NITI Aayog New CEO: अनुराग जैन ने संभाली नीति आयोग के नए सीईओ की जिम्मेदारी, 2 साल का होगा कार्यकाल
NITI Aayog New CEO: नीति आयोग ने आज 17 अगस्त सोमवार को अनुराग जैन को अपने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के तौर पर स्वागत किया है। इसे सरकार की पॉलिसी थिंक टैंक में एक अहम पद पर नियुक्ति माना जा रहा है।
अनुराग जैन मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी है। जैन के पास पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, गवर्नेंस और पॉलिसी बनाने का करीब 4 दशकों का अनुभव है। अपने करियर के दौरान, उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर कई अहम पदों पर काम किया है।
मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके अनुराग
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा गया, "नीति आयोग नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में अनुराग जैन का स्वागत करता है।" जैन पहले मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके हैं। केंद्र में, उन्होंने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में सचिव के पद पर काम किया है।
इसके साथ ही उन्होंने उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) में सचिव के तौर पर भी काम किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक नीति, प्रशासन और आर्थिक विकास में उनके व्यापक अनुभव से नीति आयोग के पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने के काम में और गहराई आने की संभावना है।
NITIAayog welcomes Shri Anurag Jain as the new Chief Executive Officer.
— NITI Aayog (@NITIAayog) August 17, 2026
Shri Anurag Jain, a 1989-batch IAS officer of the Madhya Pradesh cadre, brings with him nearly four decades of experience in public administration and policymaking. He has previously served as Chief… pic.twitter.com/dHlASIhOY0
कौन सी नियम और शर्ते लागू होंगी ?
सीईओ के तौर पर, जैन सरकार की विकास प्राथमिकताओं को सपोर्ट करने और केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस बीच, इस साल की शुरुआत में सरकार ने सीनियर IAS अधिकारी अनुराग जैन को नीति आयोग का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया था। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस नियुक्ति को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दी थी।
उनका कार्यकाल 2 साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, उसी नियम और शर्तों के तहत होगा जो उनके पूर्ववर्ती अधिकारी पर लागू थीं। मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी, जैन ने अपने करियर के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों में कई अहम पदों पर काम किया है। इससे पहले अप्रैल में, केंद्र ने अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। लाहिड़ी ने सुमन के बेरी की जगह ली थी।
राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: इलाहाबाद HC को आय से अधिक संपत्ति मामले में सुनवाई टालने का निर्देश, जानें पूरा मामला
Rahul Gandhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह फिलहाल इस मामले में आगे की सुनवाई न करे। इसके साथ ही, अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी हाईकोर्ट के पिछले निर्देशों के तहत किसी भी तरह की रिपोर्ट दाखिल करने से रोक दिया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में कर्नाटक के निवासी एस. विग्नेश शिशिर (जिन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था) के अलावा सीबीआई और ईडी को भी नोटिस जारी किया है।
कपिल सिब्बल ने बताया 'विंच-हंट', उठाए सवाल
राहुल गांधी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इन कानूनी कार्रवाइयों का कड़ा विरोध करते हुए इसे पूरी तरह से निराधार बताया। सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि "यह कानून के बिल्कुल खिलाफ है और यह एक ऐसी बदले की कार्रवाई (विंच-हंट) है जिसे कानून मान्यता नहीं देता।"
उन्होंने याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर के लोकस स्टैंडी (अधिकार) पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी साख का खुलासा नहीं किया है। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि सीबीआई ने अब तक केवल शिकायत का सत्यापन किया था और यदि आरोप गंभीर थे, तो जांच एजेंसियों ने खुद स्वतंत्र कार्रवाई क्यों नहीं की।
जांच एजेंसियों और कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसियों की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि इस मामले में अब तक सीबीआई और ईडी की कोई भूमिका नहीं रही है। वहीं, पीठ ने भी जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने पूछा कि यदि आरोप इतने गंभीर थे तो एजेंसी अब तक निष्क्रिय क्यों रही, और क्या किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत मिलने पर सीबीआई को कार्रवाई के लिए किसी अदालत के निर्देश की जरूरत होती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई अदालत आदेश जारी करने का फैसला करती है, तो यह उम्मीद की जाती है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाए।
याचिकाकर्ता और हाईकोर्ट का पूर्व आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने वाले याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान ऑनलाइन पेश होकर राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि यह मामला अभी एफआईआर से पहले के चरण (प्री-एफआईआर स्टेज) में है और ऐसे चरण में आरोपी को सुने जाने का अधिकार नहीं होता है।
इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 20 जुलाई को सीबीआई के जवाब पर असंतोष जताया था और एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सीबीआई का हलफनामा उसके पिछले आदेश के अनुरूप नहीं है। साथ ही, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पूरी कार्यवाही को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे और अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब हाईकोर्ट की कार्यवाही फिलहाल स्थगित रहेगी, जबकि शीर्ष अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी।
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