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अब ट्रंप के टारगेट पर आया नया देश, जल्द तानाशाह किम जोंग-उन से मिलेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

US North Korea Relations: ईरान से युद्ध की स्थिति के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना नया टारगेट चुन लिया है. ट्रंप ने  जल्द ही उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से मुलाकात का भी एलान किया है. उत्तर कोरिया और अमेरिका के रिश्ते पिछले लंबे समय से तनावपूर्ण चल रहे हैं. ट्रंप ने इसके लिए पुराने अमेरिकी राष्ट्रपतियों को भी जिम्मेदार ठहराया है. 

राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल के आखिर में वे उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन से मिलेंगे. यह उनके पहले कार्यकाल की उस कूटनीतिक कोशिश को फिर से शुरू करने जैसा हो सकता है, जिसका मकसद उत्तर कोरिया को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ने के लिए मनाना या उस पर काबू पाना था.

पुराने फैसलों को बताया गलत

ट्रंप ने कहा कि पिछले राष्ट्रपतियों को उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत कभी नहीं देनी चाहिए थी. कहा कि मेरी उनसे (किम जोंग) बहुत अच्छी बनती है. और सब ठीक रहेगा. जब तक हमारे पास एक समझदार राष्ट्रपति है, तब तक सब ठीक रहेगा.

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Explainer: सर्जियो गोर ने कश्मीर को बताया भारत का अहम हिस्सा, जानें भारत और पाकिस्तान के लिए क्या हैं इसके मायने?

Explainer: जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे पर पहुंचे भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का एक बयान इस समय कूटनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है. श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने जम्मू-कश्मीर को “भारत का एक अहम हिस्सा” बताया.  उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव बना हुआ है. 

लेकिन सवाल यह है कि एक अमेरिकी राजदूत का यह बयान इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है? क्या यह अमेरिका की कश्मीर नीति में बदलाव का संकेत दे रहा है? क्या इस बयान का सीधा असर पाकिस्तान पर भी पड़ने वाला है. 

सर्जियो गोर के बयान में क्या खास है?

सर्जियो गोर ने 19 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर का दौरा किया. यह पद संभालने के बाद क्षेत्र की उनकी पहली यात्रा थी. उन्होंने श्रीनगर के अलावा लद्दाख का भी दौरा किया. रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले करीब 15 वर्षों में किसी अमेरिकी राजदूत की जम्मू-कश्मीर यात्रा नहीं हुई थी.

ऐसे में उनका कश्मीर आना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा था. इसके बाद जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, तो इस बयान ने दौरे की कूटनीतिक अहमियत और बढ़ा दी.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. विदेश मंत्रालय ने हाल के महीनों में भी इस रुख को दोहराया है.

ऐसे में अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है.

हालांकि, इसे यह कहना कि अमेरिका ने किसी नए औपचारिक समझौते के जरिए कश्मीर पर भारत की संप्रभुता को मान्यता दे दी है, सही नहीं होगा. राजदूत का बयान महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे अमेरिकी विदेश नीति के औपचारिक दस्तावेज या नीति परिवर्तन के बराबर नहीं माना जाना चाहिए.

पाकिस्तान के लिए क्या संदेश?

इस बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक असर पाकिस्तान पर पड़ सकता है. पाकिस्तान लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को विवादित मुद्दा बताते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे उठाता रहा है.

भारत इसके विपरीत कश्मीर को अपना आंतरिक और संप्रभुता से जुड़ा विषय मानता है. ऐसे में अमेरिका जैसे प्रभावशाली देश के वरिष्ठ राजनयिक का भारत की धरती पर जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है.

विशेष रूप से PoK में चल रहे राजनीतिक और सामाजिक असंतोष के बीच यह बयान पाकिस्तान के लिए और महत्वपूर्ण हो जाता है. भारत हाल के दिनों में PoK में मानवाधिकार और राजनीतिक स्थिति को लेकर पाकिस्तान पर सवाल उठाता रहा है.

क्या अमेरिका ने PoK पर भी अपना रुख बदल दिया?

यहां सावधानी जरूरी है. सर्जियो गोर का बयान जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताता है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका ने औपचारिक रूप से PoK पर कोई नई नीति घोषित कर दी है.

भारत का आधिकारिक रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान ने इसके कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा कर रखा है.

अमेरिकी राजदूत का बयान इस भारतीय दावे के संदर्भ में जरूर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन आगे की अमेरिकी आधिकारिक नीति और बयानों को देखना भी जरूरी होगा.

अनुच्छेद 370 के बाद क्या बदला?

2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के तहत मिलने वाला विशेष दर्जा समाप्त किया गया और राज्य का पुनर्गठन कर जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया.

सर्जियो गोर के ताजा बयान को कुछ राजनीतिक विश्लेषक इस बदलाव के बाद क्षेत्र को लेकर भारत की स्थिति के प्रति अमेरिकी व्यवहार के संदर्भ में देख रहे हैं. हालांकि, केवल इस बयान के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि अमेरिका ने अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है.

यात्रा सलाह में बदलाव का भी संकेत

सर्जियो गोर के दौरे का एक और महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी Travel Advisory है. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए जारी यात्रा चेतावनी की समीक्षा कर सकता है.

मौजूदा अमेरिकी सलाह में सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखा गया है. यदि भविष्य में इस चेतावनी को कम किया जाता है, तो इसका सीधा असर कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र पर पड़ सकता है.

पर्यटन और निवेश के लिए क्या मतलब?

कश्मीर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है. विदेशी पर्यटकों के लिए किसी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर जारी सरकारी चेतावनी उनके यात्रा निर्णय को प्रभावित करती है.

यदि अमेरिका यात्रा संबंधी चेतावनी में नरमी करता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर की सुरक्षा को लेकर सकारात्मक धारणा बनाने में मदद कर सकता है. इससे विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना बन सकती है.

लंबी अवधि में बेहतर सुरक्षा धारणा निवेश, होटल, ट्रैवल और अन्य पर्यटन आधारित कारोबार के लिए भी सकारात्मक हो सकती है.

क्या यह भारत-अमेरिका संबंधों का नया संकेत है?

सर्जियो गोर केवल भारत में अमेरिकी राजदूत नहीं हैं, बल्कि दक्षिण और मध्य एशिया से जुड़े अमेरिकी दायित्वों में भी उनकी भूमिका है. ऐसे में जम्मू-कश्मीर की उनकी यात्रा और वहां दिया गया बयान भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है.

यह संकेत जरूर मिलता है कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के साथ सीधे जुड़ाव और वहां की स्थिति को समझने में रुचि दिखा रहा है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात भी इसी कूटनीतिक संवाद का हिस्सा रही.

चीन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण

गोर का जम्मू-कश्मीर के साथ लद्दाख दौरा भी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. लद्दाख भारत-चीन सीमा विवाद के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है.

इसलिए अमेरिकी राजदूत का दोनों क्षेत्रों का दौरा भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति को समझने की अमेरिकी कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है. हालांकि, इसे सीधे किसी सैन्य गठबंधन या चीन के खिलाफ अमेरिकी नीति में बदलाव के रूप में देखना उचित नहीं होगा.

बयान महत्वपूर्ण, लेकिन नतीजे आगे दिखेंगे

सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताना भारत के लिए एक सकारात्मक कूटनीतिक संकेत है. इससे भारत के उस रुख को राजनीतिक मजबूती मिलती है कि जम्मू-कश्मीर को उसकी संप्रभुता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.

पाकिस्तान के लिए यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसका कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में पेश करने का प्रयास अमेरिकी राजदूत के इस स्पष्ट शब्दों वाले बयान से राजनीतिक चुनौती का सामना करता है.

हालांकि, इस एक बयान को अमेरिका की पूरी कश्मीर नीति में निर्णायक बदलाव मानना जल्दबाजी होगी. असली संकेत आगे की अमेरिकी आधिकारिक टिप्पणियों, यात्रा सलाह में संभावित बदलाव और भारत-अमेरिका के कूटनीतिक संवाद से मिलेंगे. फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि कश्मीर को लेकर अमेरिकी राजदूत का यह बयान भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और पाकिस्तान के लिए असहज करने वाला संदेश है.

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