कॉकरोचों पर पुलिस एक्शन के खिलाफ SC में सुनवाई नहीं:चीफ जस्टिस सूर्यकांत बोले- हमारा समय बर्बाद न करें, वीडियो देखने का वक्त नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम वीडियो नहीं देखना चाहते। याचिकाकर्ता ने कहा था कि पुलिस की कथित बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई गुरुवार को कराई जाए, क्योंकि छात्र अभी भी प्रभावित हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च निकाला था। इस दौरान हजारों प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़े थे, इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसमें 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी और छात्रों को चोटें आई थीं। खबर अपडेट की जा रही है...
छात्रों के समर्थन में हरियाणा कांग्रेस का प्रोटेस्ट:3 जिलों में धरना देकर बैठे, BJP सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए; स्टूडेंट्स यूनियन का भी पैदल मार्च
कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विराधे में हरियाणा कांग्रेस ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पंचकूला, करनाल और यमुनानगर में कांग्रेसी धरने पर बैठ गए है। कई स्टूडेंट यूनियन और सामाजिक संगठनों ने भी छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरने का ऐलान किया है। फतेहाबाद में विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने पैदल मार्च निकाला और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उधर, कांग्रेसियों और छात्र संगठनों के इस ऐलान को देखते हुए सभी जिलों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। डीसी कार्यालयों पर भी भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई है। कार्यकर्ताओं और छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने सभी जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों को पत्र जारी कर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित करने और महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने के निर्देश दिए हैं। पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दिल्ली घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है। कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। पत्र में जिला अध्यक्षों से कहा गया है कि धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं, छात्रों और युवाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाए, ताकि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकें।
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