संडे प्रोफाइल : जो मैनचिन:अमेरिकी राजनीति में तीसरे विकल्प की खोज में जुटे डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व सांसद
डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व सांसद जो मैनचिन उन राजनेताओं में हैं, जिनका अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने में ज्यादा यकीन है। वे अमेरिका की दो ध्रुवीय राजनीति को अलग रास्ते पर ले जाने की नई पहल से सुर्खियों में हैं। राजनीति में कुछ हस्तियां हमेशा मुख्य धारा से अलग हटकर चलने की कोशिश करती हैं। दो बार सांसद रह चुके जो मैनचिन ऐसे ही हैं। वे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कुछ नया करते रहते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी में रहते हुए उन्होंने कई बार पार्टी लाइन का विरोध किया था। उन्होंने मतभेदों के कारण 2024 में पार्टी छोड़ दी। अब वे नए रास्ते पर निकल पड़े हैं। उन्होंने स्वतंत्र लीडरशिप काउंसिल लॉन्च की है। 78 साल के मैनचिन अमेरिकी संसद के एक सदन-कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। 23 जुलाई को जब उन्होंंने एक समारोह में काउंसिल के गठन का ऐलान किया तो कैलिफोर्निया के सांसद केविन किली सहित कई उम्मीदवार मौजूद थे। मैनचिन का कहना है, हम एक अन्य पार्टी नहीं बना रहे हैं। हम उन लोगों का साथ देंगे जो किसी पार्टी के नहीं हैं, स्वतंत्र हैं। अमेरिका की दो दलीय राजनीति में तीसरी राजनीतिक ताकत बनाने के प्रयास बहुत कम हुए हैं। इसलिए उनकी पहल अहम है। अपने राजनीतिक करियर में मैनचिन मध्यमार्गी रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने 2020-2024 के बीच जलवायु परिवर्तन और अमीरों पर टैक्स सहित कई मुद्दों पर संसद में पार्टी लाइन का विरोध किया था। जो मैनचिन का सफर वेस्ट वर्जीनिया के कोयला खदान क्षेत्र फार्मिंगटन से शुरू हुआ। उनके पिता शहर के मेयर थे। किराना दुकान संचालक उनके दादा जरूरतमंदों की मदद करते थे। उनसे प्रेरित होकर मैनचिन ने भी लोगों का हाल जानना और उनकी सहायता करना शुरू किया। इससे स्थानीय प्रभाव बढ़ता गया। वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में छात्रों की एक पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात गेल कोनेली से हुई, जो बाद में उनकी पत्नी बनीं। राजनीति में उनकी शुरुआत राज्य विधानसभा से हुई। 2004 में वे वेस्ट वर्जीनिया के गवर्नर बने और 2010 में पहली बार अमेरिकी सीनेट पहुंचे। वे कोयला उद्योग के समर्थक रहे हैं। 2021-22 में सीनेट में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकंस के 50-50 सदस्य होने से जो मैनचिन का वोट निर्णायक बन गया। उनके दबाव में राष्ट्रपति जो बाइडेन को कई विधेयकों में बदलाव करने पड़े। मैनचिन का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी में अब उनके जैसे अनुदारवादी नेताओं के लिए जगह नहीं है। वे राजनीतिक ध्रुवीकरण के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। गैलप के अनुसार अधिकांश अमेरिकी दोनों प्रमुख दलों के प्रति अनुकूल राय नहीं रखते, जबकि एक सर्वे में 45% लोगों ने खुद को निर्दलीय बताया। रिपब्लिकन प्रभाव वाले वेस्ट वर्जीनिया से उनका दो बार सीनेट जीतना उल्लेखनीय रहा, हालांकि 2024 में वे चुनाव हार गए थे।
वर्ल्ड अपडेट्स:नेपाल में ₹25 हजार तक के भारतीय नोट ले जाने की मंजूरी, ₹200 और ₹500 के नए नोट ही मान्य
नेपाल ने भारतीय और नेपाली नागरिकों को 9 नवंबर 2016 के बाद जारी ₹200 और ₹500 के भारतीय नोट, अधिकतम ₹25,000 तक नेपाल लाने और ले जाने की अनुमति दे दी है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नई अधिसूचना जारी कर नियमों को स्पष्ट किया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, 8 नवंबर 2016 से पहले जारी ₹500 और ₹1,000 के पुराने भारतीय नोटों पर प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेगा। वहीं, नेपाली नागरिक भारतीय मुद्रा केवल भारत से ही नेपाल ला सकेंगे और नेपाल से किसी तीसरे देश में नहीं ले जा सकेंगे। NRB के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नए नियम से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार करने वाले नेपाली नागरिकों को सुविधा मिलेगी। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री बिना कस्टम घोषणा के 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा नेपाल ला सकते हैं। इससे अधिक राशि होने पर कस्टम में घोषणा करना अनिवार्य होगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जर्मनी में प्राइड परेड पर हमला, वैन से भीड़ को कुचला; 1 की मौत, 16 घायल, आरोपी गिरफ्तार जर्मनी की राजधानी बर्लिन में LGBTQ+ समुदाय की प्राइड परेड के दौरान शनिवार रात एक वैन भीड़ में घुस गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस के मुताबिक, सफेद वैन टियरगार्टन पार्क के पास उस इलाके में घुसी, जहां से कुछ देर पहले प्राइड परेड निकली थी। कई लोगों को टक्कर मारने के बाद वैन एक पेड़ से टकरा गई। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है। घटना के बाद प्राइड कार्यक्रम और कॉन्सर्ट रद्द कर दिए गए। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्च ने मामले की पूरी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं, बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने इसे समाज पर हमला बताया। ब्लैक सी में जहाजों पर नौकरी से पहले सावधानी बरतें:हमलों में 5 भारतीय नाविकों की मौत के बाद MEA की एडवाइजरी विदेश मंत्रालय (MEA) ने ब्लैक सी में चलने या वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा कि नौकरी स्वीकार करने से पहले इलाके की सुरक्षा स्थिति और जोखिमों का अच्छी तरह आकलन करें। MEA ने कहा कि जारी संघर्ष के कारण ब्लैक सी और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा स्थिति "बेहद अस्थिर" बनी हुई है। इस इलाके से गुजरने या यहां ऑपरेट करने वाले कमर्शियल जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों समेत गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रालय के मुताबिक, अप्रैल से ऐसे हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। इनमें 5 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। MEA ने भारतीय नागरिकों को DGMA की 23 जुलाई की सिक्योरिटी एडवाइजरी का भी हवाला दिया। इसमें ब्लैक सी में काम करने वाले नाविकों को "सबसे ज्यादा सावधानी" बरतने को कहा गया था। DGMA ने बताया था कि अप्रैल से अब तक भारतीय क्रू वाले विदेशी झंडे के जहाजों पर 10 हमले हो चुके हैं। इससे इलाके में बढ़ते खतरे का पता चलता है।
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