Responsive Scrollable Menu

जनेऊ धारण करने का क्या है धार्मिक महत्व? जानें इसे पहनने के नियम और इससे जुड़ी मान्यताएं

Janeu dharan karne ka mahatva: हिंदू धर्म में जनेऊ, जिसे यज्ञोपवीत भी कहा जाता है, को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक माना जाता है। यह एक पवित्र धागा होता है, जिसे उपनयन संस्कार के दौरान धारण कराया जाता है। मान्यता है कि जनेऊ धारण करने के बाद ही व्यक्ति को वेद अध्ययन और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेने का अधिकार प्राप्त होता है, इसी वजह से इसे हिंदू संस्कारों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण रस्म माना जाता है।

जनेऊ के तीन धागों का धार्मिक अर्थ
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जनेऊ में तीन धागे होते हैं, जो व्यक्ति के तीन ऋणों - देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि जनेऊ धारण करने के बाद व्यक्ति इन तीनों ऋणों को चुकाने का संकल्प लेता है। इसके अलावा इन तीन धागों को सत्व, रज और तम - इन तीन गुणों का भी प्रतीक माना जाता है, जिन्हें संतुलित रखने की सीख जनेऊ के जरिए दी जाती है।

कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि जनेऊ को त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी प्रतीक माना जाता है, इसी वजह से इसे धारण करना अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।

उपनयन संस्कार से जुड़ी परंपरा
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, उपनयन संस्कार को हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है, जिसमें बालक को पहली बार जनेऊ धारण कराई जाती है। मान्यता है कि इस संस्कार के बाद बालक को शिक्षा ग्रहण करने और गुरु के सान्निध्य में वेदों का अध्ययन करने का अधिकार प्राप्त होता है। इसी वजह से इसे बालक के जीवन के दूसरे जन्म के समान भी माना जाता है, इसलिए जनेऊ धारण करने वाले को "द्विज" भी कहा जाता है।

जनेऊ पहनने से जुड़े जरूरी नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जनेऊ को हमेशा बाएं कंधे से दाहिनी ओर की कमर तक पहना जाता है। मान्यता है कि शुभ कार्यों के दौरान जनेऊ को इसी स्थिति में रखना चाहिए, जबकि शौच या अशुद्ध कार्यों के समय इसे कान पर लपेटने की परंपरा है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि जनेऊ को नियमित रूप से बदलते रहना चाहिए, खासकर जब यह मैला या टूट जाए, क्योंकि खंडित जनेऊ धारण करना अशुभ माना जाता है।

जनेऊ बदलने का सही समय
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, श्रावणी पूर्णिमा के दिन जनेऊ बदलने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है, जिसे "रक्षाबंधन" के साथ भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पुराने जनेऊ को उतारकर विधिवत रूप से नया जनेऊ धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है, और इससे व्यक्ति के पूर्व संकल्प नवीनीकृत होते हैं।

आज भी कई परिवारों में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही आधुनिक जीवनशैली में कई बदलाव आए हों, लेकिन जनेऊ धारण करने की यह परंपरा आज भी अनेक हिंदू परिवारों में श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। खासतौर पर ब्राह्मण और अन्य समुदायों में आज भी उपनयन संस्कार को बड़े धार्मिक आयोजन के रूप में मनाया जाता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान से सलाह अवश्य लें।

Continue reading on the app

अंकिता भंडारी हत्याकांड: सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, सरकार ने बताया मजबूत पैरवी का नतीजा

अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है. मामले में सभी आरोपियों की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी है. राज्य सरकार ने इसे अभियोजन की मजबूत पैरवी और मामले में की गई विस्तृत जांच का परिणाम बताया है. सरकार का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मामले की शुरुआत से ही गंभीरता के साथ कार्रवाई की गई.

आरोपियों को नहीं मिली राहत

सरकार के अनुसार, मामले में आरोपियों को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर जेल भेज दिया गया था. इसके बाद जांच आगे बढ़ाते हुए आरोपियों के खिलाफ विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई. मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से जमानत के लिए प्रयास किए गए, लेकिन अभियोजन की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें राहत नहीं मिल सकी. सरकार का दावा है कि अंतिम न्यायिक फैसले तक आरोपी जेल में रहे.

SIT ने की विस्तृत जांच

अंकिता हत्याकांड की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया था. जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई. इसमें लगभग 100 गवाहों के बयान समेत कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया.

सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियों ने मामले के विभिन्न पहलुओं को सामने लाने के लिए साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से जुटाया. इसी आधार पर अदालत में अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ अपना पक्ष मजबूती से रखा.

तीन बार बदले गए सरकारी वकील

मामले में पीड़ित परिवार की मांग को भी सरकार ने महत्व दिया. परिजनों की संतुष्टि और मांग के अनुसार सरकारी अधिवक्ता में तीन बार बदलाव किया गया.

सरकार के मुताबिक, परिवार की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े फैसले लिए गए. अंकिता के माता-पिता ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग भी की थी. सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार करते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे.

परिवार को 25 लाख रुपये की सहायता

सरकार ने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराई. परिवार के लिए 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का दावा किया गया है. इसके अलावा दिवंगत अंकिता के भाई और पिता को नौकरी देने की बात भी सरकार ने कही है. सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य परिवार को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर सहारा देना था.

दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा

मामले में मजबूत जांच और अभियोजन की पैरवी के बाद अदालत ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. सरकार इसे मामले में की गई कानूनी कार्रवाई का महत्वपूर्ण परिणाम मान रही है.

राज्य सरकार का कहना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए शुरुआत से ही दोषियों को कानून के तहत कठोर सजा दिलाने की दिशा में कदम उठाए गए.

‘VIP’ मामले को लेकर भी उठे सवाल

अंकिता हत्याकांड के दौरान कथित ‘VIP’ से जुड़े सवाल भी लगातार राजनीतिक बहस का विषय रहे. सरकार ने विपक्षी दलों और संगठनों पर आरोप लगाया कि बिना ठोस साक्ष्य के इस मुद्दे को राजनीतिक रूप दिया गया.

सरकार का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन के पास इस संबंध में कोई ठोस तथ्य या प्रमाण है, तो उसे जांच एजेंसियों या अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए. संवेदनशील मामले में केवल आरोप लगाने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से तथ्यों को सामने लाना जरूरी है.

सरकार ने कार्रवाई को बताया प्राथमिकता

राज्य सरकार का कहना है कि अंकिता भंडारी मामले में त्वरित गिरफ्तारी से लेकर SIT जांच, चार्जशीट, अभियोजन की पैरवी, परिवार की मांगों पर कार्रवाई और आर्थिक सहायता तक कई कदम उठाए गए.

सरकार के अनुसार, मामले में दोषियों को मिली उम्रकैद और लगातार खारिज हो रही जमानत याचिकाएं इस बात का संकेत हैं कि न्यायिक प्रक्रिया में अभियोजन ने अपना पक्ष मजबूती से रखा. हालांकि, मामले से जुड़े किसी भी अंतिम कानूनी निष्कर्ष को अदालत के आदेशों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही देखा जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें - 50 हजार की भीड़, टूटी बैरिकेडिंग और करंट की अफवाह... लखीसराय के अशोक धाम में आखिर कैसे मची भगदड़?

Continue reading on the app

  Sports

टेस्ट क्रिकेट की एक इनिंग में 5 विकेट लेने वाली गेंदबाजों की पहली जोड़ी कौन है?

इंग्लैंड के ओली रोबिन्सन और जॉश टंग ने जो किया वैसा टेस्ट क्रिकेट में पहली बार नहीं हुआ है. ऐसे में सवाल है कि उनकी ही तरह टेस्ट की एक इनिंग में 5 विकेट लेने वाली पहली जोड़ी कौन सी है? Thu, 20 Aug 2026 13:25:30 +0530

  Videos
See all

पाकिस्तान में चर्चों पर कट्टरपंथी हमला...ईसाई होना बना ‘गुनाह-ए-अज़ीम’! Pakistan | Church Attack | #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-20T08:15:13+00:00

गाज़ियाबाद में पुलिस मुठभेड़, गोली लगने से 1 संदिग्ध घायल | Ghaziabad Encounter | UP News #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-20T08:12:49+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers