ज्योतिष में ग्रहों के गोचर परिवर्तन विशेष माना जाता है। शनि का गोचर होना बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। अगस्त में कर्मफल दाता शनि देव का नक्षत्र परिवर्तन प्रभावशाली माना जा रहा है। अभी इस समय शनि मीन राशि में विराजमान हैं और यहां रहते हुए वह अन्य ग्रहों से युति बना रहे हैं।
दरअसल, 20 अगस्त 2026 को न्याय देवता शनि रेवती नक्षत्र में गोचर करने जा रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार, रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं और इन्हें ग्रहों के राजकुमार कहा जाता है। वाणी, व्यापार, सफलता और संवाद का कारक बुध ग्रह है। इनका शुभ असर जातकों के मान-सम्मान में वृद्धि और मनचाही सफलता के योग बनाता है।
ऐसे में शनि का बुध नक्षत्र में प्रवेश करना कुछ राशियों के लिए कल्याणकारी रहने वाला है। इस दौरान व्यक्ति को मुनाफा, यात्रा और खुशखबरी की प्राप्ति संभव है। इसके साथ ही लंबे समय रुके हुए कार्य कुछ कामों में गति प्राप्त हो सकती है। आइए आपको इन लकी राशियों के बारे में बताते हैं-
सिंह राशि
सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय किस्मत चमकाने वाला रहेगा। कोई बड़ा लाभ हो सकता है और लगातार मेहनत से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना मानी जाती है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और करियर से जुड़े नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आर्थिक मामलों में स्थिति बेहतर रहने वाली है। करियर के मामले में कोई अच्छी खबर सुनकर आप खुश रहेंगे। बिजनेस में लंबे समय के इंतजार के बाद आगे बढ़ने का संकेत नजर आएंगे।
मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए सभी अटके काम मनचाहे तरीकों से पूरे हो सकते हैं। नौकरी में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर प्राप्त होगा। घर-परिवार में आपकी किसी उपलब्धि से खुशी का माहौल बन सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और प्रयासों की तारीफें हो सकती हैं। वहीं, प्रेम संबंध मामलों में गलतफहमियां दूर हो सकती हैं और रिश्तों में पहले से अधिक मधुरता बनीं रहेगी।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों को सफलता मिलेगी और कोई अच्छी खबर मिल सकती है। समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी और मान-सम्मान में भी वृद्धि होगी। प्रेम संबंधों में सकारात्मक बदलाव आएंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहने वाला है और बिजनेस में लाभ देखने को मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत रहने वाली और मेहनत रंग लाने वाली है।
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आज यानी हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त, शनिवार को मनाया जा रहा है। तीज के दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाह जीवनसाथी पाने की इच्छा में तीज का व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ने वाला यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन से जुड़ा है। माना जाता है कि श्रद्धा भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। जो महिलाएं पहली बार व्रत रखने वाली हैं उनके लिए पूजा की सही विधि जरुर जानें।
हरियाली तीज व्रत की विधि
- हरियाली तीज व्रत वाले दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा की तैयारी करें और मन में व्रत का संकल्प लें।
- तीज के मौके पर मायके से बेटी के लिए सिंधारा भेजने की परंपरा है। इसमें चूड़ियां, मिठाई, मेहंदी और श्रृंगार से संबंधित चीजें शामिल होती हैं। माना जाता है कि, इस दिन मायके से आए वस्त्र धारण करना बेहद शुभ होता है। हरे रंग को हरियाली और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस त्योहार के दिन हरे रंग की साड़ी या परिधान पहनने की परंपरा है।
- तीज के अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। इसको वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जोड़ा गया है।
- फिर शुभ मुहूर्त में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है। वहीं भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।
- इसके बाद हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। असल में कई परिवारों में महिलाएं अपनी सास को वस्त्र और सुहाग सामग्री भेंट कर उनका आशीर्वाद लेती हैं।
- हरियाली तीज पर महिलाएं गीत-संगीत के साथ सामूहिक रुप से पर्व मनाती हैं। झूला झूलने और हाथों में मेहंदी लगाने की भी परंपरा है। वहीं, व्रत का पारण अपनी पारिवारिक पंरपरा और मान्यता के अनुसार की जाती है।
हरियाली तीज व्रत के नियम
- इस दिन हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनना काफी शुभ माना जाता है। भूलकर भी काले सफेद या भूरे रंग के कपड़े न पहनें।
- व्रत के दौरान पानी या दूध का सेवन न करने की परंपरा भी प्रचलित है।
- इस बात का ध्यान रखें कि पूजा में वही सामग्री का इस्तेमाल करें, जो मायके से प्राप्त हुई हो।
- व्रत का पारण शुभ मुहूर्त से पहले न करें।
- व्रत वाले दिन महिलाओं को किसी भी प्रकार का विवाद और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए।
- मान्यता के अनुसार, इस रात जागरण कर भजन-कीर्तन के जरिए शिव-पार्वती की आराधना करना चाहिए।
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