Middle East Tension: अमेरिका-ईरान युद्ध में अब तक कितने भारतीयों की मौत? संसद में सरकार ने दी जानकारी
मिडिल ईस्ट में करीब 3 साल से तनाव व्याप्त है. पहले इजराइल और हमास के बीच चली जंग से पूरा मिडिल ईस्ट तनाव में था और उसके बाद अमेरिका-इजराइल और ईरान में बीच हो रही जंग ने हर किसी को परेशान कर दिया है. खास बात है कि इस जंग का दंश सिर्फ मिडिल ईस्ट तक ही सीमित नहीं रहा. मिडिल ईस्ट में हो रहे युद्धों का असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है. दरअसल, इस युद्ध के दौरान, कई भारतीय भी इस युद्ध में झुलसे हैं. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच हो रहे युद्ध में इस साल कई भारतीयों की मौत हुई है.
अमेरिका-ईरान युद्ध में अब तक 16 भारतीयों की गई जान
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, मध्य पूर्व में इस साल शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक 16 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है. इसमें 10 लोग ऐसे थे, जो जहाजों पर काम करते थे. ये जानकारी संसद में खुद विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में एक संसद सदस्य के सवाल का जवाब देते हुए दी.
किस देश में कितने लोगों की मौत हुई?
दरअसल, सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने लिखित सवाल में सरकार से पूछा था कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच इस साल शुरू हुए युद्ध में कितने भारतीयों की मौत हुई है. लिखित सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि 2026 में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध में 16 भारतीयों की मौत हुई है. 16 मौतों में एक मौत सऊदी अरब में, दो कुवैत में, आठ ओमान में, एक ईरान में चार भारतीयों की मौत यूएई में हुई है. 16 मृतकों के अलावा, 75 भारतीय भी घायल हुए हैं.
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कतर में 12 भारतीयों की मौत
कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि सघंर्ष से अलग एक हादसे में कतर के रास लफ्फान गैस सुविधा में 12 भारतीयों की मौत हुई है. उन्होंने बताया कि सरकार ने मृतकों के परिजनों के शवों को भारत लाने में पूरी मदद की है.
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10 लाख रुपये की आर्थिक मदद कर रही भारत सरकार
राज्यसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री ने आगे बताया कि घायल लोगों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज करवाया गया. भारतीय दूतावास ने परिवार से संपर्क बनाए रखा और उनके भारत लौटने में मदद की. युद्ध क्षेत्र में काम करने वाले जहाजी कर्मचारियों को भारत सरकार द्वारा 10 लाख रुपये का एक्स-ग्रेशिया मुआवजा दिया जा रहा है.
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अमेरिका-ईरान के कितने लोगों की अब तक मौत?
अमेरिका और ईरान के बीच 2026 में शुरू हुआ सैन्य संघर्ष मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भड़का था. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद इस युद्ध की शुरुआत हुई थी. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के हमलों में 3,500 से अधिक ईरानी नागरिक और सैन्यकर्मी की मौत हो चुकी है. वहीं, लेबनान में आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के करीब 1,000 से 2,500 लड़ाके मारे गए हैं. इसके अलावा, पेंटागन के आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो युद्ध में 18 से 20 अमेरिकी सैनिक की भी मौत हुई है. हालांकि, ईरान का दावा है कि अमेरिका के 200 से अधिक सैनिकों को उसने मारा है. ईरान ने इस दावे को अमेरिका खारिज कर चुका है.
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अमेरिकी बेस पर ईरान का बड़ा हमला, कुवैत में US ड्रोन हैंगर और फ्यूल सेंटर पूरी तरह तबाह
US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा युद्ध शुरू हो चुका है. अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने कुवैत में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया. इसमें हमले में अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ. कुवैत में अमेरिका के दो ड्रोन हैंगर और सैन्य विमानों के लिए बना फ्यूल सेंटर पूरी तरह नष्ट हो गया.
ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने कुवैत में मौजूद अमेरिका के अली अल सलेम एयरबेस पर हमला किया है. ईरान का दावा है कि इस हमले में एयरबेस के दो ड्रोन हैंगर पूरी तरह तबाह हो गए. इसके अलावा, सैन्य विमानों और हेलीकॉप्टरों के लिए रखा गया ईंधन भंडारण केंद्र (फ्यूल सेंटर) भी नष्ट कर दिया गया.
⚡️BREAKING: ????????
— Clash ReportX (@ClashReportX) July 30, 2026
Iran has been carrying out sustained ballistic missile strikes against U.S. military bases in Kuwait and Jordan for several hours.
The full extent of the damage is expected to become clearer once satellite imagery is available. pic.twitter.com/1g54f3LTle
IRGC ने दी चेतावनी
IRGC ने शुक्रवार को कुवैत के लोगों के नाम जारी बयान में कहा कि ईरान अपने सैन्य अभियान को तब तक जारी रखेगा, जब तक क्षेत्र से अमेरिकी सेना पूरी तरह नहीं हट जाती. बयान में अमेरिका को "कब्जा करने वाली और संसाधनों की लूट करने वाली ताकत" बताया गया है.
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क्यों दोबारा शुरू हुआ विवाद?
कुवैत में बढ़ा तनाव उस समय और गहरा गया, जब एक दिन पहले ईरान ने दावा किया था कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक एयरबेस पर जवाबी मिसाइल हमला किया है. ईरान का कहना था कि इस हमले में अमेरिका के एफ-35 लड़ाकू विमान नष्ट हो गए. हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. सेना का कहना है कि हमले में किसी भी अमेरिकी विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उसकी सभी सैन्य इकाइयां पूरे क्षेत्र में पूरी तरह तैयार हैं.
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