भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अगले सप्ताह पहली बार करेंगे अंतरिक्ष में चहल-कदमी
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 27 जुलाई भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अगले सप्ताह पहली बार अंतरिक्ष में चहल-कदमी (स्पेस वॉक) करेंगे। इस दौरान वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से बाहर निकलकर सोलर एरे के उन्नयन, संचार एंटीना बदलने तथा कक्षीय प्रयोगशाला के संचालन को समर्थन देने के लिए नए डेटा और पावर केबल लगाने का कार्य करेंगे। केरल के पलक्कड़ से संबंध रखने वाले मेनन छह अगस्त से अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर के साथ तीन बार अंतरिक्ष में चहल-कदमी करेंगे।
नासा ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि इसके जरिए इस वर्ष के अंत में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन रोल-आउट सोलर एरे (आईआरओएसए) की स्थापना की तैयारी की जाएगी। आईआरओएसए अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराएगा, जिससे अंतरिक्ष स्टेशन के महत्वपूर्ण संचालन, विशेष रूप से उसके सुरक्षित और नियंत्रित डी-ऑर्बिट (कक्षा से बाहर लाने) की प्रक्रिया को मदद मिलेगी। ये स्पेस वॉक छह अगस्त, 13 अगस्त और 25 अगस्त को निर्धारित हैं।
मेनन ने कहा, “अंतरिक्ष से स्टारबेस का हमारा दृश्य! सफलता के लिए शुभकामनाएं भेजिए।” भारतीय मूल के पिता और यूक्रेनी मूल की मां के यहां मिनियापोलिस में जन्मे नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे। वे लगभग आठ महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेंगे, जहां वे वैज्ञानिक प्रयोगों, नई प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन और स्टेशन के संचालन से जुड़े कार्यों में भाग लेंगे।
रक्षा और असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं भारत-अमेरिका: अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 28 जुलाई अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर ने कहा है कि अमेरिका और भारत रक्षा तथा असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं जिसमें विश्वसनीय कृत्रिम मेधा (एआई) तथा अर्थव्यवस्था को गति देने वाली अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना भी शामिल है। कपूर ने यह बात हूवर इंस्टीट्यूशन में भारत पर आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन के दौरान कही। इस कार्यक्रम में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस और भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत डेविड सी. मुलफोर्ड ने भी भाग लिया।
कपूर ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “इस (ट्रंप) प्रशासन में भारत के साथ अमेरिका की बढ़ती भागीदारी से देश में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। साथ ही, ऐसी आपूर्ति शृंखलाएं भी सुदृढ़ हो रही हैं जो अमेरिका और पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।” उन्होंने कहा, “हम रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग का विस्तार कर रहे हैं और इसमें विश्वसनीय कृत्रिम मेधा तथा अर्थव्यवस्था को गति देने वाली अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।” पिछले वर्ष भारत और अमेरिका ने थल, जल, आकाश, अंतरिक्ष तथा साइबर क्षेत्र में संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्त्वपूर्ण रक्षा साझेदारी मसौदे पर हस्ताक्षर किए थे। वर्ष 2002 के बाद से भारत ने अमेरिका से अनेक आधुनिक रक्षा प्रणालियां खरीदी हैं।
इनमें अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, सी-17 तथा सी-130जे परिवहन विमान, पी-8आई समुद्री गश्ती विमान और एम777 होवित्जर तोपें प्रमुख हैं। अमेरिका की परमाणु ऊर्जा कंपनियां भारत के असैन्य परमाणु क्षेत्र में निवेश और सहयोग की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं। इस वर्ष की शुरुआत में नयी दिल्ली द्वारा ‘शांति’ कानून के माध्यम से दायित्व संबंधी प्रावधानों में ढील दिए जाने के बाद, निजी क्षेत्र के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से परमाणु उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था।
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