Israel election पर फलस्तीनी राजदूत Abu Shawesh का आरोप, गोलियों के दम पर शासन चुन रहा इजराइल
इजराइल के संसदीय चुनाव से पहले एक बार फिर फलस्तीनी लोगों को उस देश की घरेलू राजनीति की कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। भारत में फलस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने बुधवार को यह कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इज़राइली लोग मतपत्रों के ज़रिए ऐसे नेताओं को चुनना चाहते हैं जो गोलियों के दम पर हम पर शासन करें।
उन्होंने यहां फलस्तीनी दूतावास में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, फलस्तीनी भूमि कोई चुनावी पुरस्कार नहीं है। फलस्तीनी लोगों की जिंदगी चुनाव प्रचार की मुद्रा नहीं है। फलस्तीनियों के अधिकार इजराइली चुनाव में गिने जाने वाले मतपत्र नहीं हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हम इस चुनाव पर नजर रख रहे हैं। शावेश ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 2026 की शुरुआत में घोषित बोर्ड ऑफ पीस को गाजा में ‘‘संघर्ष’’ के समाधान की दिशा में एक कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह गाजा में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने की पहल नहीं है। विदेश मंत्रालय में सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन की फलस्तीन यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने फलस्तीनी प्रधानमंत्री मोहम्मद मुस्तफा से मुलाकात की है।
रामल्ला स्थित फलस्तीन में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय (आरओआई) ने भी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि चर्चा भारत-फलस्तीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे साझेदारी संबंधों को और मजबूत करने तथा आपसी हितों के प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही। रंगनाथन ने रामल्ला में फलस्तीन के विदेश मामलों एवं प्रवासी मामलों के मंत्री वरसेन अघाबेकियन शाहिन और कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। शावेश ने संवाददाताओं से कहा, कल से फलस्तीन में एक उच्चस्तरीय राजनयिक दल मौजूद है... भारत तीन प्रमुख परियोजनाएं स्थापित करने जा रहा है और इनमें पहली परियोजना एक अस्पताल की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2017 में अपनी फलस्तीन यात्रा के दौरान इसकी घोषणा की थी। हम अब उस परियोजना के क्रियान्वयन की शुरुआत करने जा रहे हैं और कल हमने अंतिम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी परियोजना व्यावसायिक प्रशिक्षण से संबंधित है और इसके लिए फलस्तीन में एक केंद्र स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने कहा, हम इसके बहुत करीब हैं। रंगनाथन 16 से 21 अगस्त तक मिस्र, फलस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। रामल्ला स्थित भारत के प्रतिनिधि कार्यालय ने बताया कि रंगनाथन ने फलस्तीन के स्वास्थ्य मंत्री माजिद अबू रमजान से भी मुलाकात की और फलस्तीनी स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।
फलस्तीनी राजदूत ने इजराइल पर चरमपंथी इजराइली बाशिंदों को छूट देने का आरोप लगाया, जो कथित तौर पर फलस्तीनियों को डरा-धमकाकर और परेशान करके उन्हें उनकी प्राचीन मातृभूमि से बेदखल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इजराइल में संसदीय चुनाव से 69 दिन पहले, फलस्तीनी लोगों को एक बार फिर इजराइल की घरेलू राजनीति की कीमत चुकानी पड़ रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या इजराइल में होने वाले चुनाव पर फलस्तीन करीबी नजर रख रहा है, शावेश ने कहा, हां... हम चुनाव पर नजर रख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि फलस्तीन की मुख्य रणनीति अपनी मातृभूमि के लिए संघर्ष करना है और हम अपनी मातृभूमि नहीं छोड़ेंगे। हम अपना हर प्रयास करेंगे। इजराइली चुनाव पर उन्होंने आरोप लगाया कि दुर्भाग्य से बार-बार फलस्तीनी लोग कट्टरपंथी लोगों की वजह से कीमत चुका रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इजराइली नेता मतपत्रों के जरिये सत्ता में लौटना चाहते हैं और गोलियों से हम पर शासन करना चाहते हैं।
Maharashtra Govt ने जमीन आवंटन से रोक हटाई, Housing Society को नीलामी से मिलेंगे भूखंड
महाराष्ट्र सरकार ने 2010 से सहकारी आवासीय सोसाइटी को सरकारी जमीन आवंटित करने पर लगी रोक हटा दी है लेकिन नीति में संशोधन करते हुए ऐसी सोसाइटी के लिए पिछड़े वर्गों और दिव्यांगों के लिए फ्लैट का आवंटन अनिवार्य कर दिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को कहा कि नयी नीति के तहत, सरकारी जमीन प्राप्त करने वाली प्रत्येक आवासीय सोसाइटी के कम से कम 20 प्रतिशत फ्लैट या भूखंड पिछड़े वर्गों को और पांच प्रतिशत फ्लैट या भूखंड दिव्यांगों को आवंटित किये जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि यह नीति सरकारी भूखंड के आवंटन के लिए पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया का भी प्रावधान करती है।
सरकार ने इससे पहले नौ जुलाई, 1999 और 25 मई, 2007 के प्रस्तावों के तहत सहकारी आवास सोसाइटी को भूमि आवंटित की थी। लेकिन 2010 में हुए विवाद के बाद नयी सोसाइटी को भूखंड आवंटित करने की प्रक्रिया रोक दी गई थी। बावनकुले ने बताया कि संशोधित नीति को कोल्हापुर की संजय गांधी सहकारी आवासीय सोसाइटी द्वारा उच्च न्यायालय में दायर याचिका और 25 नवंबर, 2024 को उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
नयी व्यवस्था के तहत, सरकारी जमीन अब पहले वाले लॉटरी तरीके से आवंटित नहीं की जाएगी। अब जिलाधिकारी उपलब्ध भूखंड की सूची तैयार करेंगे और सार्वजनिक विज्ञापनों तथा तकनीकी और वित्तीय बोली प्रक्रिया के जरिए नीलामी करवाएंगे। बावनकुले ने बताया कि मुंबई शहर और उपनगरों में जमीन की बाजार कीमत का 2.5 प्रतिशत और महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में पांच प्रतिशत आधार मूल्य होगा।
सबसे अधिक बोली लगाने वाली सोसाइटी को चुना जाएगा। जमीन केवल 30 साल के लिए पट्टे पर दी जाएगी और यह अवधि पूरी होने के बाद ही इसे ‘क्लास-1 ऑक्यूपेंसी’ में बदलने के लिए योग्य माना जाएगा। इस नीति के तहत उपलब्ध भूखंड का 40 प्रतिशत हिस्सा सामान्य श्रेणी के लिए, 15 प्रतिशत राज्य सरकार, स्थानीय निकाय और निगम के कर्मियों के लिए, 10 प्रतिशत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और खानाबदोश जनजातियों के लिए, और 10 प्रतिशत लेखकों, कलाकारों, खिलाड़ियों और पत्रकारों के लिए आरक्षित किया गया है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों, सशस्त्र बलों के सेवारत या पूर्व कर्मियों, चुने गए और पूर्व सांसदों एवं विधायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और उनके उत्तराधिकारियों, दिव्यांगों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए पांच-पांच प्रतिशत आरक्षण रखा गया है।
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