Financial Rule: दिखावे पर नहीं, जिंदगी पर खर्च! कपल ने बताए पैसे बचाने और बढ़ाने के 5 नियम
आज के समय में जहां कई लोग दिखावे और लग्जरी चीजों पर खर्च करते हैं, वहीं बेंगलुरु के एक कपल ने पैसों को लेकर अलग सोच साझा की है। उनका मानना है कि असली खुशी महंगी चीजों में नहीं, बल्कि सही जगह खर्च करने में है। उन्होंने अपने 5 फाइनेंशियल रूल्स बताए हैं
Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी कब की है? जानें इस व्रत के नियम और पारण का मुहूर्त
Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी को अत्यंत पवित्र माना जाता है. एकादशी का दिन भगवाव विष्णु को समर्पित होता है. भगवान विष्णु इस दिन प्रसन्न रहते हैं इसलिए, जो भी जातक उनकी एकादशी पर पूजा करते हैं, उन्हें उनका आशीर्वाद मिलता है. आषाढ़ के महीने में देवशयनी एकादशी आती है. ये एकादशी तिथि सभी एकादशियों में सबसे खास मानी जाती है क्योंकि इस दिन से अगले चार महीनों के लिए देवता शयन मुद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान वे क्षीरसागर में योग निद्रा में रहते हैं. इस दिन चातुर्मास भी लग जाता है. यानि पूरे चार महीने मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे. आइए जानते हैं इस साल देवशयनी एकादशी किस दिन मनाई जाएगी. नोट करें तिथि और शुभ मुहूर्त के साथ पारण का समय.
देवशयनी एकादशी 2026 कब की है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है. वे जगत के पालनहारे हैं. इसलिए, इस दिन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जो भक्त सच्चे मन से इस दिन पूजा करते हैं, उन्हें भगवान का आशीर्वाद मिलता है. एकादशी तिथि का प्रारंभ 24 जुलाई को सुबह 10 बजकर 9 मिनट से होगा और एकादशी तिथि का समापन 25 जुलाई सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर होगा. ऐसे में एकादशी का व्रत 25 जुलाई, शनिवार को रखा जाएगा.
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देवशयनी एकादशी 2026 व्रत पारण
देवशयनी एकादशी व्रत का पारण 26 जुलाई 2026 को द्वादशी तिथि पर होगा. सूर्योदय के बाद ही पारण किया जाता है. मगर हरिवासर के समाप्त होने के बाद ही पारण करना ताहिए. इसका मुहूर्त सुबह 5:39 से 8:22 मिनट तक रहेगा. इस एकादशी को हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं.
देवशयनी एकादशी व्रत के नियम
1.सूर्योदय से पूर्व उठे और व्रत संकल्प- देवशयनी एकादशी के दिन आपको सूर्योदय से पहले उठना चाहिए. इसके बाद स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें. शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान को खास माना है.
2.विष्णु और लक्ष्मी की पूजा- भगवान विष्णु पर एकादशी के दिन पीले फूल, पीले फल, पंचामृत और नैवेद्य तथा तुलसी दल अर्पित करें. माता लक्ष्मी की भी विधि-विधान से पूजा करें.
3.द्वादशाक्षरी मंत्र का जाप करें- एकादशी व्रत के दिन व्रतीयों को श्रीहरि की पूजा करनी चाहिए. इस दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए. वैष्णव परंपरा में इसे भगवान विष्णु के प्रमुख उपासना मंत्रों से से एक माना जाता है.
4.सात्विक भोजन- अगर आप निर्जल या निराहर व्रत रख रहे हैं तो ध्यान रहें कि आपको सात्विकता का पूरा ध्यान रखना है. दशमी तिथि से ही सात्विकता अपनाएं. आप अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखें और फलाहार करें. किसी भी व्रत का उद्देश्य सिर्फ भोजन का त्याग करना नहीं है बल्कि अपने मन और इंद्रियों को नियंत्रित रखना होता है.
5.दान-पुण्य- देवशयनी एकादशी पर आपको गरीबों तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना चाहिए. एकादशी व्रत में सेवा और दया का खास महत्व बताया गया है.
देवशयनी एकादशी व्रत के उपाय
विष्णु पुराण का पाठ करें- इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आपको विष्णु पुराण का पाठ जरूर करना चाहिए.
लक्ष्मी मां के मंत्रों का जाप करें- माता लक्ष्मी की पूजा करना भी एकादशी पर खास माना जाता है. इस दिन आप "ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः" मंत्र का जाप कर सकते हैं.
दीया जलाएं- एकादशी वाले दिन में संध्याकाल पर आपको तुलसी और घर के मंदिर में देसी घी का दीया अवश्य जलाना चाहिए.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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