Cough care tips : सुबह की जकड़न, सीने में सीटी की आवाज...जानिए कब सामान्य है खांसी, कब बन सकती है TB?
Monsoon health care tips : मौसमी खांसी-जुकाम को अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार रहने वाली खांसी एलर्जी, अस्थमा, टीबी या फेफड़ों की गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है. आइये फरीदाबाद के चिकित्सक डॉ. अर्जुन खन्ना से जानते हैं कि कब खांसी को गंभीरता से लें. कौन-सी जांच जरूरी है और हर खांसी में एंटीबायोटिक क्यों नहीं लेनी चाहिए. लोकल 18 से डॉ. अर्जुन बताते हैं कि सामान्य जुकाम, गले में खराश या हल्के इंफेक्शन की वजह से होने वाली खांसी अक्सर चार से पांच दिन में कम होने लगती है. बच्चों और बड़ों में खांसी के कारण अलग हो सकते हैं. बच्चों में खांसी का सबसे आम कारण इंफेक्शन हो सकता है. बड़ों में टीबी, फेफड़ों का कैंसर, फेफड़ों की सिकुड़न और ILD जैसी बीमारियां भी कारण बन सकती हैं.
Google Chrome यूजर्स के लिए CERT-In की हाई रिस्क चेतावनी, विंडोज मैक लिनक्स पर साइबर अटैक का खतरा, तुरंत अपडेट करें ब्राउजर
Google Chrome इस्तेमाल करने वाले करोड़ों भारतीय यूजर्स के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने इस लोकप्रिय ब्राउजर के कुछ वर्जन में गंभीर सुरक्षा खामियां पाई हैं, जिनका फायदा उठाकर साइबर अपराधी यूजर्स के सिस्टम तक पहुंच बना सकते हैं।
सरकारी एजेंसी ने जो चेतावनी जारी की है, उसे हाई रिस्क कैटेगरी में रखा गया है। इसका मतलब है कि खतरा काफी गंभीर है और तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। विंडोज, macOS और Linux—तीनों ऑपरेटिंग सिस्टम पर Chrome के पुराने वर्जन खतरे में हैं।
किन वर्जन पर है सबसे ज्यादा खतरा
CERT-In के मुताबिक विंडोज और मैक यूजर्स जो Chrome के 145.0.7632.75/76 से पुराने वर्जन चला रहे हैं, उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं Linux यूजर्स के लिए 144.0.7559.75 से पुराने वर्जन असुरक्षित बताए गए हैं।
एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि ये खामियां Chrome के CSS रेंडरिंग कंपोनेंट में पाई गई हैं। इन कमजोरियों का इस्तेमाल करके हमलावर ब्राउजर की मेमोरी हैंडलिंग को मैनिपुलेट कर सकते हैं। एक बार सिस्टम तक पहुंच बनने के बाद वे पर्सनल इंफोर्मेशन, बैंकिंग डिटेल्स और अन्य संवेदनशील डेटा चुरा सकते हैं।
रिमोट अटैक का बड़ा खतरा
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन खामियों के जरिए रिमोट अटैक संभव है। इसका मतलब है कि हमलावर को आपके सिस्टम तक फिजिकल एक्सेस की जरूरत नहीं है। वे दूर बैठे-बैठे आपके कंप्यूटर या लैपटॉप में घुसपैठ कर सकते हैं।
इस तरह के हमलों में डेटा चोरी के अलावा सर्विस डिसरप्शन भी हो सकता है। यानी आपका सिस्टम ठीक से काम करना बंद कर सकता है या हैकर्स उसे अपने नियंत्रण में ले सकते हैं। ऐसे में व्यक्तिगत यूजर्स के साथ-साथ कॉर्पोरेट और सरकारी संगठनों के लिए भी यह गंभीर चिंता का विषय है।
यूजर्स को क्या करना चाहिए
CERT-In ने सभी Chrome यूजर्स से अपील की है कि वे बिना देरी किए अपना ब्राउजर अपडेट कर लें। Google ने अपने स्टेबल चैनल के माध्यम से सिक्योरिटी पैच जारी कर दिए हैं, जो इन खामियों को दूर करते हैं।
ब्राउजर अपडेट करना बेहद आसान है। यूजर्स Chrome खोलकर सेटिंग्स में जा सकते हैं और ‘About Chrome’ सेक्शन में अपडेट चेक कर सकते हैं। अगर नया वर्जन उपलब्ध है तो वह अपने आप डाउनलोड और इंस्टॉल हो जाएगा।
व्यक्तिगत यूजर्स के अलावा संगठनों को भी अपने सभी सिस्टम्स पर तुरंत यह अपडेट लागू करने की सलाह दी गई है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी चेतावनियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
नियमित अपडेट क्यों जरूरी है
यह पहली बार नहीं है जब किसी लोकप्रिय सॉफ्टवेयर में सुरक्षा खामियां पाई गई हों। डिजिटल युग में साइबर खतरे लगातार विकसित हो रहे हैं और हैकर्स नए-नए तरीके खोज रहे हैं।
इसलिए सॉफ्टवेयर कंपनियां नियमित रूप से सिक्योरिटी पैच और अपडेट जारी करती रहती हैं। यूजर्स के लिए जरूरी है कि वे अपने सभी डिवाइस और एप्लिकेशन को अपडेटेड रखें। इससे न सिर्फ साइबर अटैक से बचाव होता है बल्कि नए फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस भी मिलती है।
CERT-In भारत सरकार की नोडल एजेंसी है जो साइबर सुरक्षा घटनाओं पर नजर रखती है और समय-समय पर अलर्ट जारी करती है। एजेंसी की सलाह को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इससे बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
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