दिल्ली-NCR में नेशनल के बजाय लोकल डेवलपर्स का अभी भी दबदबा! जानें पांच कारण
एनारॉक रिसर्च के ताजा रिपोर्ट सामने सामने आई है. रिसर्च के अनुसार, एनसीआर में नेशनल डेवलपर्स की नई रेजिडेंशियल सप्लाई 2022 के 3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 के अंत तक 13 प्रतिशत से अधिक हो गई है. गोदरेज, प्रेस्टीज, टाटा हाउसिंग, महिंद्रा, अडानी, सोभा और बिड़ला जैसे बड़े राष्ट्रीय डेवलपर ब्रैंड तेजी से विस्तार कर रहे हैं. इसके बावजूद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लोकल डेवलपर्स का दबदबा कायम है.
क्षेत्रीय डेवलपर्स का प्रभाव ज्यादा
गुरुग्राम में राष्ट्रीय डेवलपर्स की नई सप्लाई का 47 प्रतिशत हिस्सा केंद्रित है, जबकि नोएडा की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत और ग्रेटर नोएडा की करीब 12 प्रतिशत है. यह दिखाता है कि इस बेल्ट में उनकी पकड़ अभी सीमित है और क्षेत्रीय डेवलपर्स का प्रभाव ज्यादा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय डेवलपर्स का असली लाभ उनकी माइक्रो मार्केट पर गहरी पकड़, मजबूत ग्राहक आधार व नेटवर्क, पुराना ट्रैक रिकॉर्ड और पुराने दरों पर अधिगृहीत भूखंड है. इसके अलावा क्षेत्रीय डेवलपर्स द्वारा समय की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण और विकास हेतु नई और विकसित तकनीक अपनाई जा रही एवं अलग अलग-अलग थीम, कान्सेप्ट के साथ परियोजना में विशेषताएं व सुविधाएं दी जा रही है जिसके लिए राष्ट्रीय डेवलपर्स जाने जाते है.
पुराने ग्राहक उन्हीं क्षेत्रीय डेवलपर्स को दे रहे प्राथमिकता
एक तरफ क्षेत्रीय डेवलपर्स अफोर्डेबल हाउसिंग से ऊपर बढ़कर लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट की परियोजनाओं का निर्माण कर रहे हैं और कीमत काफी प्रतिस्पर्धी रख रहे है. दूसरी तरफ नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बड़ी संख्या में एंड-यूजर्स होने के कारण खरीदार ब्रैंड से ज्यादा समय पर पजेशन, अफोर्डेबल कीमत पर राष्ट्रीय स्तर वाली गुणवत्ता और पुराने ट्रैक रिकॉर्ड तथा ट्राइड एण्ड टेसटेड यानि इस्तेमाल के बाद विश्वास किए जाने वाले पुराने ग्राहक उन्हीं क्षेत्रीय डेवलपर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं.
पारदर्शिता और योजना प्रबंधन बेहतर हुए हैं
हालांकि राष्ट्रीय डेवलपर्स के आने से परियोजनाओं की डिजाइन, निर्माण तकनीक, ग्राहक पारदर्शिता और योजना प्रबंधन बेहतर हुए हैं. इससे पूरे सेक्टर में प्रतियोगिता बढ़ी है और क्षेत्रीय डेवलपर्स पर भी हरित भवन विकास, निर्माण स्तर और समयबद्ध पूर्णता के मानक सुधारने का दबाव बढ़ा है. इस कारण रियल एस्टेट सेक्टर में चौतरफा सुधार हुआ है जो घर खरीदारों सहित अन्य हितधारकों के हित में है.
एफोर्डेबल में विलासिता का अनुभव
शैलेन्द्र शर्मा, चेयरमैन, रेनॉक्स ग्रुप के अनुसार, “नोएडा और ग्रेटर नोएडा का रियल एस्टेट आज भी निवेश से ज्यादा स्वयं उपयोग वाला बाजार है जहां बिल्डर के साथ पुराने संबंध, भरोसा तथा एफोर्डेबल में विलासिता का अनुभव सबसे बड़ा आकर्षण है. मध्यम आय और इसके ऊपर वर्ग के बायर्स सीमित बजट में बढ़िया गुणवत्ता, आधुनिक सुविधाओं और जीवनस्तर का मेल वाली परियोजना तलाशते हैं. इस सेगमेंट में क्षेत्रीय डेवलपर्स ने मजबूत पकड़ बनाई हुई है और राष्ट्रीय बिल्डर्स के टक्कर का निर्माण दे रहे है.”
प्राइसिंग अभी भी ज्यादा अफोर्डेबल
हिमांशु गर्ग, निदेशक, आरजी ग्रुप का मानना है कि “आज के समय में लग्जरी सिर्फ राष्ट्रीय स्तर के डेवलपर्स की खासियत नहीं रह गई है. नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा के कई क्षेत्रीय डेवलपर्स भी अब परियोजना में उच्च स्तरीय क्लब, हरित क्षेत्र, बहु स्तरीय खेल परिसर और प्रीमियम सुविधाएं दे रहे हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि उनकी प्राइसिंग अभी भी ज्यादा अफोर्डेबल बनी हुई है जो आज भी घर खरीदारों की मांगों के अनुरूप है."
लोअर कॉस्ट पर लैंड एक्वायर की थी
केबी ग्रुप के फाउंडर राकेश सिंघल के अनुसार “रीजनल डेवलपर्स का सबसे बड़ा एडवांटेज उनका ओल्ड लैंड बैंक है. उन्होंने कई साल पहले लोअर कॉस्ट पर लैंड एक्वायर की थी, जिसकी वजह से उनकी ओवरऑल प्रोजेक्ट कॉस्ट कंट्रोल में रहती है. यही उन्हें मार्केट में ज्यादा कॉम्पिटिटिव और प्राइस-एफिशिएंट बनाता है.”
आकर्षण को काफी बढ़ाएंगे
सुरेश गर्ग, सीएमडी, निराला वर्ल्ड कहते हैं, "आने वाले वर्षों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा का रियल एस्टेट मार्केट और ज्यादा प्रतिस्पर्धी होने वाला है, खासकर तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण. यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आरआरटीएस जैसे प्रोजेक्ट्स इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आकर्षण को काफी बढ़ाएंगे. इससे नेशनल और इंटरनेशनल डेवलपर्स की दिलचस्पी भी बढ़ेगी. हालांकि, वर्तमान परिदृश्य में क्षेत्रीय डेवलपर्स ही इस मार्केट के प्रमुख खिलाड़ी बने हुए हैं. उनकी लोकल अंडरस्टैंडिंग, तेजी से निर्णय लेने की क्षमता और कस्टमर-फ्रेंडली प्राइसिंग स्ट्रैटेजी उन्हें एक स्पष्ट बढ़त देती है, जो निकट भविष्य में भी कायम रह सकती है.”
मूंग की खरीद पर मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, 25 के बजाय 60 प्रतिशत खरीद को दी मंजूरी
मध्य प्रदेश में मूंग खरीद पर सरकार और किसानों के बीच नहीं बन पाई. इसके बाद देर रात किसानों ने अपना प्रदशर्न जारी जारी रखने की घोषणा की है. इससे पहले बुधवार रात MP सरकार और किसानों के बीच 3 घंटे तक बैठक चली. इसमें सरकार के 25% की जगह 60% मूंग खरीदी का निर्णय लिया था.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation