Monsoon Plants: मानसून के समय ग्रहों के मुताबिक लगाएं ये शुभ पौधे, चमकेगी आपकी किस्मत!
मानसून का मौसम पौधारोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इस दौरान मिट्टी में नमी पर्याप्त होती है और पौधों की वृद्धि भी तेजी से होती है। यही कारण है कि कई लोग इस मौसम में वृक्षारोपण करते हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में भी पेड़-पौधों को विशेष महत्व दिया गया है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विभिन्न ग्रहों का संबंध अलग-अलग प्रकार के वृक्षों और पौधों से माना जाता है। मान्यता है कि संबंधित पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने से सकारात्मक प्रभाव प्राप्त हो सकते हैं।
सूर्य ग्रह के लिए
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रह से जुड़े लोगों के लिए पीपल, बरगद और नीम जैसे मजबूत वृक्ष शुभ माने जाते हैं। इन पेड़ों को लगाने से आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होने की मान्यता है।
चंद्रमा ग्रह के लिए
चंद्रमा का संबंध मन और भावनाओं से माना जाता है। ऐसे में पलाश जैसे पौधों को चंद्रमा से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इनकी देखभाल करने से मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
मंगल ग्रह के लिए
मंगल ग्रह से जुड़े उपायों में बबूल और नीम जैसे पौधों का उल्लेख मिलता है। इन्हें ऊर्जा, साहस और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। मानसून के दौरान इन पौधों का रोपण अपेक्षाकृत आसान होता है।
बुध ग्रह के लिए
बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में तुलसी का पौधा बुध ग्रह से जुड़ा माना गया है। घर में तुलसी लगाने और उसकी नियमित सेवा को शुभ माना जाता है।
बृहस्पति ग्रह के लिए
फलदार वृक्षों को बृहस्पति ग्रह से जोड़ा जाता है। आम, अमरूद या अन्य फलदार पौधे लगाने को ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मकता से संबंधित माना गया है।
शुक्र ग्रह के लिए
शुक्र ग्रह का संबंध सौंदर्य, कला और आकर्षण से माना जाता है। इसलिए फूल देने वाले पौधे और वृक्ष लगाना शुभ माना जाता है। गुलाब, चमेली और अन्य पुष्पीय पौधे इस श्रेणी में शामिल किए जाते हैं।
शनि ग्रह के लिए
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शमी का पौधा शनि ग्रह से संबंधित माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में शमी वृक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। इसकी नियमित देखभाल को धैर्य, स्थिरता और सकारात्मक सोच से जोड़ा जाता है।
महत्वपूर्ण नोट पेड़-पौधों और ग्रहों के बीच संबंध धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन मान्यताओं को व्यक्तिगत आस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
26 जुलाई का रवि प्रदोष व्रत क्यों है खास? जानें पूजा का शुभ समय, महत्व और शिव कृपा पाने की आसान विधि
Ravi Pradosh Vrat 2026: भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जुलाई महीने का दूसरा प्रदोष व्रत रविवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है।
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। इस बार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला रवि प्रदोष व्रत 26 जुलाई 2026, रविवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में शिव पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।
रवि प्रदोष व्रत 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई को दोपहर 1:57 बजे शुरू होगी और 27 जुलाई को शाम 4:14 बजे समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष पूजा सूर्यास्त के समय की जाती है, इसलिए व्रत और पूजा 26 जुलाई को ही की जाएगी।
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पूजा का शुभ समय शाम 7:16 बजे से रात 9:21 बजे तक रहेगा। यह अवधि लगभग 2 घंटे 5 मिनट की होगी। धार्मिक मान्यता है कि सूर्यास्त के आसपास का समय भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
रवि प्रदोष व्रत का महत्व
मान्यताओं के अनुसार रवि प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन पारिवारिक सुख, मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में सकारात्मकता की कामना से व्रत रखते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं में भी रविवार को आने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन की गई शिव आराधना व्यक्ति के आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि का माध्यम बन सकती है।
रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान और घर की साफ-सफाई करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें।
- व्रत का संकल्प लेकर धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।
- शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
- शिव चालीसा, शिव स्तुति या मंत्रों का पाठ करें।
- प्रदोष व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
- भगवान को भोग अर्पित करें।
- अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।
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