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'मेरे साथ कई बार सोना पड़ेगा...', आकांक्षा चौधरी के सामने रखी गई भद्दी डिमांड, मना करने पर दी ये धमकी

Akanksha Choudhary on Casting Couch: रियलिटी शो 'लॉक अप 2' अपने विवादों, चौंकाने वाले खुलासों और कंटेस्टेंट्स के निजी जीवन से जुड़े सीक्रेट्स की वजह से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. शो के दौरान कई पार्टिसिपेंट्स ने अपनी जिंदगी के ऐसे अनुभव साझा किए, जिन्होंने दर्शकों को भावुक कर दिया. वहीं अब शो से बाहर होने से पहले आकांक्षा चौधरी ने भी अपनी जिंदगी का एक बेहद दर्दनाक और हैरान कर देने वाला अनुभव साझा किया है.

आकांक्षा फिनाले तक का सफर तय नहीं कर सकीं और शो से बाहर हो गईं. हालांकि, एलिमिनेशन से पहले उन्होंने अपने जीवन से जुड़ा ऐसा खुलासा किया, जिसे सुनकर शो के होस्ट रितेश देशमुख, स्पेशल गेस्ट फराह खान और बाकी कंटेस्टेंट्स भी हैरान रह गए. बता दें, आकांक्षा ने दावा किया कि ब्यूटी पेजेंट्स में हिस्सा लेने के दौरान उन्हें कथित तौर पर कास्टिंग काउच जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था.

ब्यूटी पेजेंट के लिए पैसों की थी जरूरत

आकांक्षा चौधरी ने बताया कि जब वो ब्यूटी पेजेंट्स में हिस्सा ले रही थीं, तब आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. पेजेंट की तैयारी के लिए गारमेंट्स, ग्रूमिंग और ट्रेनिंग पर काफी खर्च आता था, जिसे उनका परिवार केरी नहीं कर पा रहा था. उन्होंने कहा, "उस समय मुझे करीब एक से दो लाख रुपये की जरूरत थी. मेरी फैमिली इतने पैसे अफॉर्ड नहीं कर सकती थी, इसलिए मैंने मदद लेने का फैसला किया." आकांक्षा के मुताबिक, उन्होंने पेजेंट इंडस्ट्री से जुड़े एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिन्हें वो कई सालों से जानती थीं और जो कई कम्पीटीशन्स में जज की भूमिका भी निभा चुके थे.

नौकरी के बदले मांगी थी आर्थिक मदद

आकांक्षा ने बताया कि उन्हें भरोसा था क्योंकि वो शख्स पहले भी कई पार्टिसिपेंट्स की आर्थिक मदद कर चुका था. इसलिए उन्होंने उनसे विनम्रता से मदद मांगी. उन्होंने कहा, "मैंने उनसे कहा था कि अगर आप अगले दो-तीन महीनों के लिए मेरी आर्थिक मदद कर दें, तो बदले में मैं आपके पास नौकरी कर लूंगी. फिलहाल मुझे सिर्फ एक-दो लाख रुपये की जरूरत है." आकांक्षा के मुताबिक, सामने वाले व्यक्ति ने शुरुआत में तुरंत मदद के लिए हामी भर दी और उन्हें अपने घर बुलाया.

'मुझे असहज महसूस कराया'

आकांक्षा ने आरोप लगाया कि जब वो उनसे मिलने उनके घर पहुंचीं, तो शुरुआत में उन्हें लगा कि बातचीत नार्मल होगी, लेकिन वहां पहुंचने के बाद स्थिति बदल गई. उनके मुताबिक, "उन्होंने मुझे गले लगाने के लिए आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन अचानक मुझे असहज तरीके से पकड़ लिया. मैंने तुरंत खुद को छुड़ाया और उनका हाथ झटक दिया." आकांक्षा ने बताया कि इस घटना से वो बेहद घबरा गई थीं.

'पैसों के बदले सेक्स की डिमांड की गई'

आकांक्षा ने आगे दावा किया कि इसके बाद उस व्यक्ति ने उनसे कहा कि अगर वो पहले उनके पास आतीं तो अब तक काफी सफल हो चुकी होतीं. फिर उन्होंने कथित तौर पर आर्थिक मदद के बदले शारीरिक संबंध बनाने की मांग रखी. आकांक्षा के अनुसार, "उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें पैसे दूंगा, लेकिन बदले में तुम्हें मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने होंगे. उन्होंने यहां तक कहा कि एक महीने में कई बार मेरे साथ सोना पड़ेगा." आकांक्षा ने बताया कि उन्होंने तुरंत इस ऑफर को ठुकरा दिया. उन्होंने कहा, "मैंने साफ कह दिया कि मैं ऐसा नहीं कर सकती."

मना करने पर दी धमकी

आकांक्षा का दावा है कि उनके इनकार के बाद वो व्यक्ति नाराज हो गया और उन्हें भविष्य में पछताने की बात कहने लगा. उन्होंने बताया, "उन्होंने कहा कि तुम इस फैसले पर बहुत बुरी तरह पछताओगी." ये घटना याद करते हुए आकांक्षा भावुक हो गईं और शो में रो पड़ीं.  आकांक्षा की आपबीती सुनकर शो के होस्ट रितेश देशमुख, फराह खान और घर के अन्य कंटेस्टेंट्स भी भावुक नजर आए. 

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इतिहास के पन्नों में 3 अगस्त: देश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट​, जो अंगदान जागरूकता की बन गया मिसाल

नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। 3 अगस्त भारतीय चिकित्सा जगत के लिए बेहद खास दिन है। यही वह तारीख है, जब साल 1994 में भारत ने मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक ऐसा इतिहास रचा, जिसने लाखों दिल के मरीजों के लिए नई उम्मीद जगा दी। इसी दिन नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में देश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया था।

1994 से पहले अगर किसी भारतीय मरीज को हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती थी, तो उसके सामने विदेश जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता था। यह इलाज बेहद महंगा था और हर किसी की पहुंच से बाहर था। भारत में डॉक्टर लगातार इस दिशा में काम कर रहे थे, लेकिन कानूनी व्यवस्था और तकनीकी चुनौतियों के कारण सफलता नहीं मिल पा रही थी।

इस दिशा में सबसे बड़ा बदलाव 7 जुलाई 1994 को आया, जब मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। इस कानून ने भारत में कानूनी रूप से अंगदान और अंग प्रत्यारोपण का रास्ता खोल दिया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने पूरी तैयारी के साथ देश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करने का फैसला किया।

3 अगस्त 1994 को एम्स दिल्ली में वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. पी. वेणुगोपाल के नेतृत्व में करीब 20 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 42 वर्षीय मरीज देवी राम का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया। यह ऑपरेशन अपने समय के हिसाब से बेहद जटिल माना जाता था। पूरी प्रक्रिया लगभग 59 मिनट में पूरी हुई और सर्जरी पूरी तरह सफल रही। इस सफलता ने भारतीय चिकित्सा विज्ञान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।

देवी राम का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट सिर्फ एक मरीज की जान बचाने तक सीमित नहीं था। इसने पूरे देश में अंगदान के प्रति लोगों की सोच बदलने का काम किया। लोगों को यह समझ आया कि किसी व्यक्ति के अंगदान से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है। इसके बाद देश में धीरे-धीरे ऑर्गन डोनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ने लगी और कई अस्पतालों में हार्ट ट्रांसप्लांट की सुविधाएं विकसित हुईं।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि को सम्मान देने के लिए साल 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 अगस्त को राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस घोषित किया। पहली बार यह दिवस प्रधानमंत्री आवास पर मनाया गया, जहां उस समय तक सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज और एम्स के निदेशक डॉ. पी. वेणुगोपाल भी मौजूद थे।

इसी कार्यक्रम में डॉ. पी. वेणुगोपाल के प्रस्ताव पर ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन (ओआरबीओ) को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की भी घोषणा की गई। इसके बाद देश में अंगदान की व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

आज भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित डॉक्टरों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की बदौलत हजारों मरीजों को नया जीवन मिल रहा है।

हालांकि, आज भी सबसे बड़ी चुनौती अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं, तो हर साल हजारों मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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