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Meta Trial US Child Safety | सेक्स्टॉर्शन, साइबरबुलिंग और शोषण... अमेरिका में मेटा पर शुरू हुआ ऐतिहासिक ट्रायल, युवाओं को निशाना बनाने का सनसनीखेज आरोप!

टेक जायंट मेटा (Meta) को एक बार फिर बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के गंभीर आरोपों के बीच बड़े कानूनी संकट का सामना करना पड़ रहा है। कैलिफ़ोर्निया की फ़ेडरल कोर्ट में मंगलवार को एक ऐतिहासिक ट्रायल शुरू हुआ, जिसमें अमेरिका के चार बड़े राज्य—कैलिफ़ोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी—मेटा से अरबों डॉलर का मुआवज़ा और कंपनी के कामकाज में बुनियादी बदलावों की मांग कर रहे हैं। अदालत के बाहर दर्जनों माता-पिता और पीड़ित परिवारों के लोग उन बच्चों के पोस्टरों के साथ एकत्र हुए, जिन्होंने सोशल मीडिया पर सेक्स्टॉर्शन, शोषण और साइबरबुलिंग के कारण आत्महत्या कर ली। करीब 600 पीड़ित बच्चों के नामों में 11 साल का जियोवानी, 13 साल का बुब्बा और 14 साल का एंग्लिन भी शामिल थे।
 

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मेटा पर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य संकट को बढ़ाने का आरोप है
कैलिफ़ोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस की डिप्टी अटॉर्नी जनरल मेगन ओ'नील ने अपनी शुरुआती बात में कहा कि यह तय करना जूरी का काम है कि क्या राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने यह साबित कर दिया है कि इस टेक कंपनी ने अपने ऐप्स को इस तरह से डिज़ाइन किया था कि "यूज़र्स को लत लग जाए, उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा समय तक जोड़े रखा जाए, उनका डेटा इकट्ठा किया जाए और जनता से सच्चाई छिपाई जाए।"

चार राज्य - कैलिफ़ोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी - अभी इस ट्रायल में शामिल हो रहे हैं, बाकी 25 राज्य बाद में शामिल होंगे। न्यूज़ एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को राज्य की अदालतों में भी मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें टेनेसी में चल रहा एक मामला भी शामिल है।
 

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मेटा पर आरोप है कि उसने जानबूझकर ऐसे फ़ीचर्स बनाए जिनसे बच्चे उसके प्लेटफ़ॉर्म के आदी हो जाते हैं और इन नुकसानों को जनता से छिपाया जाता है। मुकदमे में यह भी तर्क दिया गया कि मेटा फ़ेडरल कानून का उल्लंघन करते हुए, माता-पिता की सहमति के बिना 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा इकट्ठा करती है। डिप्टी अटॉर्नी जनरल के अनुसार, "आप सुनेंगे कि मेटा बच्चों के दिमाग के बारे में बहुत कुछ जानता था। इसमें यह भी शामिल है कि वे लगातार इनाम कैसे चाहते हैं, वे सोशल फीडबैक के प्रति कितने संवेदनशील होते हैं और 'वे अभी भी अपनी भावनाओं पर काबू पाने की क्षमता विकसित कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे वयस्क करते हैं।'"

उन्होंने जूरी सदस्यों से कहा, "'द यंग वन्स आर द बेस्ट वन्स' (युवा ही सबसे अच्छे होते हैं) मेटा की एक स्टडी का शीर्षक है जो हम आपको दिखाने जा रहे हैं," और बताया कि मेटा के लिए "बच्चे ही प्रोडक्ट हैं।"

मेटा को यह भी पता था कि 13 साल से कम उम्र के बच्चे उसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे थे। अटॉर्नी जनरल ने कहा, "उदाहरण के लिए, जब मेटा को पता चलता था कि फेसबुक पर कोई व्यक्ति 13 साल से कम उम्र का है, तो वह उस व्यक्ति का फेसबुक अकाउंट तो बंद कर देता था, लेकिन इंस्टाग्राम पर उससे जुड़ा अकाउंट बंद नहीं करता था।"

राज्यों ने अपने पहले गवाह के तौर पर आर्टुरो बेजार को बुलाया, जिन्होंने साइबर बुलिंग से निपटने के अपने कार्यकाल के दौरान काफी ध्यान आकर्षित किया था। वे 2019 से 2021 तक सुरक्षा मुद्दों पर काम करने के लिए कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर लौटे थे। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, बेजार ने कहा कि मेटा के बयानों के विपरीत, सुरक्षा मुद्दों पर कंपनी की रिसर्च का इस्तेमाल प्रोडक्ट्स को बेहतर बनाने के लिए नहीं किया जा रहा था।

मेटा ने ऐप्स के अनधिकृत इस्तेमाल के लिए बच्चों को जिम्मेदार ठहराया
इस बीच, मेटा के वकील पॉल श्मिट ने अपनी शुरुआती बात में बच्चों और ऐप्स के उनके अनधिकृत इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि हालांकि 13 साल से कम उम्र के बच्चों को इसके ऐप्स पर नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ बच्चे अपनी उम्र के बारे में झूठ बोलते हैं और फेसबुक और इंस्टाग्राम पर "नकारात्मक कंटेंट" पोस्ट करते हैं।

लेकिन उन्होंने कहा कि वे मेटा द्वारा अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने और जनता के साथ जानकारी साझा करने के काम पर ध्यान केंद्रित करेंगे। श्मिट ने कहा, "इस मुकदमे का एक बड़ा हिस्सा सरकारी वकीलों और उनके गवाहों के इस कहने के बारे में है कि सुधार की कोशिश में, हम इसे थोड़ा अलग तरीके से करते।"

उन्होंने कहा, "सुधार कैसे किया जाए, इस बारे में बात करते समय, हम इस बात से असहमत हैं कि आप इसके बारे में कैसे बात करते हैं। यह महत्वपूर्ण है, और सबूत भी महत्वपूर्ण होंगे - सुधार के लिए मेटा द्वारा की गई ये कोशिशें।"

ओकलैंड में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज यवोन गोंजालेज रोजर्स कार्यवाही की देखरेख कर रही हैं, जिसके छह सप्ताह तक चलने की उम्मीद है। इसमें मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और अन्य अधिकारियों व पूर्व कर्मचारियों की गवाही शामिल होगी।
 
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खजराना गणेश मंदिर में रिकॉर्ड दान, 40 दानपेटियों से निकले 1.81 करोड़, अब बनेगा स्पेशल काउंटिंग हॉल

इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में इस बार दान का ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जिसने मंदिर प्रबंधन को भी हैरान कर दिया। मंदिर की 40 दानपेटियों को खोला गया तो उनमें से कुल 1 करोड़ 81 लाख 12 हजार 50 रुपए निकले। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह अब तक की सबसे बड़ी दान राशि है। खास बात यह है कि पिछली बार के मुकाबले इस बार दान में करीब 47 लाख रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और आस्था के साथ मंदिर में दान का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। पिछले दो साल में सात बार दानपेटियां खोली गईं और उनसे 11 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि प्राप्त हुई। इसके अलावा लोग ऑनलाइन माध्यम से भी मंदिर में दान कर रहे हैं। अब दान की बड़ी रकम को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से गिनने के लिए मंदिर परिसर में नया स्पेशल काउंटिंग हॉल बनाने की तैयारी है।

पहली बार 1.81 करोड़ से ज्यादा का दान

खजराना गणेश मंदिर में इस बार 40 दानपेटियों की गिनती की गई। गिनती पूरी होने के बाद कुल राशि 1,81,12,050 रुपए सामने आई। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह मंदिर में एक बार की गिनती में मिलने वाली अब तक की सबसे बड़ी राशि है।

इससे पहले मार्च में दानपेटियों की गिनती हुई थी। उस समय मंदिर को 1 करोड़ 33 लाख 67 हजार 724 रुपए मिले थे। यानी इस बार मार्च की तुलना में करीब 47.44 लाख रुपए ज्यादा राशि प्राप्त हुई है।

पांच महीने में दान में 35 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी

इस बार मिली राशि को पिछली गिनती से जोड़कर देखा जाए तो करीब 35.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी सामने आती है। पांच महीने के अंतर में दान राशि का इतना बढ़ना मंदिर प्रबंधन के लिए खास बात है।

खजराना गणेश मंदिर इंदौर ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के प्रमुख गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां आम दिनों के अलावा त्योहारों और विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे समय में मंदिर की दानपेटियों में भी बड़ी मात्रा में राशि जमा होती है।

दानपेटियों में आने वाली रकम में नोटों के साथ सिक्के भी शामिल होते हैं। अलग-अलग दानपेटियों से रकम निकालने के बाद उसे व्यवस्थित तरीके से गिना जाता है। बड़ी राशि होने के कारण इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय और कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

दो साल में 7 बार खोली गईं दानपेटियां

खजराना गणेश मंदिर में पिछले दो वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दान का आंकड़ा लगातार बड़ा रहा है। इस अवधि में 7 बार दानपेटियां खोली गईं। इन सभी गिनतियों से मंदिर को कुल 11 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि प्राप्त हुई है।

अब मंदिर में बनेगा स्पेशल काउंटिंग हॉल

दान की बढ़ती राशि को देखते हुए मंदिर प्रबंधन अब एक नया स्पेशल काउंटिंग हॉल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दानपेटियों से निकली राशि की गिनती को सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

अभी बड़ी संख्या में दानपेटियों की रकम गिनने में कर्मचारियों को काफी समय लग सकता है। एक अलग हॉल बनने के बाद दान की रकम को एक ही स्थान पर लाकर गिना जा सकेगा। इससे पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखना भी आसान होगा।

ऑनलाइन दान में भी बढ़ा लोगों का भरोसा

अब मंदिर में सिर्फ दानपेटियों के जरिए ही पैसा नहीं पहुंच रहा है। श्रद्धालु डिजिटल माध्यम से भी दान कर रहे हैं। पिछले 12 महीनों में खजराना गणेश मंदिर को करीब 75 लाख रुपए का ऑनलाइन दान मिला है।

आज के समय में लोग नकद राशि रखने के बजाय मोबाइल और ऑनलाइन माध्यमों से भुगतान करना ज्यादा आसान समझते हैं। मंदिर में भी इसका असर दिखाई दे रहा है।

ऑनलाइन दान की सुविधा से उन श्रद्धालुओं के लिए भी मंदिर में योगदान देना आसान हो गया है, जो इंदौर से दूर रहते हैं और किसी कारण मंदिर नहीं आ सकते। वे घर बैठे डिजिटल माध्यम से अपनी श्रद्धा के अनुसार दान कर सकते हैं।

रिकॉर्ड दान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी भी

खजराना गणेश मंदिर में 1.81 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड दान मिलना निश्चित तौर पर बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। इतनी बड़ी राशि की गिनती, रिकॉर्ड, सुरक्षा और उपयोग सभी काम तय नियमों के अनुसार होना जरूरी है।

इसी कारण स्पेशल काउंटिंग हॉल की योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि दान की गिनती के लिए अलग और सुरक्षित स्थान उपलब्ध होता है तो कर्मचारियों के लिए काम आसान होगा और पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से रिकॉर्ड किया जा सकेगा।

मार्च की गिनती से कितना बदला आंकड़ा?

अगर इस बार और पिछली गिनती के आंकड़ों को सामने रखकर देखें तो अंतर काफी बड़ा है। मार्च में मंदिर की दानपेटियों से 1,33,67,724 रुपए मिले थे। इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 1,81,12,050 रुपए हो गया। यानी करीब 47 लाख 44 हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई।

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