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ग्वालियर का TMZ देश के टेलीकॉम विनिर्माण का नया केंद्र बनेगा: ज्योतिरादित्य सिंधिया

ग्वालियर में तैयार हो रहे भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) के लिए आज मंगलवार को मुंबई में इन्वेस्टर्स मीट और रोडशो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

निवेशकों को संबोधित करते हुए केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय है और भारत की विकास यात्रा का मजबूत आधार बनने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश टेलीकॉम और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) स्थापित होना एक ऐतिहासिक कदम है।

सिंधिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया है। केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी से ग्वालियर को राष्ट्रीय टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदेश की बेहतर कनेक्टिविटी, भूमि उपलब्धता और उद्योग-अनुकूल नीतियां निवेशकों का भरोसा बढ़ा रही हैं।

‘मेक इन इंडिया’ के साथ ‘मेक इन MP’ को भी मिलेगी नई गति

उन्होंने कहा कि ग्वालियर की भौगोलिक स्थिति इसे उत्तर और मध्य भारत का रणनीतिक औद्योगिक केंद्र बनाती है। अब समय आ गया है कि ‘मेक इन इंडिया’ के साथ ‘मेक इन MP’ को भी नई गति दी जाए। टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन से निवेश बढ़ेगा, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे।

उद्योगपतियों से MP में निवेश करने का आग्रह 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुंबई इन्वेस्टर्स मीट भारत को वैश्विक टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने उद्योग जगत से मध्यप्रदेश में निवेश करने और विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि ग्वालियर से शुरू हुई यह पहल देश के टेलीकॉम विनिर्माण क्षेत्र में नए दौर की शुरुआत करेगी।

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Health Tips: Digital Age में ब्रेन स्ट्रोक का नया लक्षण 'Dystextia', मोबाइल पर गलत मैसेज भेजना हो सकता है Stroke का संकेत

दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में स्ट्रोक वजह है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो स्ट्रोक के इलाज में हर एक मिनट कीमती होता है। जितना जल्दी मरीज को हॉस्पिटल ले जाया जाए, उतना ज्यादा रिकवरी की संभावना होता है। डॉक्टरों ने आज स्मार्टफोन के दौर में एक नया शुरुआती संकेत पहचाना है, जिसको डिस्टेक्स्टिया कहा जाता है। इसमें व्यक्ति फोन पर सही शब्द नहीं टाइप कर पाता, उसके वाक्य अर्थहीन हो जाते हैं या फिर लिखने में काफी गलतियां होने लगती हैं। कई मामलों में यह स्ट्रोक का पहला दिखने वाला संकेत मिला है।

जानें क्या है डिस्टेक्स्टिया

यह कोई बीमारी नहीं बल्कि डिजिटल माध्यम पर लिखने की क्षमता में अचानक से आने वाले बदलाव या गड़बड़ी को दिखाता है। यह Dysgraphia और Aphasia जैसे न्यूरोलॉजिकल लक्षणों का आधुनिक रूप है।

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हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सामान्य रूप से टाइप करता है, लेकिन अचानक से उसके मैसेज में गड़बड़ी दिखने लगे, शब्दों का क्रम बिगड़ जाए, सामान्य शब्द भी न याद आएं, अर्थहीन वाक्य बनने लगे और सही शब्द न टाइप कर पाएं। तो यह दिमाग में भाषा कंट्रोल करने वाले हिस्से के प्रभावित होने का संकेत हो सकता है।

डिस्टेक्स्टिया और स्ट्रोक का संबंध

स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग के किसी हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है। या फिर रक्त वाहिका फट जाती है। अगर यह हिस्सा भाषा या फिर लिखने की क्षमता को कंट्रोल करने वाले क्षेत्र को प्रभावित करता है, तो व्यक्ति को पढ़ने, बोलने या लिखने में परेशानी महसूस होती है।

आज के समय में लोग मोबाइल पर टाइप करके बातचीत करते हैं। इसलिए कई बार सबसे पहला बदलाव फोन पर भेजे गए मैसेज पर दिखता है। कुछ केस में मरीज हॉस्पिटल पहुंचने से पहले फैमिली में किसी को ऐसे मैसेज भेजे, जिसमें व्याकरण और अर्थ दोनों ही पूरी तरह से असामान्य हो, तो जांच में उनको स्ट्रोक की पुष्टि हो सकती है।

फोन पर टाइप करते समय कौन-से संकेत न करें नजरअंदाज

व्यक्ति जानने वाले शब्दों को भी बार-बार गलत लिखता हो।
मैसेज पढ़ने पर शब्द होते हैं, लेकिन इस मैसेज का कोई सही अर्थ न निकले।
अगर बिना किसी तकनीकी वजह के टाइपिंग में परेशानी होने लगे।

क्यों मानते हैं डिस्टेक्स्टिया को स्ट्रोक का शुरुआती चेतावनी संकेत

डिस्टेक्स्टिया इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज भी ज्यादातर लोग फोन पर लगातार मैसेज करते हैं। ऐसे में लिखने की क्षमता में अचानक बदलाव सबसे पहले डिजिटल बातचीत में नजर आ सकता है।

सिर्फ टाइपिंग में गलती होना ही स्ट्रोक का प्रमाण नहीं है। जल्दबाजी, ध्यान भटकना, या ऑटो करेक्ट से भी गलतियां हो सकती हैं। लेकिन अगर व्यक्ति पहले सामान्य रूप से टाइप करता था, लेकिन अगर अचानक से असामान्य मैसेज आने लगे, तो इसको गंभीरता से लेना चाहिए।

स्ट्रोक के शुरुआती संकेत

एक हाथ या एक पैर में कमजोरी
चेहरा के एक तरफ का हिस्सा लटक जाना
बोलने में परेशानी होना
अचानक से धुंधला दिखना
तेज सिरदर्द
संतुलन बिगड़ना
भ्रम या समझने में परेशानी

आधुनिक डिजिटल युग में स्ट्रोक एक शुरूआती संकेत माना जाता है। हालांकि यह कोई अलग बीमारी नहीं बल्कि दिमाग के भाषा और लेखन से जुड़े हिस्सों में आई समस्या का संकेत हो सकता है। हालांकि सिर्फ टाइपिंग में हुई एक-दो गलतियों से घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आपको लगातार बोलने में परेशानी, लगातार असामान्य मैसेज, चेहरे का टेढ़ा दिखना, हाथ-पैरों में कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं, तो इसको मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए।

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  Sports

वनडे त्रिकोणीय सीरीज, टेस्ट श्रृंखला और टी-20 श्रृंखला... पाकिस्तान तो नॉन स्टॉप क्रिकेट खेलने वाली है

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