ट्रंप ने रोका एक और युद्ध? दूसरी सत्ता को दी प्रशासन की कमान, अब इजरायली सेना उठाएगी ये कदम
Israel Gaza War: गाजा पट्टी में जल्द शांति की उम्मीद जागी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि गाजा में हमास और दूसरे हथियारबंद संगठनों को पूरी तरह हथियार छोड़ने (निरस्त्रीकरण) पर सहमति बन गई है. ट्रंप के मुताबिक, जैसे-जैसे इस समझौते पर अमल होगा, इजरायली सेना भी गाजा से चरणबद्ध तरीके से अपनी वापसी शुरू करेगी.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को हुए इस समझौते को शांति और सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि इस समझौते को एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जैसे ही हमास और अन्य हथियारबंद समूह पूरी तरह हथियार छोड़ देंगे.
???? HUGE & HISTORIC: President Trump announces complete disarmament of Hamas and all armed groups in Gaza. A major breakthrough for lasting peace and security! Something many said could never be achieved!
— Commentary Donald J. Trump Posts From Truth Social (@TrumpDailyPosts) July 30, 2026
"Today, the Board of Peace reached a HISTORIC agreement for the COMPLETE… pic.twitter.com/EgJodU5TQh
क्या करेगी इजरायली सेना?
ट्रंप ने कहा कि इजरायली सेना गाजा से धीरे-धीरे वापस लौटना शुरू कर देगी. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल और नया फिलिस्तीनी पुलिस बल मिलकर गाजा में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे, ताकि वहां रहने वाले लोगों और पड़ोसी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. हालांकि अभी तक इस पर इजरायली सेना की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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फिलिस्तीनी सरकार संभालेगी प्रशासन
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह समझौता गाजा के लिए उनकी 20 सूत्रीय योजना को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि आगे चलकर गाजा का प्रशासन एक नई फिलिस्तीनी सरकार संभालेगी, जो शांति बोर्ड के साथ मिलकर काम करेगी. ट्रंप के मुताबिक, इसका उद्देश्य फिलिस्तीनी लोगों की मदद करना और क्षेत्र में स्थायी शांति कायम करना है. वर्तमान की बात करें तो गाजा में अब हमास ने अपना प्रशासनिक ढांचा भंग कर दिया है और सत्ता राष्ट्रीय गाजा प्रशासन समिति (NCAG) नामक एक गैर-राजनीतिक 'टेक्नोक्रैट' समिति को सौंपी जा रही है.
इन देशों का ट्रंप ने जताया आभार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिस्र, कतर और तुर्की ने इस समझौते को कराने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने इन तीनों देशों और अपनी सरकार की टीम का धन्यवाद देते हुए कहा कि सभी के प्रयासों से यह बड़ी सफलता हासिल हुई है. ट्रंप ने कहा कि एक साल पहले गाजा में भीषण युद्ध चल रहा था, वहां गंभीर मानवीय संकट था और कई बंधकों को कैद करके रखा गया था. अब हमने शांति की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है.
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इंदौर में आस्था का महासंगम: चातुर्मास कलश स्थापना में 53 करोड़ की रिकॉर्ड बोली, बना नया इतिहास
इंदौर में आयोजित मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास महोत्सव में इस बार ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने धार्मिक आयोजनों के इतिहास में एक नई मिसाल कायम कर दी। कलश स्थापना के लिए श्रद्धालुओं ने इतनी ऊंची बोलियां लगाईं कि कुछ ही समय में कुल राशि करीब 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह आंकड़ा सामने आते ही आयोजन पूरे शहर ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
इस आयोजन में कई श्रद्धालुओं ने करोड़ों रुपये की बोलियां लगाईं। सबसे अधिक चर्चा उस बोली की रही, जिसमें दो श्रद्धालुओं ने 16 करोड़ 16 लाख रुपये की घोषणा की। आस्था और दान के इस अनोखे संगम ने जहां हजारों लोगों को प्रभावित किया, वहीं इतनी बड़ी राशि को लेकर कई सवाल भी उठने लगे हैं।
इंदौर चातुर्मास में कैसे लगी 53 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बोली?
चातुर्मास के दौरान कलश स्थापना को लेकर आयोजित बोली प्रक्रिया में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। एक के बाद एक बोली बढ़ती गई और कुछ ही देर में कुल बोली लगभग 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
जानकारी के अनुसार सबसे बड़ी बोली सपना मनीष गोधा और नवीन आनंद गोधा की ओर से 16 करोड़ 16 लाख रुपये की रही। इसके अलावा कई अन्य श्रद्धालुओं ने भी करोड़ों रुपये की बोलियां लगाईं।
मुख्य बोलियां इस प्रकार रहीं
16 करोड़ 16 लाख रुपये
5 करोड़ रुपये
3 करोड़ 55 लाख रुपये
3 करोड़ 33 लाख रुपये
2 करोड़ रुपये से अधिक की कई बोलियां
कलश स्थापना का धार्मिक महत्व क्या है?
जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान साधु-संत एक स्थान पर रहकर धर्म, संयम और आत्मकल्याण का संदेश देते हैं। इस अवधि में कई धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।
कलश स्थापना भी इन्हीं महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। श्रद्धालु इसे सौभाग्य, पुण्य और धर्म सेवा से जोड़कर देखते हैं। कई परिवार वर्षों पहले से इस अवसर का इंतजार करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार बोली में भाग लेते हैं।
रिकॉर्ड बोली के बाद क्यों उठ रहे हैं सवाल?
53 करोड़ रुपये की घोषित बोलियों के बाद शहर में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान किस प्रकार किया जाएगा। क्या पूरी रकम एक साथ जमा होगी या फिर इसे तय समय के अनुसार जमा कराया जाएगा? कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इतनी बड़ी आर्थिक घोषणा होने पर उसकी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।




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