राहुल गांधी की ‘स्टूडेंट्स, इडियट्स और अंधभक्त’ टिप्पणी पर विशेषाधिकार नोटिस, अनुराग ठाकुर ने उठाया बड़ा कदम
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक टिप्पणी को लेकर संसदीय विवाद और गहरा गया है. बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है. यह मामला 29 जुलाई को लोकसभा में दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान “स्टूडेंट्स, इडियट्स और अंधभक्त” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था.
अनुराग ठाकुर ने इस टिप्पणी को संसदीय मर्यादा के विपरीत बताते हुए इसे अपमानजनक और मानहानिकारक भाषा करार दिया है. उन्होंने कहा कि सदन के भीतर इस्तेमाल किए गए ऐसे शब्दों से संसद की गरिमा प्रभावित हो सकती है. अब यह मामला आगे की संसदीय प्रक्रिया के तहत विचार के लिए जा सकता है.
किस टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद?
29 जुलाई को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं और पेपर लीक से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए अपने भाषण में “स्टूडेंट्स, इडियट्स और अंधभक्त” जैसे शब्दों का उल्लेख किया था.
इन शब्दों के इस्तेमाल के बाद सदन में सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने आपत्ति जताई. उनका कहना था कि इस तरह की भाषा संसद की गरिमा और मर्यादा के अनुरूप नहीं है. इसके बाद सदन में बहस और हंगामे की स्थिति बन गई थी.
विवाद बढ़ने पर राहुल गांधी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उन्होंने यह टिप्पणी किसी सांसद को सीधे संबोधित करते हुए नहीं की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी शब्द को आपत्तिजनक माना जाता है, तो उसके स्थान पर दूसरा शब्द इस्तेमाल किया जा सकता है.
BJP MP Anurag Singh Thakur has submitted a breach of privilege notice against LoP in the Lok Sabha Rahul Gandhi, alleging use of unparliamentary remarks, comments beyond the debate’s scope, and allegations against Home Minister Amit Shah without prior notice. He sought action… pic.twitter.com/rKp0wwmg0b
— IANS (@ians_india) July 30, 2026
अनुराग ठाकुर ने किन नियमों का दिया हवाला?
अनुराग ठाकुर ने विशेषाधिकार हनन के नोटिस में लोकसभा के नियम 352 के उपखंड (ii), (iii) और (vii) का उल्लेख किया है. उनके अनुसार, राहुल गांधी की टिप्पणी सदन में भाषा और आचरण से जुड़े निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी.
नोटिस में कथित तौर पर कहा गया है कि सदन के भीतर किसी व्यक्ति या समूह के लिए अपमानजनक अथवा मानहानिकारक शब्दों का इस्तेमाल संसदीय परंपराओं के खिलाफ है. अनुराग ठाकुर ने इसे गंभीर विषय बताते हुए मामले पर उचित कार्रवाई की मांग की है.
पहले भी कार्यवाही से हटाए जा चुके हैं शब्द
राहुल गांधी की टिप्पणी पर विवाद के दौरान लोकसभा अध्यक्ष की ओर से “इडियट” और “अंधभक्त” जैसे शब्दों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने यानी एक्सपंज (Expunge) करने का निर्देश दिया गया था.
किसी शब्द या टिप्पणी को एक्सपंज करने का अर्थ है कि उसे संसद की आधिकारिक कार्यवाही के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं माना जाएगा. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं होता कि उस बयान का वीडियो या मीडिया रिपोर्ट अपने आप समाप्त हो जाएगी.
क्या होता है विशेषाधिकार हनन का नोटिस?
संसद के सदस्यों को कुछ विशेष अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, ताकि वे बिना किसी अनुचित दबाव के अपने संसदीय कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें. यदि किसी सांसद को लगता है कि उसके अधिकारों, सम्मान या सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचाया गया है, तो वह विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे सकता है.
हालांकि, नोटिस दिए जाने का मतलब यह नहीं है कि कार्रवाई अपने आप तय हो गई है. इस पर आगे विचार करने और स्वीकार करने का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में होता है.
आगे क्या हो सकता है?
अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी. लोकसभा अध्यक्ष नोटिस की जांच के बाद इसे स्वीकार कर सकते हैं, खारिज कर सकते हैं या आगे विचार के लिए संबंधित समिति को भेजने का फैसला कर सकते हैं.
राहुल गांधी की टिप्पणी से शुरू हुआ यह विवाद अब केवल शब्दों को कार्यवाही से हटाने तक सीमित नहीं रहा है. अनुराग ठाकुर के विशेषाधिकार हनन नोटिस के बाद यह मुद्दा संसदीय प्रक्रिया और राजनीतिक बहस, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण बन गया है.
यह भी पढ़ें -
आरजी कर दुष्कर्म और हत्या केस: सीबीआई ने जांच अधिकारी बदला
कोलकाता, 30 जुलाई (आईएएनएस)। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ हुए भयानक दुष्कर्म और हत्या की नई जांच कर रही सीबीआई ने इस मामले में जांच अधिकारी को बदल दिया है।
पिछली जांच अधिकारी सीमा पाहुजा पर पीड़िता के माता-पिता ने लापरवाही से जांच करने का आरोप लगाया था और उन्हें हटाने की मांग की थी। उन्हें आखिरकार इस मामले की जांच की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है।
उनकी जगह संदीपनी गर्ग को लाया गया है, जो गुरुवार को मध्य कोलकाता के सियालदह में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई में मौजूद थीं।
सीबीआई ने गुरुवार को मामले की जांच में हुई प्रगति पर एक स्टेटस रिपोर्ट भी सौंपी।
गर्ग ने गुरुवार को पीड़िता की मां से भी बात की, जो कोर्ट में मौजूद थीं, और उनसे केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जा रही जांच पर भरोसा रखने का आग्रह किया।
गुरुवार को सीबीआई के वकील ने कोर्ट को बताया कि नई जांच के तहत इस मामले में 1,000 पन्नों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। वकील ने कहा कि पीड़िता के पिता और मां के बयान दर्ज कर लिए गए हैं।
महिला जूनियर डॉक्टर का शव 8 अगस्त, 2024 की सुबह आरजी कर परिसर के अंदर एक सेमिनार रूम से मिला था। पिछली रात वह भयानक दुष्कर्म और हत्या का शिकार हुई थीं।
घटना की जांच के बाद कोलकाता पुलिस ने संजय रॉय नाम के एक सिविक वॉलंटियर को गिरफ्तार किया। बाद में, कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने इस घटना की जांच अपने हाथ में ले ली। हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी ने घटना में शामिल होने के शक में किसी और को गिरफ्तार नहीं किया।
आखिरकार, उसी ट्रायल कोर्ट ने एकमात्र आरोपी संजय रॉय को दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, पीड़िता के माता-पिता इस जांच से संतुष्ट नहीं थे। उनका कहना था कि इस घटना में कई और लोग भी शामिल थे।
आखिरकार, इस साल की शुरुआत में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में नए सिरे से जांच के आदेश दिए।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
















.jpg)





