गुवाहाटी, 30 जुलाई असम के कई जलमग्न इलाकों में जलस्तर के कम होने के बावजूद बृहस्पतिवार को भी बाढ़ की चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक बाढ़ जनित घटनाओं में 78 लोगों की मौत हुई और तीन लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं।
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले तीन दिनों में राज्य और पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश एवं नगालैंड के कुछ हिस्सों में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे इन दोनों राज्यों की सीमा से लगे जिलों के लिए चिंता बढ़ गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘बाढ़ से प्रभावित ऊपरी असम के अधिकतर जिलों में बारिश नहीं हुई। इसलिए, डूबे हुए जलमग्न गांवों में पानी घट रहा है, जिससे ग्रामीणों को कुछ राहत मिली।’’
प्राधिकरण की ओर से बुधवार रात जारी बाढ़ संबंधित दैनिक बुलेटिन के मुताबिक पिछले 24 घंटों में बाढ़ जनित घटनाओं में शिवसागर जिले में दो और गोलाघाट में एक व्यक्ति की मौत हो गई।
इसी के साथ इस साल बाढ़ जनित घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या 78 हो गई है। बुलेटिन में जानकारी दी गई कि इस समय कुल 3,00,031 लोग बाढ़ सेप्रभावित हैं, जिनमें से चराइदेव में सबसे अधिक 1,37,561 लोग प्रभावित हैं।इसके बाद शिवसागर में 84,600 और जोरहाट में 49,911 लोग बाढ़ का सामना कर रहे हैं। एएसडीएमए ने बताया कि बाढ़ की वजह से विस्थापित 16,500 से अधिक लोगों ने कुल 71 राहत शिविरों में शरण ली है।
इनके अलावा, 30 राहत वितरण केंद्र 72,000 से अधिक लोगों की मदद कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से फोन पर बात की और राज्य में बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। वहीं, मुख्यमंत्री ने बताया कि जलस्तर में कमी आई है लेकिन कई लोग अपने घरों को नहीं लौट पा रहे क्योंकि उनके घर या तो क्षतिग्रस्त हो गए हैं या फिर उनमें कीचड़ और गाद भर गई है।
बुलेटिन के मुताबिक 21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है और11,000 से अधिक मवेशी बाढ़ में बह गए हैं जबकि 17,000 अन्य प्रभावित हुए हैं। इस बीच, आईएमडी ने 30 जुलाई से एक अगस्त के बीच असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश और आंधी-तूफान की संभावना जताई है, जिससे असम के तिनसुकिया, धेमाजी और लखीमपुर जिले प्रभावित हो सकते हैं।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गाज़ीपुर का दौरा किया और 692 करोड़ रुपये की लागत वाली 268 जन-कल्याणकारी परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिया। लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि इन पार्टियों ने गाज़ीपुर के लिए पहचान का संकट पैदा कर दिया था।
CM योगी ने गाज़ीपुर की अहमियत बताई
गाज़ीपुर में CM योगी ने कहा कि उन लोगों को याद करें जिन्होंने 1971 की भारत-पाकिस्तान लड़ाई में अपनी बहादुरी दिखाई थी। शहीद राम उग्र पांडे भी इसी पवित्र धरती से थे। उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारतीय सेना के अहम सम्मान 'महावीर चक्र' से नवाज़ा गया था। श्री कुबेरनाथ राय हिंदी साहित्य के मशहूर निबंधकार और विद्वान थे। कहा जाता है कि गोपाल राय ने गोपालराम गहमरी, यानी 'गहमरी बाबू' के नाम से 200 से ज़्यादा उपन्यास लिखे थे। हमारा गाज़ीपुर ज़िला, जिसने इतनी महान हस्तियों को जन्म दिया, गुमनाम क्यों हो गया? इसका नाम क्यों डूब गया? लोग इस ज़िले का नाम लेने से क्यों कांपते थे? वे यहाँ आने से क्यों डरते थे? पहचान का संकट किसने पैदा किया? पहचान का संकट पैदा करने वाले वही लोग हैं जिन्होंने कुछ नहीं किया, लेकिन आपके सामने पहचान का संकट ज़रूर खड़ा कर दिया।
सीएम योगी ने आगे कहाजो लोग यह पहचान का संकट पैदा कर रहे हैं, वे वही लोग हैं जिन्होंने देश की रक्षा के लिए खुद को समर्पित करने वाले भारत के राष्ट्रीय नायकों का सम्मान करने के बजाय विदेशी हमलावरों का महिमामंडन किया। और आज मैं कह सकता हूँ कि BJP-NDA सरकार का यह 'डबल इंजन' राष्ट्रीय नायकों का सम्मान करता है। 1000 साल पहले, सालार मसूद भारत को रौंदने के इरादे से आया था। भारत के उस महान व्यक्ति, उस राष्ट्रीय नायक ने सालार मसूद को रौंद डाला और बहराइच की चित्तौरा नाम की जगह पर उसे सबसे कड़ी सज़ा दी। वह महान व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि महाराज सुहेलदेव हैं।
योगी ने कहा कि SP और कांग्रेस ने कभी भी महाराजा सुहेलदेव के नाम पर कोई कार्यक्रम नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कोई कार्यक्रम नहीं होने दिया। महाराजा सुहेलदेव जिनकी बहादुरी, वीरता और समझदारी ने इतने लंबे समय तक देश को विदेशी हमलावरों की क्रूरता से बचाया। उनके प्रति आभार व्यक्त करने के बजाय, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय नायकों का अपमान किया। ये लोग हमलावर गाजी सालार मसूद गाजी के लिए मेला आयोजित करते थे। जब हमारी सरकार सत्ता में आई, तो हमने मना कर दिया। सालार मसूद का मेला नहीं लगेगा। अगर मेला लगेगा, तो वह महाराजा सुहेलदेव की याद में लगेगा। और आज, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि बहराइच में उसी जगह पर हमने महाराजा सुहेलदेव की एक शानदार प्रतिमा स्थापित की है—एक शानदार प्रतिमा। एक शानदार स्मारक। अब वहां मेला लगता है और युवा उसमें शामिल होते हैं। हम महाराजा सुहेलदेव का भारत के राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मान करते हैं। हमने बहराइच में महाराजा सुहेलदेव के नाम पर एक मेडिकल कॉलेज और आजमगढ़ में एक विश्वविद्यालय बनाया है।
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