Rajasthan Crime: कुएं से मिली 7 दिन तक लापता रहे फाइनेंसर की लाश, पुलिस की लचर जांच पर उठ रहे सवाल!
Rajasthan Crime: राजस्थान में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की समर्थता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, यहां सात दिनों से लापता एक 78 साल के फाइनेंसर शोभाराम जैन का शव कुएं से बरामद हुआ है. शव के कुएं से बरामद होने से सनसनी फैल गई है. खास बात है कि जैन पिछले 7 दिनों से गायब थे. 4 दिनों से पुलिस जांच कर रही थी, बावजूद इसके वे उन्हें ढूंढ तक नहीं पाए. घटना भीलवाड़ा जिले की है.
अब जानें क्या है पूरा मामला
शव जिस हालत में मिला, उसने हत्या की आशंका को और गहरा कर दिया है. पुलिस के अनुसार, मृतक को तारबंदी वाले पोल से हाथ-पैर बांधकर कुएं में फेंका गया था. रविवार सुबह ग्रामीणों ने कुएं में श देखकर पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही बागोर थाना पुलिस, एफएसएल टीम और एसडीआरएफ मौके पर पहुंची. इसके बाद एसडीआरएफ और क्रेन की मदद से पुलिस ने शव को बाहर निकाला. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस शुरुआती जांच में हत्या की वजह पैसों की लेन-देन मान रही है.
4 दिन की जांच के बाद भी जैन को नहीं ढूंढ सकी पुलिस
पुलिस के अनुसार, शोभाराम बावलास गांव के रहेन वाले थे. वे 19 जुलाई को पाली जिले में स्थित जैन तीर्थ सिरियारी दर्शन करने के लिए गए थे, जिसके बाद से वे घर नहीं लौटे. परिजनों ने उनको ढूंढने की खूब कोशिश की लेकिन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. इसके बाद उनके बेटे भैरूलाल ने 22 जुलाई को बागौर थाने में केस दर्ज करवाया. 22 जुलाई से पुलिस ने केस की जांच की पर 4 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाई. इसके बाद 26 जुलाई की सुबह ग्रामीणों ने कुए में शव देखकर पुलिस को जानकारी दी. शव सीमेंट के पोल से बांधकर कुएं में फेंका गया था, जिससे लंबे वक्त तक वह सतह पर न आ सके.
लेन-देन के विवाद को माना जा रहा हत्या का कारण
मामले में बागोर थानाधिकारी बच्छ राज ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया कि शोभाराम जैन ब्याज पर रुपए देते थे. ऐसे में लेन-देन के विवाद को हत्या का कारण माना जा रहा है. हालांकि, हत्या की असल वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा. पुलिस केस की विभिन्न एंगल से जांच कर रही है.
बरसात में रहना है सेहतमंद? तो रोजमर्रा की इन छोटी आदतों से करें संक्रमण का बचाव
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाने के साथ-साथ मानसून अपने साथ प्रकृति की हरी-भरी सुंदरता भी लेकर आता है लेकिन इसके आगमन से कई तरह के मौसमी संक्रमण और बीमारियां भी पनपती हैं। उमस और नमी के दौर में सतर्कता और स्वच्छता सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनता है।
रोजमर्रा की जिंदगी में अगर व्यक्ति छोटी-मोटी और आसान आदतों का ध्यान दे, तो वह न सिर्फ अपने परिवार को सुरक्षित रख सकता है बल्कि पूरे मानसून में खुद ऊर्जावान और स्वस्थ भी बना रह सकता है।
इसी को देखते हुए आयुष मंत्रालय ने हेल्थ एडवाइजरी जारी की, जिसमें उन्होंने मानसून में कुछ सावधानियों पर जोर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी पोस्ट में उन्होंने लिखा, स्वस्थ मानसून (बरसात) की शुरुआत अच्छी स्वच्छता की आदतों से होती है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी सावधानियां आपको मौसम में होने वाले संक्रमणों से बचाने और आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में बड़ी मदद कर सकती हैं।
आयुष मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में सबसे पहले उन्होंने नियमित रूप से हाथ धोने पर जोर दिया है। उनके अनुसार, नियमित रूप से हाथ धोना काफी नहीं है बल्कि सही तरीके से हाथ धोना जरूरी है। इसके लिए सुमन-के तरीके से हाथ धोने के लिए बताया जाता है, जिसमें एस (सीधा), यू (उल्टा), एम (मुट्ठी), ए (अंगूठा), एन (नाखून) और के (कलाई) के छह चरण शामिल होते हैं। यह विधि हाथों को पूरी तरह साफ करके कीटाणुओं और बीमारियों से बचाने में मदद करता है।
बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदल लेने चाहिए ताकि त्वचा पर नमी न बढ़े। ऐसा करने से स्किन पर खुजली, रैशेज और फंगल इंफेक्शन से बचा जा सकता है। इसलिए बरसात में कोशिश करें कि न भीगें और अगर ऐसा हो भी गया, तो फौरन कपड़े बदल लें।
बारिश के मौसम में रोजाना पैरों को साफ और सूखे मोजे पहनने की कोशिश करें। क्योंकि लंबे समय तक गीले जूते या मोजे पहनने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
अपने आसपास की जगह को साफ रखें और बारिश के मौसम में पानी जमा न होने दें। ऐसा करने से घर में मच्छरों को पनपने से रोका जा सकता है। वहीं, कमरों में पर्याप्त हवा का आवागमन बनाए रखें।
अगर बारिश के मौसम में किसी भी तरह के स्किन इंफेक्शन, उल्टी और तेज बुखार जैसी शारीरिक समस्या हो, तो एक बार डॉक्टर की सलाह लें। खुद दवा लेने की गलती बिल्कुल भी न करें।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
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