छात्रों पर लाठीचार्ज, बॉलीवुड दिग्गजों ने उठाई आवाज:अनुपम खेर बोले- ये बर्ताव नहीं होना चाहिए; रत्ना-सीमा, राजकुमार राव भी समर्थन में आए
दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद बॉलीवुड की कई हस्तियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अनुपम खेर, रत्ना पाठक शाह, सीमा पाहवा और राजकुमार राव ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। एक्टर अनुपम खेर ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को सबसे निष्पक्ष और ईमानदार बताया, साथ ही उन्हें बाहरी राजनीतिक दलों के एजेंडे से सावधान रहने की हिदायत दी। वहीं, रत्ना पाठक शाह ने मौजूदा स्थिति की तुलना पौराणिक कथा के द्रोणाचार्य से की और सीमा पाहवा ने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े कलाकारों की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। अनुपम खेर बोले- 'छात्रों का प्रदर्शन सबसे ईमानदार एक्टर अनुपम खेर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर कर जंतर-मंतर पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज पर दुख जताया। छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शैक्षणिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। अनुपम खेर ने कहा, "छात्रों, प्रदर्शन के वीडियो देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। जब छात्र सिर्फ अपनी मांग रखना चाहते हैं, तो उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए। मैं भी कभी छात्र था और अधिकारियों से सवाल पूछता था। इसलिए आपकी बेचैनी, गुस्सा और भविष्य की उम्मीदों को अच्छे से समझता हूं। छात्र प्रदर्शन सबसे ईमानदार प्रदर्शन होता है, क्योंकि वे सिर्फ अपने भविष्य, अधिकार और देश के सुधार के लिए चिंतित होते हैं। मैं दिल से आपका समर्थन करता हूं।" राजनीतिक हस्तक्षेप पर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, "एक बड़े भाई के नाते कहना चाहता हूं कि जब आपके प्रदर्शन में बाहरी राजनीतिक दल शामिल होने लगते हैं, तो सावधान रहें। उनका मकसद आपका मुद्दा आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि अपना स्वार्थ पूरा करना होता है। शुरुआत में लगता है कि ज्यादा लोग आने से प्रदर्शन मजबूत होगा, लेकिन ये लोग आपकी आवाज का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए करने लगते हैं। बाद में मुद्दा आपका नहीं रहता, वे कैमरे और नारे अपने साथ ले जाते हैं। इससे आपकी सच्चाई को नुकसान पहुंचता है। अपना विरोध खुद का रखें, किसी को अपनी आवाज का गलत इस्तेमाल न करने दें।" रत्ना शाह बोलीं- छात्रों का भविष्य दांव पर लगा रहे' एक्टर नसीरुद्दीन शाह के समर्थन के बाद उनकी पत्नी और सीनियर एक्ट्रेस रत्ना पाठक शाह ने भी इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी किया। उन्होंने महाभारत के एकलव्य प्रसंग का जिक्र करते हुए व्यवस्था पर निशाना साधा। रत्ना पाठक शाह ने कहा, "मुझे हमेशा से एकलव्य की कहानी गलत लगती थी कि गुरु द्रोणाचार्य ने अंगूठा मांगकर उसका पूरा भविष्य दांव पर लगा दिया। अब समझ आ रहा है कि वे किस तरह के गुरु थे। हम विश्वगुरु बनने की बात करते हैं, लेकिन अपने छात्रों से संवाद तक नहीं बना पा रहे। हम चाहते हैं कि छात्र अपना पूरा भविष्य इसलिए कुर्बान कर दें ताकि कुछ लोग अपनी राजनीतिक सत्ता बचा सकें? ये किस तरह के गुरु हैं?" अपनी पीढ़ी की तरफ से माफी मांगते हुए उन्होंने कहा, "हम देख रहे थे कि क्या गलत हो रहा है, लेकिन सही समय पर सही तरीके से उसे रोक नहीं पाए। इसलिए हमने आपको मार्गदर्शन देने का अधिकार खो दिया है। लेकिन हमारे पास आपका समर्थन करने का संकल्प है। हमें बुलाइए, हम आपके साथ हैं।" सीमा पाहवा ने कहा- 'चूहों की तरह छिपे हैं बड़े स्टार्स' एक्ट्रेस सीमा पाहवा ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो शेयर कर इंडस्ट्री के बड़े कलाकारों की चुप्पी पर नाराजगी जताई। उन्होंने सीजेपी (CJP) को टैग करते हुए कहा, "मैं इन बच्चों, इनके परिवारों और देश के साथ हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे रुकेगा, क्योंकि इंसानियत खत्म हो चुकी है। इतने सारे लोग अब भी चुप हैं, यह बहुत शर्मनाक है। क्या आपको लगता है कि सरकार खिलाफ हो जाएगी तो काम या पद चला जाएगा? अपनी इंसानियत जगाइए। रोते, तड़पते और पिटते बच्चों को देखिए। क्या आप इसलिए घरों में दुबके हैं ताकि आपके अवॉर्ड्स न रुकें? क्या आप सब कायर हैं? शर्म आनी चाहिए! बाहर निकलिए और छात्रों का साथ दीजिए।" सीमा पाहवा ने जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ सड़क पर उतरीं 75 वर्षीय सीनियर एक्ट्रेस शबाना आजमी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, "मैं उस महिला की बड़ी प्रशंसक बन गई हूं जो इस उम्र में वहां मार्च कर रही हैं। अगर मुझे अपनी व्यक्तिगत समस्या न होती, तो मैं भागकर जाती और बच्चों के साथ लाठीचार्ज झेलती।" राजकुमार राव की अपील- 'बातचीत से निकलेगा समाधान' एक्टर राजकुमार राव ने भी सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए शांतिपूर्ण बातचीत पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, "जब युवा महसूस करते हैं कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही, तो यह समाज के लिए याद दिलाने वाली बात है कि उसे सुनना चाहिए। हर आवाज को गरिमा, निष्पक्षता और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। साथ ही, शांति ही हमारी सबसे बड़ी ताकत होनी चाहिए। हिंसा केवल जख्मों को गहरा करती है और समाधान से दूर ले जाती है। यह बातचीत और सहानुभूति का समय है।" उन्होंने आगे कहा, "छात्रों को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए और अधिकारियों को सहानुभूति व खुलेपन के साथ सुनना चाहिए। असली और स्थायी बदलाव टकराव से नहीं, बातचीत से आता है। हम सभी देश का विकास चाहते हैं और उसकी नींव निष्पक्ष शिक्षा है।" क्या है जंतर-मंतर प्रदर्शन का पूरा मामला देशभर में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के पेपर लीक होने की घटनाओं के बाद से छात्रों का आक्रोश बढ़ा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मुख्य मांग नीट परीक्षा में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में कड़े सुधार लागू करना है। सोमवार को संसद घेराव के लिए निकले छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसके बाद से यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
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