France Wildfire: दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के जंगलों में लगी आग के बाद 84,000 लोगों की हुई घर वापसी
फ्रांस के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में जंगल की भीषण आग के कारण अपने घरों को छोड़कर गये 84,000 लोगों को वापस लौटने की अनुमति दे दी है। इसे इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दमकलकर्मी आग पर काबू पाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस अग्निकांड में पेरिस के क्षेत्रफल से लगभग चार गुना बड़ा क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है।
बृहस्पतिवार को जिन क्षेत्रों के निवासियों को अपने घर वापस लौटने की अनुमति दी गई है, उनमें उन नौ इलाकों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें पहले खाली कराया गया था। पिछले सप्ताह से अब तक कुल मिलाकर 2.20 लाख से अधिक लोगों को अपने घरों को छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अधिक नमी, कम तापमान और हल्की बारिश से उम्मीद जगी है कि आग पर जल्द ही काबू पा लिया जायेगा।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि आग पहले से प्रभावित 42,000 हेक्टेयर (लगभग 162 वर्ग मील) क्षेत्र से आगे नहीं फैली। अधिकारियों ने कहा कि फ्रांस के गिरोंद क्षेत्र में लगी देश की सबसे बड़ी जंगल की आग रात में और नहीं फैली, लेकिन बुधवार दोपहर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने और हवाएं तेज होने के साथ ही यह राहत अल्पकालिक साबित होने का खतरा पैदा हो गया। फ्रांस के विभिन्न हिस्सों और यूरोपीय सहयोगी देशों से आए दलों की मदद से 2,200 से अधिक दमकलकर्मी और 20 से ज्यादा विमान आग बुझाने के काम में जुटे रहे।
सरकारी ‘अनादोलु’ समाचार एजेंसी ने बताया कि बृहस्पतिवार को तुर्किये के पश्चिमी हिस्से के चार प्रांतों में दमकलकर्मी कई जंगलों में लगी आग पर काबू पाने में जुटे हुए थे। पर्यटन स्थल मुगला और अंताल्या समेत अन्य क्षेत्रों में लगी आग रातभर भड़कती रही, क्योंकि इलाके में गर्म मौसम और तेज हवाओं का प्रकोप जारी था। दमकलकर्मी विमानों और हेलीकॉप्टरों की मदद से आग बुझाने में जुटे रहे, जबकि स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
Sheikh Hasina के Bangladesh लौटने पर आत्मसमर्पण से पहले होगी गिरफ्तारी: कानून मंत्री
बांग्लादेश के कानून मंत्री एम. असदुज्जमां ने बृहस्पतिवार को कहा कि बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से लौटने पर तुरंत गिरफ्तार किए जाने की संभावना है और उन्हें सीधे अदालत में पहुंचकर आत्मसमर्पण करने का मौका नहीं मिलेगा। यह बयान हसीना के एक समाचार एजेंसी को दिए उस साक्षात्कार के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अपनी जान को खतरा होने के बावजूद वह दिसंबर तक अपने देश लौटने के लिए दृढ़ हैं। खबरों के मुताबिक, उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि मेरी हत्या कर दी जाए।
हो सकता है कि मुझे गिरफ्तार कर लिया जाए। हो सकता है कि मुझे जेल भेज दिया जाए... मुझे अपनी किस्मत के बारे में पूरी जानकारी है। फिर भी, मैं वापस जाना चाहती हूं, क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं।’’ इस महीने की शुरुआत में उनके कुछ और साक्षात्कार सामने आए थे, जिनसे पता चला था कि वह अपनी पार्टी के सहयोगियों के साथ इस साल के आखिर तक बांग्लादेश लौटने की संभावना पर चर्चा कर रही हैं।
असदुज्जमां ने कहा कि 78-वर्षीय हसीना को लौटने का अधिकार है, लेकिन ‘कानून अपना काम करेगा और हम कानून का उल्लंघन करते हुए कुछ भी नहीं करेंगे’। मंत्री ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद, बांग्लादेशी नागरिक होने के नाते अगर वह घर लौटकर कानून का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण करना चाहती हैं, तो हो सकता है कि ऐसा करने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए। हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे, जो कानून ने हमें दिया है।’’ जब उनसे पूछा गया कि अंतरिम सरकार द्वारा उनका पासपोर्ट रद्द किए जाने के बाद वह कैसे लौट सकती हैं, तो मंत्री असदुज्जमां ने कहा, ‘‘यह उनकी समस्या है, मेरी नहीं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘(लेकिन) जब भी वह हमारे क्षेत्र में प्रवेश करेंगी, मैं कानून द्वारा मुझे प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करूंगा।’’ बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक सड़क प्रदर्शनों के बाद अगस्त 2024 में हसीना की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद हसीना भागकर भारत पहुंच गईं।
अंतरिम सरकार के कार्यभार संभालने के बाद, एक विशेष अदालत ने आतंकवाद निरोधक कानून के तहत एक कार्यकारी आदेश द्वारा हसीना की राजनीतिक पार्टी ‘अवामी लीग’ को भंग कर दिया। नवंबर 2025 में, वर्ष 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई में उनकी भूमिका के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा मानवता के विरुद्ध अपराधों का दोषी पाए जाने के बाद हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मृत्युदंड दिया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने इस प्रक्रिया को ‘खामियों से भरा’ बताया, जबकि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश में चुनाव हुए, जिसके बाद ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ सत्ता में आई और तारिक रहमान ने नए प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला। बांग्लादेश कुछ समय से भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, लेकिन भारत ने कहा है कि वह इस मामले पर विधिक रूप से विचार कर रहा है।
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