Bhupendra Patel ने अमेरिका में गुजरात की नयी Tourism Policy में निवेश की अपील की
सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, 19 अगस्त गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार एक नयी पर्यटन नीति ला रही है। उन्होंने साथ ही कारोबारी समूहों से राज्य में निवेश करने की अपील की। पटेल ने यहां विश्व उमिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार एक नयी पर्यटन नीति ला रही है। मैं राज्य में होटल और उससे जुड़े आधारभूत संरचना के विकास में निवेश करने के लिए आपको आमंत्रित करता हूं।’’ मुख्यमंत्री आगामी ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के दौरान राज्य में निवेश आकर्षित करने की कोशिशों के तहत विश्व बैंक और भारतीय मूल के कारोबारियों के साथ बैठकें कीं। पटेल के सैन फ्रांसिस्को से यहां पहुंचने पर विश्व उमिया फाउंडेशन के नेतृत्व में गुजराती समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत किया।
सैन फ्रांसिस्को में उन्होंने सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा और जैव प्रौद्योगिकी के लिए राज्य को एक वैश्विक केंद्र बनाने की योजनाओं को रेखांकित किया था। पटेल अमेरिका और कनाडा की यात्रा पर हैं। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य दुनिया भर के उद्योगपतियों, निवेशकों और प्रौद्योगिकी दिग्गजों को आने वाले ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027’ में शामिल होने और गुजरात में निवेश करने के लिए आमंत्रित करना है।
मुख्यमंत्री विश्व बैंक में एक संवाद सत्र में शामिल हुए, जहां उन्होंने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) के बारे में एक प्रस्तुति दी। पटेल ने अमेरिका में अपनी मुलाकातों के दौरान गुजरात को भारत के विकास के इंजन के तौर पर पेश किया है और ‘विकसित गुजरात-2047’ के जरिए 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में अगुवाई करने के अपने संकल्प को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, गुजरात सेमीकंडक्टर, एआई, डेटा सेंटर और जैव प्रौद्योगिकी जैसे नए युग के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा और उन्हें भरोसा है कि ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट 2027’ इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत मंच साबित होगा।
पिछला वाइब्रेंट गुजरात समिट जनवरी 2024 में हुआ था, जबकि हर दो साल में होने वाले इस कार्यक्रम का 11वां संस्करण 2027 में आयोजित किया जाना है।
Explainer: हाईकोर्ट-मंत्रालय की कैंटीन में छापेमारी, 21 साल में 25 पोस्टिंग…जानें शाहरुख खान को नोटिस भेजने वाले तुकाराम मुंढे की कहानी
मुंबई का एक पॉश रेस्टोरेंट में एक कॉल आया. फोन उठाने पर सामने से आवाज आई कि टेबल बुक करना है. इसके बाद रेस्टोरेंट में मानो भूचाल आ गया हो. रेस्टोरेंट के सीनियर्स सहित पूरी टीम के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगीं. किचन से लेकर रेस्टोरंट तक सबकुछ दोबारा चेक किया जाने लगा. सामान की एक्सापइरी से लेकर फ्रिज के तापमान और साफ-सफाई तक की चेकिंग शुरू हो गई. ऐसा इसलिए क्योंकि टेबल की बुकिंग तुकाराम मुंढे के नाम से हुई थी. बाद में पता चलता है कि ये बुकिंग तुकाराम ने नहीं बल्कि उनके बेटे ने अपने बर्थडे के मौके पर शायद से दोस्तों के साथ पार्टी करने के लिए करवाई थी.
अब सवाल आता है कि आखिर हम आपको अचानक ये कहानी क्यों सुना रहे हैं. आखिर ये तुकाराम कौन है. तो बता दें, तुकाराम FDA के कमिश्नर हैं. कमिश्नर बनने के महज तीन महीने में ही उन्होंने 1100 से अधिक छापेमारी करके 165 लाइसेंस रद्द कर दिए. उनका खौफ ऐसा है कि 21 साल की नौकरी में उनके 25 ट्रांसफर हो गए. खास बात है कि तुकाराम मुंढे ने अब बॉलीवुड स्टार अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस भेज दिया है. तुकाराम की जद में खुद बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान भी आ गए हैं. तीनों स्टार्स को विमल पान मसाला के ऐड के लिए नोटिस जारी किया गया है. ऐसे में आइये जानते हैं रियल लाइफ सिंघम तुकाराम मुंढे की रियल लाइफ स्टोरी….
किसान परिवार से IAS तक का सफर
3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले में रहने वाले एक किसान परिवार के घर तुकाराम का जन्म हआ था. गांव में पानी और बिजली की किल्लत थी. परिवार पर पुराना कर्ज था, जिस वजह से तुकाराम ने बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ घर की जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी. तीसरी कक्षा से ही पिता के साथ वे खेती में जुट गए थे. रात में जब बिजली आती तो सिंचाई के लिए वे खेत जाते थे और सुबह फिर से स्कूल. कक्षा 10वीं तक यही उनकी लाइफ हो चुकी थी.
10वीं के बाद तुकाराम के भाई की औरंगाबाद में नौकरी लग गई तो उन्होंने तुकाराम को भी अपने पास ही बुला लिया. वहीं से उन्होंने 12वीं की और बीए में एडमिशन लिया. 1996 में उन्होंने यूनिवर्सिटी टॉप की. पढ़ाई में रुचि और अच्छे नंबर्स देखकर भाई ने तुकाराम को UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली भेज दिया. दिल्ली में उनसे एक बार एक होटल में वेटर ने पूछा कि क्या वे बीयर लेंगे. इस बात से तुकाराम इतने आहत हुए कि वह दिल्ली छोड़कर वापस औरंगाबाद आ गए. इसके बाद तुकाराम ने 1997 में UPSC की परीक्षा दी लेकिन सफल नहीं हुए. साल 1999 में वे इंटरव्यू तक पहुंचे पर यहां भी असफल हो गए. बीए में कॉलेज टॉप करने वाले तुकाराम एमए में महज 57 प्रतिशत नंबर ला पाए. इसके बाद उन्होंने UPSC का ख्वाब छोड़ दिया और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी और इसे पास भी कर लिया. पहली बार में ही वे सेकंड ग्रेड के अधिकारी बन गए. हालांकि, ये बात तुकाराम के भाई को पसंद नहीं आई, जिस वजह से दोनों के बीच दूरी आ गई. इसके बाद उन्होंने फिर से UPSC की तैयारी की और 2005 में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल करते हुए आईएएस अधिकारी बन गए.
पहली पोस्टिंग से ही शुरू हुआ सख्त एक्शन
बतौर असिस्टेंट कलेक्टर तुकाराम की पहली पोस्टिंग सोलापुर में हुई. इस दौरान, उन्होंने अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई की, जिस वजह से उनके ऊपर जानलेवा हमले भी हुए. 2007 में उन्हें नांदेड़ भेजा गया. यहां भी उन्होंने अवैध रेत खनन के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की, जिस वजह से कुछ ही महीने में उनका तबादला हो गया. 2012 में मुंबई सेल्स टैक्स ऑफिसर के रूप में उन्होंने फिर ताबड़तोड़ एक्शन लिया और सरकार के लिए तगड़ी रकम की वसूली की.
नवंबर 2014 में उन्हें फिर से सोलापुर भेजा गया लेकिन इस बार कलेक्टर के रूप में. उन्होंने इस बार पानी के टैंकरों में होने वाली हेराफेरी के खिलाफ कार्रवाई की, जिस वजह से उनकी पहचान महाराष्ट्र के ‘वॉटरमैन’ के रूप में हो गई. 2016 में वे नवी मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त बने. इस दौरान उन्होंने ‘वॉक विद कमिश्नर’ अभियान की शुरुआत की, जिसे आम जनता का खूब समर्थन मिला.
21 साल की नौकरी में 25 पोस्टिंग
तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे खास बात उनका ट्रांसफर है. करीब 21 साल की नौकरी में उनका 25 बार ट्रांसफर हुआ. यानी करीब-करीब हर 10 महीने में ही उनको नई पोस्टिंग दे दी गई. वे इसे अपने करियर की कमजोरी नहीं कहते. वे कहते हैं कि सरकारी नौकरी में ट्रांसफर आम बात है. हर नई पोस्टिंग बदलाव लाने का नया मौका देती है.
FDA कमिश्नर बनते ही एक्शन मोड
25 मई 2026 में तुकाराम महाराष्ट्र FDA का कमिश्नर बने, जिसके बाद खाद्य और दवा सुरक्षा को लेकर कार्रवाई तेज हुई. कमिश्नर बनने के तीन महीने नहीं पूरे हुए थे और वे तब तक 1,100 से अधिक छापेमारी करके 165 लाइसेंस सस्पेंड कर चुके थे. पतंजलि से जुड़े भ्रामक विज्ञापन के मामले में भी उन्होंने कार्रवाई की और सामान जब्त किए.
मंत्रालय-हाईकोर्ट की कैंटीन तक में छापेमारी
तुकाराम की लीडरशिप में एफडीए ने नामी क्विक कॉमर्स कंपनियों के वेयरहाउसेज में भी छापेमारी की. उन्होंने इस दौरान, नियमों का उल्लंघन करने वाले वेयरहाउसेज का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया. उन्होंने मुंबई के कई फेमस पिज्जा स्टोर्स, फेमस होटल्स और रेस्टोरेंट्स को भी नहीं बख्शा. मुंढे की कार्रवाई की जद में बॉम्बे हाईकोर्ट, मंत्रालय और आईआईटी बॉम्बे की कैंटीन भी आ चुकी हैं. दरअसल, उनकी कार्रवाई पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन सिर्फ प्राइवेट संस्थानों में ही क्यों देखा जा रहा है. इसके बाद तुकाराम की टीम ने सरकारी ऑफिसों की कैंटीन और स्टोरों में ताबड़तोड़ कार्रवाई की.
रेस्टोरेंट में पानी को लेकर नया निर्देश
तुकाराम की लीडरशिप में FDA ने महाराष्ट्र के रेस्टोरेंट्स के लिए निर्देश जारी किए कि ग्राहकों से पहले ही यह नहीं पूछा जाएगा कि वह पैक्ड वॉटरबोटल लेंगे या फिर नॉर्मल. हर एक ग्राहक को साफ और स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाना होगा. अगर कोई ग्राहक खुद बोले की उसे पैक्ड वाटरबोटल चाहिए तो ही उसे बॉटल दी जाए.
एनालॉग पनीर पर कार्रवाई और शाहरुख खान को नोटिस
देश भर में अभी एनालॉग पनीर का मुद्दा सुर्खियों में है. इसके खिलाफ भी मोर्चा खोलने वाले तुकाराम ही थे. उन्होंने एनालॉग पनीर यानी डेयरी से अलग तरीके से तैयार किए जाने वाले नकली या गैर-मानक पनीर के उत्पादन और बिक्री पर कार्रवाई की. उन्होंने इसी दौरान, इलायची के विज्ञापन को लेकर बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस भेजा है. FDA का आरोप है कि इलायची के नाम पर पान मसाला का प्रचार किया जा रहा था.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi
News Nation








