गोरखपुर जेल में पुलिस की बड़ी लापरवाही, रेप का आरोपी दीवार फांदकर फरार, जेलर समेत 5 अधिकारी सस्पेंड
Gorakhpur Jail: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में बंद एक विचाराधीन कैदी 22 फुट ऊंची जेल की दीवार फांदकर फरार हो गया. घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया. मामले में शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने पर जेलर समेत पांच अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि वरिष्ठ जेल अधीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है.
पुलिस के मुताबिक, बांसगांव क्षेत्र के सरसोपार गांव का रहने वाला विपिन 18 जुलाई से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में जिला जेल में बंद था. शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे उसे 48 अन्य बंदियों के साथ जेल परिसर से सटी नई बाउंड्री वॉल के पास स्थित बगिया में काम के लिए ले जाया गया था. इसी दौरान उसने एक पेड़ पर चढ़कर 22 फुट ऊंची दीवार पार कर ली और फरार हो गया.
गिनती में एक बंदी कम मिलने पर घटना का खुलासा हुआ, सीसीटीवी फुटेज में दिखा, करीब 22 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार के बावजूद बंदी कैसे फरार हो गया? @dgpup @myogiadityanath @gorakhpurpolice #Gorakhpur #JailBreak #UPNews https://t.co/EmcJYp2EuV
— Rajeev Datt Panday (@DattRajeev) July 31, 2026
कैसे चला पता?
करीब दो घंटे बाद जब बंदियों की गिनती हुई तो एक कैदी कम मिला. इसके बाद पूरे जेल परिसर में तलाशी ली गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला. सूचना मिलते ही पुलिस और जेल प्रशासन सक्रिय हो गया और फरार कैदी की तलाश शुरू कर दी गई. घटना के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक की शिकायत पर शाहपुर थाने में फरार कैदी विपिन के साथ उसकी निगरानी में तैनात जेल वार्डर जितेंद्र कुमार गौतम और हेड जेल वार्डर ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है.
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मौके पर पहुंचे डीएम-एसएसपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम दीपक मीणा और एसएसपी डॉ. कौस्तुभ भी जिला जेल पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं, प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर जेल वार्डर जितेंद्र कुमार गौतम, जितेंद्र कुमार दुबे, हेड जेल वार्डर ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, रामजीत सिंह और जेलर अरुण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. इसके अलावा वरिष्ठ जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश शासन को भेजी गई है.
विभाग ने शुरू की जांच
कारागार प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है. जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, पुलिस की कई टीमें फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं.
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Explainer: Zero FIR क्या है? अगर आपके खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज हो जाए तो क्या होता है, क्या तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है?
Zero FIR क्या है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हाल ही में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में एक युवती के खिलाफ Zero FIR दर्ज की गई. इसके बाद यह कानूनी शब्द फिर चर्चा में आ गया है. दरअसल, ये पूरा मामला दिल्ली में हुई कथित घटना का है लेकिन शिकायत नोएडा में दर्ज हुई थी. बाद में यह केस आगे की कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस को भेजा गया था.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये Zero FIR होती क्या है? क्या यह सामान्य एफआईआर से अलग होती है? और अगर आपके खिलाफ Zero FIR दर्ज हो जाए तो उसके बाद क्या-क्या हो सकता है? ये नोएडा और दिल्ली पुलिस के बीच Zero FIR दर्ज करने और जांच करने का आखिर पूरा मामला क्या है समझने की कोशिश करते हैं.
Zero FIR क्या होती है?
Zero FIR ऐसी एफआईआर होती है जिसे किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया जा सकता है, भले ही घटना उस थाना क्षेत्र की न हुई हो. जानकारी के मुताबिक सामान्य तौर पर एफआईआर उसी थाने में दर्ज होती है जहां अपराध हुआ होता है. लेकिन अगर मामला संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का है और समय बर्बाद होने की आशंका है, तो पुलिस पहले Zero FIR दर्ज करती है और बाद में उसे संबंधित थाना क्षेत्र में भेज देती हैत. इस व्यवस्था का मकसद केवल इतना है कि शिकायत दर्ज कराने में देरी न होना होता है.
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इसे 'जीरो' एफआईआर क्यों कहा जाता है?
इसका नाम "Zero" इसलिए पड़ा क्योंकि शुरुआत में इसे संबंधित थाने का नियमित केस नंबर नहीं दिया जाता था. दरअसल, इसे अस्थायी रूप से दर्ज किया जाता है और बाद में जिस थाने का अधिकार क्षेत्र होता है, वहां पहुंचने पर नियमित एफआईआर नंबर आवंटित किया जाता है. इसलिए इसे जीरो एफआईआर कहा जाता है.
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