उसके बाद ही बातचीत हो।’’ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राजदूत ने कश्मीर का दौरा किया है। उन्होंने कहा, ‘‘ केवल फर्क इतना है कि 2019 से पहले, जो भी राजदूत यहां आते थे वे पर्यटन, व्यापार और आवागमन जैसे समाज के हर वर्ग के लोगों से मिलते थे और यहां तक कि उनसे भी जिनकी राय अलग होती थी। फिर वे अपनी राय बनाकर वापस लौटते थे।’’ उन्होंने कहा कि 2019 में जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया, उसके बाद से ‘‘विदेशी हस्तियों के ये सभी दौरे पहले से तय और व्यवस्थित होते हैं’’।

पीडीपी अध्यक्ष ने कहा, ‘‘वे यहां आते हैं, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के अलावा किसी से नहीं मिलते, और फिर शिकारा की सवारी करके चले जाते हैं।’’ अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने कहा कि अमेरिकी राजदूत की टिप्पणियां बहुत महत्वपूर्ण हैं। बुखारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का यह मानना ​​कि जम्मू-कश्मीर ‘भारत का एक अहम हिस्सा’ है, बहुत महत्वपूर्ण है। यह जम्मू-कश्मीर पर भारत के रुख को लेकर वॉशिंगटन की सहमति को दर्शाता है।’’ उन्होंने उम्मीद जताई कि गोर की बातों से देश में जागरूकता बढ़ेगी और इस रुख को मजबूती मिलेगी कि जम्मू-कश्मीर को देश के समान रूप से अहम हिस्से के तौर पर वे सभी अधिकार, महत्व और पहचान मिलें, जिनका वह हकदार है।

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Allahabad High Court ने कहा, सिर्फ जाति का नाम लेने से SC ST Act के तहत अपराध नहीं बनता

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सिर्फ जाति का नाम लेने भर से एससी/एसटी अधिनियम के तहत अपराध नहीं बनता, इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल पीड़ित को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करने के इरादे से किया गया था। न्यायमूर्ति संतोष राय ने वेगराज सिंह और एक अन्य की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए बरेली की अदालत द्वारा दोनों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 358 के तहत 21 मार्च, 2025 को जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को दिए अपने आदेश में कहा, “महज ‘चमार’ शब्द का इस्तेमाल अपने आप में यह साबित नहीं करता कि अपीलकर्ताओं ने पीड़िता के अनुसूचित जाति से संबंधित होने के कारण उसे अपमानित करने के इरादे से उक्त शब्द का इस्तेमाल किया।” मामले के अनुसार, बरेली के इज्जतनगर थाने में दुष्कर्म और धमकी के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

पुलिस ने जांच के बाद मुख्य आरोपी हिम्मत सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, जबकि उसके पिता वेगराज और बड़े भाई दौलत सिंह को शुरू में आरोपों से बाहर रखा गया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान पीड़िता ने आरोप लगाया कि अपीलकर्ताओं ने उसके लिए ‘चमार’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद अधीनस्थ अदालत ने दोनों को मुकदमे का सामना करने के लिए समन जारी किया।

अपीलकर्ताओं ने समन आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उन्होंने दलील दी कि जातिसूचक टिप्पणियों के संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 161 और 164 के तहत दर्ज पीड़िता के पहले के बयानों में उनके किसी विशिष्ट कृत्य या भूमिका का उल्लेख नहीं था। उच्च न्यायालय ने हरदीप सिंह बनाम पंजाब सरकार मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सीआरपीसी की धारा 319 के तहत प्राप्त शक्ति असाधारण है और इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से तथा दुर्लभ मामलों में ही किया जाना चाहिए।

इसके लिए आरोप तय करने के चरण में प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत साक्ष्य की आवश्यकता होती है। अदालत ने कहा, “विचारण अदालत ने अपीलकर्ताओं की मिलीभगत की ओर स्पष्ट रूप से संकेत करने वाली किसी विश्वसनीय और ठोस सामग्री या साक्ष्य न होने के बावजूद बीएनएसएस की धारा 358 के तहत उन्हें समन जारी करने में जल्दबाजी की और इस तरह कानूनी भूल की।

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टीम इंडिया के इस दौरे पर फिर मंडराए संकट के बादल, तारीखों में बदलाव की तैयारी

IND vs BAN: टीम इंडिया को अगले महीने बांग्लादेश का दौरा करना है. लेकिन अभी तक बीसीसीआई की ओर से आधिकारिक शेड्यूल जारी नहीं किया गया है. इस दौरे पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं. Fri, 21 Aug 2026 11:02:30 +0530

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