हजारों साल पुराना ‘ममी मास्क’, सिर पर लगे इंसानी बाल, स्माइल देखकर रात को नींद नहीं आएगी
पुरातत्वविदों को लगभग 1,000 साल पुराना एक दुर्लभ 'ममी मास्क' मिला है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं. लकड़ी से बने इस 'नकली सिर' का इस्तेमाल ममी बंडल के ऊपर लगाने के लिए किया जाता था. ये पूर्वजों को याद करने का एक जरिया था, जिस पर असली इंसानी बालों से बनी विग लगाई जाती थी. लैब जांच में खुलासा हुआ है कि इस मास्क को पेंट करने के लिए पारे से बने जहरीले लाल पिगमेंट 'सिनाबार' का इस्तेमाल किया गया था, जो प्राचीन एंडियन सभ्यता में पवित्रता और अमरता का प्रतीक माना जाता था.
रांची समेत पूरे झारखंड में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर 10% अतिरिक्त सरचार्ज, जानिए आपकी जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ
Jharkhand Property Rate: अगर आप झारखंड के किसी भी शहरी इलाके में, खासकर राजधानी रांची में अपने लिए जमीन, मकान या फ्लैट खरीदने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपके बजट को सीधे प्रभावित कर सकती है. राज्य सरकार ने संपत्ति की खरीदारी को लेकर एक बड़ा फैसला लागू कर दिया है. सरकार की ओर से झारखंड नगरपालिका भूमि एवं भवन स्थानांतरण अधिभार नियमावली जारी कर दी गई है. इस नई व्यवस्था के प्रभावी होते ही शहरी क्षेत्रों में किसी भी तरह की अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराना पहले के मुकाबले काफी अधिक महंगा हो गया है. अब जब भी आप किसी जमीन या मकान की खरीद-बिक्री के बाद उसे अपने नाम दर्ज कराने रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचेंगे, तो आपको निर्धारित शुल्क के साथ अतिरिक्त रकम भी चुकानी होगी.
खरीदारों पर बढ़ा वित्तीय बोझ
नए नियमों के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव सरचार्ज के रूप में सामने आया है. अब शहरी सीमा के भीतर आने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने पर खरीदारों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा. अब तक लोग सरकार द्वारा तय किए गए सामान्य कर और रजिस्ट्री शुल्क का भुगतान करके संपत्ति अपने नाम करा लेते थे. हालांकि, इस नए फैसले से उन लोगों का बजट बिगड़ गया है जो काफी समय से बचत करके अपना आशियाना बनाने की तैयारी में जुटे थे. मध्यम वर्ग और छोटे कारोबार करने वाले परिवारों का मानना है कि पहले से ही मार्केट में जमीन और इमारतों की कीमतें काफी ऊंची चल रही हैं. ऐसे में 10 फीसदी का यह नया वित्तीय बोझ आम लोगों की उम्मीदों और बजट पर काफी भारी पड़ने वाला है.
जानिए सरकार ने क्यों लिया यह फैसला
इस नए फैसले के पीछे सरकार ने अपना तर्क भी साफ कर दिया है. सरकार का कहना है कि रजिस्ट्री के वक्त वसूले जाने वाले इस 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज का सीधा फायदा राज्य के शहरी क्षेत्रों को ही मिलेगा. इस अधिभार से जो भी राजस्व जमा होगा, वह राशि संबंधित नगर निकायों को हस्तांतरित कर दी जाएगी. नगर निगम और नगर परिषद इस फंड का इस्तेमाल अपने-अपने इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करेंगे. इसमें मोहल्लों की सड़कें, पक्की नालियां, स्ट्रीट लाइटें, साफ पेयजल की आपूर्ति और स्वच्छता जैसे जरूरी विकास कार्य शामिल हैं. सरकार का मानना है कि इस कदम से स्थानीय निकायों की कमाई बढ़ेगी, जिससे शहरों का विकास तेजी से हो सकेगा.
रांची समेत पूरे राज्य में फैसले का असर
इस नई नियमावली के लागू होते ही रांची समेत राज्य के तमाम छोटे-बड़े शहरों में हलचल तेज हो गई है. रांची रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे कई लोगों का कहना है कि सरकार के इस कदम से आम आदमी के लिए शहर में खुद की संपत्ति जुटाना बेहद कठिन हो जाएगा. कई खरीदारों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं का विकास होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए आम खरीदार पर एक साथ इतना बड़ा बोझ डालना सही नहीं है. शहर में अपना मकान या जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों ने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि इस फैसले पर एक बार फिर से विचार किया जाए और सरचार्ज की दरों में राहत दी जाए ताकि जरूरतमंदों को अपना घर बनाने में सहूलियत मिल सके.
रियल एस्टेट बाजार पर क्या पड़ेगा असर
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब रियल एस्टेट बाजार के रुख पर भी सभी की निगाहें टिक गई हैं. जानकारों का मानना है कि रजिस्ट्री महंगी होने की वजह से फिलहाल कुछ समय के लिए संपत्तियों की खरीद-बिक्री की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है. जो लोग तत्काल फ्लैट या जमीन खरीदने की सोच रहे थे, वे भी अब अपने फैसलों का आकलन नए सिरे से कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि सरकार आम जनता और खरीदारों की मांग पर कोई ढील देती है या फिर यही व्यवस्था आगे भी इसी तरह जारी रहती है. आने वाले दिनों में ही यह साफ हो पाएगा कि इस फैसले से प्रॉपर्टी मार्केट पर कितना बड़ा असर पड़ता है.
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