भोपाल में चयनित शिक्षकों का हंगामा, नियुक्ति न मिलने पर कमिश्नर दफ्तर में घुसे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने खदेड़ा
भोपाल में प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में सफल होने के बावजूद नियुक्ति की मांग को लेकर चयनित शिक्षकों में आक्रोश देखा जा रहा है। गुरुवार शाम करीब 6 बजे, कार्यालय का समय समाप्त होने के दौरान लगभग दो दर्जन चयनित शिक्षक झंडे लेकर लोक शिक्षण संचालनालय की पहली मंजिल पर स्थित आयुक्त (कमिश्नर) के कक्ष के बाहर पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि वे प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 परीक्षा में चयनित हो चुके हैं, लेकिन D.El.Ed (डीएड) डिग्री से जुड़े नियमों और प्रशासनिक पचड़ों के कारण उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा रहे हैं।
15 दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन, फिर कोई जवाब नहीं
अपनी मांगों को चयनित शिक्षक पिछले 15 दिनों से लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। सुनवाई न होने पर उनका धैर्य जवाब दे गया। कार्यालय स्टाफ द्वारा रोकने के बावजूद जब प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते रहे। इसी बीच कर्मचारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस भी छिड़ गई। तब लोक शिक्षण आयुक्त के फोन करने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा
वरिष्ठ अधिकारियों और भारी पुलिस बल ने स्थिति संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को कमिश्नर कक्ष और फिर कार्यालय परिसर से बाहर खदेड़ दिया। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा के लिहाज से लोक शिक्षण संचालनालय के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया। पुलिस की कार्रवाई और समझाइश के बाद प्रदर्शनकारी शिक्षक परिसर से अपने घर लौट गए। फिलहाल प्रदर्शन समाप्त हो गया है।
दमोह जिला अस्पताल में कलेक्टर का औचक निरीक्षण, एक्सपायरी दवाएं और बंद मिले फ्रीजर, दो कर्मचारियों पर गिरी गाज
दमोह: मध्यप्रदेश के दमोह जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव लगातार सरकारी कार्यालयों और विभिन्न विभागों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा रही है। इसी कड़ी में, कलेक्टर ने गुरुवार को जिला अस्पताल और सीएमएचओ कार्यालय का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान स्टोर रूम में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई की है।
बता दें कि पिछले वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों से मांग की गई दवाएं अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। वहीं, निरीक्षण के दौरान खराब फ्रीजर में दवाएं रखी हुई मिलीं। स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी डेट की दवाएं भी पाई गईं। इसके अलावा रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध दवाओं का मिलान भी नहीं हो रहा था।
दो कर्मचारियों को किया गया निलंबित
कलेक्टर ने कहा कि यदि फ्रीजर खराब थे तो उन्हें समय रहते दुरुस्त कराया जाना चाहिए था और यदि वे सुधार योग्य नहीं थे, तो उन्हें बदलना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि निर्धारित तापमान में रखी जाने वाली दवाओं का इस तरह लापरवाहीपूर्वक भंडारण मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। अव्यवस्थाओं को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने संबंधित दो कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया है।
कलेक्टर ने सीएमएचओ को दिए सख्त निर्देश
कलेक्टर ने कहा कि दवा उपलब्ध होने के बावजूद समय पर जारी नहीं किया जाना गंभीर विषय है जिसके कारण आमजन को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही थी। उन्होंने तत्काल ही सीएमएचओ को निर्देश दिए कि इंडेंट प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर दवाएं जारी करना सुनिश्चित किया जाए। यदि कोई दवा उपलब्ध नहीं है तो उसके लिए आवश्यक कार्रवाई करते हुए अगले दिन तक उसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
कलेक्टर ने सीएमएचओ कार्यालय का भी किया निरीक्षण
बता दें कि जिला अस्पताल के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सीएमएचओ कार्यालय का भी निरीक्षण किया। जैसे ही कलेक्टर सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे तो 21 कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं पाए गए। इस दौरान कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
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