Dabra News: जलभराव, गंदगी, जर्जर स्कूल में पढ़ने पर मजबूर बच्चे, जिम्मेदारों की लापरवाही दे रही किसी बड़े हादसे को न्योता
मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और शासकीय स्कूलों की जर्जर इमारतों के जीर्णोद्धार के लिए समय समय पर बजट उपलब्ध कराती है, बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाएँ देने के प्रयास करती है लेकिन सरकार के प्रयासों को उनके ही मुलाजिम कैसे चूना लगाते हैं इसका उदाहरण ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के कल्याणी पंचायत के शासकीय स्कूल से सामने आया है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशों को दरकिनार कर जिम्मेदार अपने ऑफिस में बैठे रहते हैं और बच्चे जलभराव, गंदगी और जर्जर क्लासरूम में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
कल्याणी पंचायत के शासकीय स्कूल की हालत लंबे समय से बदहाल बताई जा रही है। स्कूल भवन की छत से प्लास्टर टपकने की शिकायत भी सामने आती रहती हैं, बारिश के मौसम में स्कूल परिसर में घुटनों तक पानी भी भर जाता है। ऐसे हालात में छोटे-छोटे नौनिहाल डर के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बदहाली का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इस बार स्कूल में बारिश का पानी भरा होने के कारण 15 अगस्त को ध्वजारोहण ही नहीं किया गया बच्चों को पंचायत भवन के पास ले जाकर वहां झंडावंदन हुआ।
छत से गिरता प्लास्टर, नीचे पढ़ते बच्चे, सुनिए उनके ही मुंह से
बच्चों ने अपन स्कूल की बदहाली खुद हमें सुने, बच्चों ने बताया स्कूल की छत का प्लास्टर गिरता है, स्कूल ग्राउंड में घुटनों तक पानी भर जाता है, क्लासरूम में छत से पानी टपकता है, टॉयलेट चौक है लड़के लड़कियां सब खुले में टॉयलेट के लिए जाते हैं , बिल्डिंग के आसपास सांप भी हैं , बाई के पैर में भी एक सांप लिपट गया उसे मुश्किल से दूर हटाया गया , बच्चों ने कहा की कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनता ही नहीं है कुल मिलाकर बच्चे मुश्किलों में पढ़ने आ रहे हैं लेकिन जिम्मेदार मौन हैं
बारिश में गेट पर जलभराव स्कूल में प्रवेश तक मुश्किल
ग्रामीणों ने स्कूल बिल्डिंग की हालत सुधारने के लिए प्रशासन के अधिकारियों को एक ज्ञापन दिया है और सबूत के तौर पर उन्हें वीडियो फोटी भी दिए हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि बारिश के दिनों में मुख्य गेट से बच्चों का स्कूल में प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है। बच्चे स्कूल की टूटी हुई साइड की दीवार के पास से निकलकर अंदर जाने को मजबूर होते हैं, जो खतरनाक है। छुट्टी के बाद भी उन्हें इसी रास्ते से अपनी जान पर खेल कर गुजरना पड़ता है बाहर निकलना पड़ता है। यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
सीएम हेल्पलाइन पर भी की शिकायत लेकिन किसी ने सुध नहीं ली
ग्रामीणों और बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल की जर्जर हालत को लेकर कई बार संबंधित विभाग और स्थानीय जिम्मेदारों को शिकायत की गई। यहां तक कि सीएम हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत की गई, लेकिन आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने स्कूल की बदहाल स्थिति के लिए संबंधित शिक्षा विभाग और ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्कूल भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
ग्रामीण बोले शिकायत के बाद भी विधायक ने भी नहीं दिया ध्यान
ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक सुरेश राजे से भी स्कूल की समस्या को लेकर शिकायत करने का दावा किया है। ग्रामीणों के अनुसार, विधायक की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि प्रदेश में भाजपा की सरकार है और वे कांग्रेस के विधायक हैं, इसलिए इस मामले में वह कुछ नहीं कर सकते, ग्रामीणों का कहना है कि विधायक चाहे किसी भी पार्टी का हो अपने क्षेत्र की जनता के लिए इतना छोटा सा काम तो करवा ही सकता है, लेकिन क्षेत्र के विधायक ने भी इस काम के लिए मना कर दिया। हालांकि ग्रामीणों के आरोप पर विधायक का पक्ष सामने नहीं आया है।
BRC ने पंचायत पर फोड़ा ठीकरा, अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोडा
डबरा बीआरसी विवेक सिंह चौकोटिया ने मामले में जल्द से जल्द इस अव्यवस्था को दूर कराने की बात कही है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामले की जानकारी देने की बात कही है। उन्होंने स्कूल में जलभराव के लिए पंचायत द्वारा बनाई गई सड़क पर ठीकरा फोड़ दिया लेकिन स्कूल की बदहाली, जर्जर होतिओ बिल्डिंग के सवाल पर गोल-गोल जवाब देते नजर आए, अब ग्रामीण सवाल कर रहे हैं कि वर्षों से इस जर्जर हालत में चल रहे इस सरकारी स्कूल की तस्वीर कब बदलेगी, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है ? बहरहाल बच्चों की जान और भविष्य से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर भी बड़ा सवाल है।
SEBI ने FPI के लिए डिजिटल PoA को दी मंजूरी, कस्टोडियन सेवा होगी अधिक आसान
पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाते हुए उन्हें अपने ‘संरक्षक’ को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) देने की अनुमति दे दी है। सेबी ने बृहस्पतिवार को कहा कि संशोधित नियमों के तहत एफपीआई अपने कस्टोडियन या संरक्षक के पक्ष में पीओए जारी कर सकता है। इसमें एफपीआई का पता दर्ज होना चाहिए और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अनुसार डिजिटल हस्ताक्षर के जरिये दस्तावेज पर दस्तखत किए जा सकते हैं।
पीओए वह दस्तावेज है जिसके जरिये एफपीआई अपने ‘कस्टोडियन’ को उसकी ओर से काम करने के लिए अधिकृत करता है। एफपीआई के लिए ‘कस्टोडियन’ एक ऐसी वित्तीय संस्था होती है, जो निवेशकों की प्रतिभूतियों और परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखने तथा उनका प्रबंधन करने का काम करती है। नियामक ने कहा कि यह कदम एफपीआई पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के उसके लगातार जारी प्रयासों का हिस्सा है।
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इसके तहत सेबी पहले भी एफपीआई पंजीकरण, पैन, बैंक और डीमैट खातों के लिए साझा आवेदन फॉर्म (सीएएफ), पंजीकरण दस्तावेजों पर भारतीय डिजिटल हस्ताक्षर की अनुमति और सीएएफ पोर्टल में डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा जैसे कदम उठा चुका है। सेबी के मुताबिक, इस परिपत्र के प्रावधान 20 अगस्त, 2026 से प्रभावी होंगे।
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