राजगढ़ गौशाला सत्यापन में बड़ी गड़बड़ी! कलेक्टर का सख्त एक्शन, 5 पशु चिकित्सा अधिकारियों की वेतनवृद्धि रोकने की अनुशंसा
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में गौशालाओं के सत्यापन के दौरान सामने आई अनियमितताओं ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। दरअसल जांच में कई गौशालाओं में दर्ज गोवंश की संख्या और मौके पर मौजूद पशुओं की संख्या में बड़ा अंतर मिला। इसके बाद कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने पांच पशु चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है।
दरअसल राजगढ़ प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई केवल रिकॉर्ड में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद सरकारी योजनाओं में जवाबदेही तय करना भी है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि गौवंश संरक्षण जैसी संवेदनशील योजना में गलत जानकारी देना या बिना सही सत्यापन के रिपोर्ट तैयार करना गंभीर लापरवाही है। इसलिए संबंधित अधिकारियों की एक-एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने की अनुशंसा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आयुक्त को भेजी गई है। प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से भविष्य में सरकारी रिकॉर्ड की शुद्धता और निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी।
गौशाला सत्यापन में कैसे सामने आई अनियमितता?
दरअसल कलेक्टर के निर्देश पर जिले की सभी गौशालाओं का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया गया। इस प्रक्रिया में प्रत्येक गौशाला में मौजूद गोवंश की वास्तविक संख्या का मिलान पहले भेजी गई रिपोर्ट से किया गया। जांच के दौरान कई स्थानों पर पाया गया कि पहले जिन अधिकारियों ने अधिक संख्या का प्रमाणन किया था, मौके पर उतने पशु मौजूद नहीं थे। इससे सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
वहीं जांच के बाद जीरापुर के डॉ. तीरथराज कुलस्ते, सारंगपुर के डॉ. अमित शाक्य, सुठालिया की डॉ. अनीता पंवार, माचलपुर क्षेत्र के डॉ. विनोद यादव और खिलचीपुर के डॉ. मधुसूदन शाक्य के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई। इन सभी अधिकारियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनके जवाबों की समीक्षा के बाद प्रशासन ने उन्हें संतोषजनक नहीं माना और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का मेल होना बेहद जरूरी है।
गौवंश संरक्षण योजना में पारदर्शिता पर प्रशासन का जोर
राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने कहा कि गौवंश संरक्षण केवल एक प्रशासनिक योजना नहीं बल्कि सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है। ऐसे में गौशालाओं में मौजूद पशुओं की सही संख्या दर्ज करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि गलत जानकारी भेजी जाती है तो इससे सरकारी सहायता, बजट वितरण और योजनाओं की निगरानी सभी प्रभावित होती हैं।
प्रशासन ने जिले के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से गौशालाओं का भौतिक निरीक्षण करें और केवल सत्यापित जानकारी ही विभाग को भेजें। भविष्य में यदि किसी भी स्तर पर रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ और अधिक सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय-समय पर स्वतंत्र सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाएं अपनाने से ऐसी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। जिला प्रशासन का यह कदम सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
उत्तराखंड के शातिर चोर दमोह में गिरफ्तार, अधिकतर मंदिरों को बनाते थे निशाना, कई राज्यों में दर्ज हैं केस, पढ़ें खबर
दमोह पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतर्राज्यीय चोर गिरोह के दो शातिर सदस्यों को दबोचा है। ये चोर उत्तराखंड के रहने वाले हैं और देश के कई राज्यों में चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। यह कार्रवाई दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र में हुई, जहां बीते 22 मई को जैन समाज के प्रसिद्ध विरागोदय तीर्थ क्षेत्र मंदिर में चोरी की बड़ी घटना सामने आई थी। चोरों ने मंदिर की दान पेटी पर हाथ साफ किया था, जिससे जैन समाज में गहरा आक्रोश और चिंता का माहौल था।
घटना मंदिर परिसर में लगे कैमरों में स्पष्ट रूप से कैद हो गई थी। इन सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ही पथरिया पुलिस ने चोरों की तलाश शुरू की। पुलिस टीम ने फुटेज का गहनता से विश्लेषण किया और संदिग्धों की पहचान की दिशा में तेजी से आगे बढ़ी। लगातार जांच, तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की सूचना पर पुलिस ने आखिरकार दो चोरों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। इन शातिर चोरों को दबोचते ही पुलिस भी हैरान रह गई, क्योंकि इनका आपराधिक ट्रैक रिकॉर्ड बेहद चौंकाने वाला था। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए ये चोर साधारण अपराधी नहीं हैं, बल्कि बेहद शातिर और पेशेवर अपराधी हैं।
कई राज्यों में दर्ज हैं संगीन मामले
इनके खिलाफ देश के कई राज्यों में संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। चोरी इनका पसंदीदा अपराध है, और विशेषकर मंदिरों को निशाना बनाना इन्हें बड़ा सुकून देता है। पूछताछ में चोरों ने बताया कि वे एक बड़े अंतर्राज्यीय चोर गिरोह के सदस्य हैं। उनका गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय है और अधिकतर मंदिरों को ही अपना निशाना बनाता है। दमोह में भी उन्होंने विरागोदय तीर्थ क्षेत्र के विशाल मंदिर को देखा था, जिसके बाद उन्होंने वहां चोरी की वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई और सफल भी हुए।
पकड़े गए आरोपियों से कई और वारदातों के खुलासे की उम्मीद
एसडीओपी पथरिया दमोह प्रिया सिंधी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस ने मंदिर चोरी की घटना को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। उन्होंने बताया कि पकड़े गए आरोपितों से और भी कई वारदातों का खुलासा होने की उम्मीद है। पुलिस ने इन चोरों के पास से चोरी का सामान बरामद करने की दिशा में भी कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल, पुलिस पकड़े गए चोरों से गहराई से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में अंतर्राज्यीय गिरोह के अन्य सदस्यों और देश के अन्य हिस्सों में हुई चोरी के अन्य मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है। पुलिस टीम अब इन चोरों के पूरे नेटवर्क को तोड़ने और उनके अन्य साथियों को पकड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
दमोह पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल पथरिया के जैन मंदिर में हुई चोरी का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि एक ऐसे अंतर्राज्यीय चोर गिरोह पर भी लगाम कसी गई है जो लगातार देश के विभिन्न राज्यों में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर वारदातों को अंजाम दे रहा था। इस गिरफ्तारी से धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी एक सकारात्मक संदेश गया है। पुलिस का मानना है कि इन चोरों की गिरफ्तारी से कई और अनसुलझे मामलों की गुत्थी भी सुलझ सकती है।
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