E20 से जुड़े फर्जी AI वीडियो पर एक्शन, HC से मिली मुकदमा चलाने की मंजूरी, अपराध साबित होने पर किसको और कितनी होगी सजा?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को सोशल मीडिया पर फैलाई गई कथित मानहानि वाली पोस्ट और डीपफेक कंटेंट के लिए Google, X और Meta जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ सिविल मानहानि का मुकदमा दायर करने की इजाज़त दे दी।'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अभय आहूजा की बेंच ने गडकरी को यह मुकदमा दायर करने की मंज़ूरी तब दी जब उनके वकील संदीप एस. लड्डा ने दलील दी कि कथित मानहानि वाला कंटेंट मुंबई में यूज़र्स के लिए अलग-अलग इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध था। इससे बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में मामले का एक बड़ा हिस्सा बनता है।
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'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज XII के तहत दायर अपनी याचिका में गडकरी ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन गलत, गुमराह करने वाली और मानहानि करने वाली सामग्री पब्लिश की गई, जिसमें उन्हें और उनके परिवार को केंद्र की E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) पॉलिसी से कथित तौर पर होने वाले आर्थिक लाभ से जोड़ा गया। याचिका में कहा गया कि ये आरोप बेबुनियाद हैं क्योंकि इथेनॉल-ब्लेंडिंग पॉलिसी का संचालन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है, न कि गडकरी के नेतृत्व वाला सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय।
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प्रस्तावित सिविल केस में गडकरी ने कथित तौर पर मानहानि करने वाली सामग्री के पब्लिकेशन और सर्कुलेशन पर स्थायी और अनिवार्य रोक लगाने की मांग की है। इस सामग्री में ऐसा कंटेंट शामिल है जिसमें उन पर झूठे बयान थोपे गए हैं, अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है, और उनकी सहमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, चेहरे के हाव-भाव और आवाज़ का इस्तेमाल करते हुए AI से बनाए गए ऑडियो और विज़ुअल का इस्तेमाल किया गया है। केंद्रीय मंत्री का दावा है कि इस सामग्री से उनकी प्रतिष्ठा, गुडविल, सम्मान और पब्लिक इमेज को "गंभीर और अपूरणीय" नुकसान पहुंचा है, साथ ही उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी अधिकारों का भी उल्लंघन हुआ है। हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद, गडकरी अब मेटा, X, गूगल और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ मानहानि का सिविल केस करेंगे और मानहानि करने वाले और मनगढ़ंत कंटेंट के कथित प्रसार के खिलाफ कानूनी उपाय मांगेंगे।
यूटीयू प्रश्नपत्र लीक मामला: आरोपी सहायक प्रोफेसर डॉ. आशीष गुप्ता पर लगा आजीवन प्रतिबंध
देहरादून, 27 जुलाई वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) ने सेमेस्टर परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक करने के आरोपी एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के गिरफ्तार सहायक प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता पर सभी शैक्षणिक कार्यों के लिए आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, सेमेस्टर परीक्षा 2025-26 के प्रश्नपत्र लीक प्रकरण में संलिप्तता के आरोप के दृष्टिगत डॉ गुप्ता को तत्काल प्रभाव से शिक्षण कार्य, पठन-पाठन, प्रश्नपत्र तैयार करने एवं सभी शैक्षणिक कार्य हेतु आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया है। इससे पहले, आरोपी सहायक प्रोफेसर को विश्वविद्यालय के सभी परीक्षा संबंधी कार्यों से आगामी सात वर्षों के लिए प्रतिबंधित किया गया था तथा उसके खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।
देहरादून के ‘शिवालिक कॉलेज आफ इंजीनियरिंग’ ने भी मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए डॉ गुप्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत ने कहा कि कथित प्रश्नपत्र लीक की इस घटना को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है, इसलिए विद्यार्थियों के हितों से खिलवाड़ करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।
यूटीयू ने अपनी उच्चस्तरीय जांच में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को सही पाए जाने के बाद पिछले सप्ताह इंजीनियरिंग के दो विषयों— मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट आफ थिंग्स और इलैक्ट्रोमेगनेटिक फील्ड थ्योरी की परीक्षाएं निरस्त कर दी थीं और उनकी पुनर्परीक्षाएं अगस्त के तीसरे सप्ताह में कराने का निर्णय लिया था। आरोप है कि ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट आफ थिंग्स विषय का प्रश्नपत्र बाहय पेपर सेटर के तौर पर डॉ गुप्ता ने तैयार किया था जिसके प्रश्न उन्होंने कथित तौर पर व्हाटसएप और आंतरिक पोर्टल पर कुछ छात्रों के साथ साझा कर दिए। लेकिन जांच समिति ने उनके द्वारा तैयार किए गए एक अन्य विषय इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी के प्रश्नपत्र में भी इसी प्रकार की विसंगति और गोपनीयता भंग होने की आशंका के मद्देनजर उसे निरस्त करने की सिफारिश की थी।
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