Rajasthan News: राजस्थान में प्रसूताओं की मौत पर उठे बड़े सवाल, जांच में लापरवाही के संकेत, परिवारों ने मांगा जवाब, सरकार पर बढ़ा दबाव
Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत के मामलों ने पूरे हेल्थ सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले कुछ महीनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ चुके हैं. इन घटनाओं के बाद पीड़ित परिवारों ने इलाज में लापरवाही के भी आरोप लगाए हैं, वहीं मेडिकल जांच रिपोर्टों में भी संक्रमण नियंत्रण और अस्पताल प्रबंधन से जुड़ी खामियों की पुष्टि की गई है. ऐसे में विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने राजस्थान सरकार से जवाबदेही मांगी है.
कोटा से शुरू हुआ मौत का सिलसिला
इस मामले की शुरुआत कोटा के सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी और सी-सेक्शन केसेज के बाद महिलाओं की मौत की खबरों से हुई थी. इसके बाद धीरे-धीरे कुछ ही दिनों के अंदर अन्य जिलों से भी इसी तरह के मामले सामने आने लगे. कई महिलाओं की मौत के अलावा, कुछ प्रसूताओं में गंभीर संक्रमण, किडनी फेल होने और लंबे समय तक इलाज करवाने की नौबत तक आ गई थी. इन घटनाओं ने अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था और चिकित्सा प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
यह भी पढ़ें: राजस्थान में मातृ मृत्यु मामले पर एनएचआरसी सख्त, मुख्य सचिव को नोटिस; दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
परिवारों ने लगाएं कई गंभीर आरोप
पीड़ित परिवारों ने सीधे तौर पर आरोप लगाएं हैं कि अस्पतालों में समय पर उचित उपचार नहीं मिला और मरीजों की हालत बिगड़ने के बावजूद पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. कई परिवारों का कहना है कि उन्हें अपनी बेटियों और बहुओं की मौत के स्पष्ट कारण तक नहीं बताए गए. परिवारों ने आरोप लगाया है कि अगर समय रहते बेहतर इलाज और निगरानी की व्यवस्था होती तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं. कई मामलों में खराब, पुरानी और गलत दवाएं भी दी गई थी, जिससे मौत हुई है.
स्पेशल टीम की स्पेशल रिपोर्ट ने खोली अस्पतालों की पोल
इस बीच जांच के लिए गठित स्पेशल कमेटियों की रिपोर्ट ने भी अब इस मामले कई सवाल खड़े किए हैं. कोटा से जुड़ी जांच रिपोर्ट में इंफेक्शन को कंट्रोल करने की व्यवस्था में कमी पाई गई, अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और कुछ मामलों में मेडिकल मैनेजमेंट से जुड़ी बड़ी खामियों का उल्लेख भी किया गया है. रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि कुछ मामलों में संक्रमण इतनी तेजी से फैले हैं कि उनके संकेत भी मिले, जबकि अन्य मामलों में अत्यधिक रक्तस्राव और जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियां मौत का कारण बनी हैं. हालांकि, सभी मामलों के पीछे एक ही कारण होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस चौंकाने वाली रिपोर्ट ने अस्पतालों की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है. खासतौर पर राजस्थान में.
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की गुणवत्ता खराब
इस पूरे मामले ने उस समय और तूल पकड़ ली, जब ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल की गुणवत्ता जांच में फेल हो गई. इसके बाद सरकार ने संबंधित बैच पर रोक लगाने और दवा के सैंपल की व्यापक जांच कराने के भी निर्देश दिए. इस पर विपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि दवा की गुणवत्ता को लेकर संदेह था तो समय रहते निगरानी क्यों नहीं की गई और ऐसी दवाएं अस्पतालों तक कैसे पहुंचीं.
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा बयान
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बयान की भी इन दिनों खूब चर्चा में रहा है. मंत्री ने कहा कि महिलाओं की मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है और सरकार मामले के हर पहलू की जांच करा रही है. हालांकि, विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार शुरुआत में मामले की गंभीरता को समझने में विफल रही. मंत्री के कुछ बयानों को लेकर भी राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ, जिसके पश्चाच सरकार को सफाई देनी पड़ी.
राजस्थान स्वास्थ्य विभाग के बड़े कदम
लगातार बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने कई कदम उठाने की घोषणा की है. अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था मजबूत करने, गर्भवती महिलाओं की स्पेशल स्क्रीनिंग कराने, दवाओं की जांच प्रक्रिया को सख्त करने और नई मानक संचालन प्रक्रियाएं (New Standard Operating Procedures) लागू करने के भी निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए ब्लड रिप्लेसमेंट डोनर की अनिवार्यता को खत्म करने का भी निर्णय लिया गया है.
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि यदि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह सतर्क थी तो इतनी बड़ी संख्या में प्रसूताओं की मौत कैसे हुई. पीड़ित परिवार जवाब चाहते हैं, विपक्ष जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है और आम जनता भी यह जानना चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की दोबारा होने से रोकने के लिए सरकार आखिर कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है.
ये भी पढ़ें-Rajasthan Crime: कुएं से मिली 7 दिन तक लापता रहे फाइनेंसर की लाश, पुलिस की लचर जांच पर उठ रहे सवाल!
सपना चौधरी पर लगा सूखा नशा करने का आरोप, जानें पहले किन विवादों में घिरीं डांसर
Sapna Choudhary Controvery: हरियाणी डांसर सपना चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उनकी चर्चा किसी नए गाने या स्टेज शो की वजह से नहीं, बल्कि उन पर लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर हो रही है. हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में धर्मेंद्र हुड्डा ने सपना चौधरी पर सूखा नशा करने का आरोप लगाया. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब सपना चौधरी किसी विवाद को लेकर चर्चा में आई हैं. इससे पहले भी उनसे जुड़े कई विवाद सामने आए हैं.
रागिनी कार्यक्रम को लेकर विवाद
सपना चौधरी के करियर के शुरुआती दिनों में उनके कई रागिनी कार्यक्रम विवादों में रहे. कुछ सामाजिक संगठनों ने उनके डांस और स्टेज परफॉर्मेंस पर आपत्ति जताई थी. हालांकि, सपना ने हमेशा इसे अपनी कला और मनोरंजन का हिस्सा बताया और लगातार स्टेज शो करती रहीं.
आत्महत्या करने की कोशिश
वहीं, सपना चौधरी की लाइफ से जुड़ा सबसे चर्चित विवाद 2016 में सामने आया था. एक रागिनी कार्यक्रम में गाए गाने को लेकर उन पर एक समुदाय की भावनाएं आहत करने का आरोप लगा था. मामला पुलिस तक भी पहुंच गया था और उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज हुई थी. इस विवाद के बीच सपना ने कथित तौर पर आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी. बाद में इलाज के बाद उन्होंने वापसी की और सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों का धन्यवाद भी किया.
स्टेज शो और आयोजकों से विवाद
कई बार सपना चौधरी के स्टेज शो को लेकर आयोजकों के साथ विवाद की खबरें भी सामने आईं. कहीं कार्यक्रम रद्द होने पर विवाद हुआ तो कहीं फीस और आयोजन से जुड़े मतभेदों की चर्चाएं रहीं, हालांकि, ऐसे मामलों में हर बार अलग-अलग पक्ष सामने आए और कई विवाद समय के साथ खत्म भी हो गए.
शादी में चल रही अनबन
कुछ समय पहले सपना चौधरी की शादी में चल रही अनबन की खबरें भी सामने आई. सपना ने अपने पति यशवीर साहू उर्फ वीर साहू पर घरेलू हिंसा, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे. प्रताड़ना से परेशान होकर वो अपने बच्चों के साथ ससुराल छोड़कर अलग रहने लगी हैं. इस मामले में दिल्ली के द्वारका महिला कोर्ट ने सपना को अंतरिम सुरक्षा दी है और पति को उनके पास जाने या संपर्क करने से रोका है.
सूखा नशा करने का आरोप
हाल ही में जाट आंदोलन के भगोड़े धर्मेंद्र हुड्डा ने सपना चौधरी पर नशा करने का आरोप लगाया. वायरल वीडियो में उन्होंने कहा- 'सपना नशेड़ी है, वो सूखा नशा गांजा पीकर स्टेज पर जाती है और कुछ भी बोल देती है. अब स्टेटमेंट दे रही है कि उसके ऊपर केस करेगी. वो जिस भाषा में बोलेगी, उसे उसी भाषा में जवाब भी मिलेगा.' इतना ही नहीं, धर्मेंद्र ने हाल ही में पहले फेसबुक पर लाइव आकर भी सपना चौधरी के खिलाफ भड़ास निकाली थी. उन्होंने ये दावा भी किया था कि सपना पर 35 FIR दर्ज है, लेकिन वो सेटिंगबाजी के चलते बच रही है.
सपना के माफी न मांगने पर भड़के हुड्डा
धर्मेंद्र हुड्डा ने महम चौबीसी में हुई खाप पंचायत का जिक्र करते हुए कहा - 'वहां हरियाणा के कलाकारों और प्रतिनिधियों ने अपनी गलतियों के लिए माफी मांग ली थी, लेकिन सपना चौधरी ने माफी नहीं मांगी.' उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा- 'जिन लोगों के घर-परिवार और ससुराल की इज्जत का लिहाज नहीं होता, वे नशे की हालत में कुछ भी बोल देते हैं.' उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब हरियाणा में कोई भी कलाकार स्टेज परफॉर्मेंस करके दिखाए, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से राज्य में शांति है और अश्लील डांस पर रोक लगी हुई है.
ये भी पढ़ें- August 2026 Movies: टॉक्सिक, आवारापन 2 से लेकर ईथा तक, अगस्त के महीने में रिलीज होगी ये बड़ी फिल्में

News Nation