आयुष दवाओं की गुणवत्ता पर सरकार सख्त, भ्रामक विज्ञापनों पर नजर रखने के लिए 'आयुष सुरक्षा पोर्टल' शुरू
नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। सरकार ने आयुष दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और नियामक अनुपालन को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेची जाने वाली आयुष दवाओं की निगरानी और नियंत्रण से जुड़े नए प्रावधान भी शामिल हैं।
राज्यसभा में आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 में आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के लिए विशेष नियामक प्रावधान मौजूद हैं। इन प्रावधानों के तहत दवाओं के निर्माताओं को बिक्री के लिए उत्पादन करने से पहले निर्धारित लाइसेंसिंग शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ड्रग इंस्पेक्टर नियमित रूप से निर्माण इकाइयों और खुदरा दुकानों से दवाओं के नमूने एकत्र करते हैं और उन्हें गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजते हैं।
यदि कोई नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो संबंधित निर्माता या विक्रेता के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उससे जुड़े नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है।
आयुष दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन में एक विशेष आयुष वर्टिकल भी बनाया गया है।
बयान के अनुसार, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की गुणवत्ता प्रमाणन योजना के तहत तृतीय पक्ष मूल्यांकन के बाद आयुष उत्पादों को आयुष स्टैंडर्ड और आयुष प्रीमियम प्रमाणपत्र प्रदान किए जाते हैं।
आयुष मंत्रालय आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना नामक केंद्रीय क्षेत्र की योजना भी संचालित कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य दवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता आधारित उत्पादन, परीक्षण व्यवस्था, नियामक ढांचे को मजबूत करना, सुरक्षा निगरानी बढ़ाना और भ्रामक विज्ञापनों पर नजर रखना है।
मंत्रालय ने भ्रामक विज्ञापनों और दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों की रियल-टाइम रिपोर्टिंग और निगरानी के लिए आयुष सुरक्षा पोर्टल भी शुरू किया है।
इसके अलावा, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को आयुष दवाओं से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के मामलों में डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी करने के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है।
सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वे केवल उसी स्थिति में आयुष दवाओं की बिक्री की अनुमति दें, जब उपभोक्ता पंजीकृत आयुर्वेद, सिद्ध या यूनानी चिकित्सक द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन अपलोड करे, जहां इसकी आवश्यकता हो।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि उसके अधीन सभी अनुसंधान परिषदें और राष्ट्रीय संस्थान आयुष पद्धतियों और उत्पादों से जुड़ी प्रमाण-आधारित जानकारी को सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों, प्रकाशनों, शोध पत्रिकाओं, जनजागरूकता कार्यक्रमों, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
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एएनडीपीएल ने धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए एआई आधारित प्लेटफॉर्म 'धारावी दीदी' लॉन्च किया, विश्वसनीय जानकारी तक आसान होगी पहुंच
मुंबई, 21 जुलाई (आईएएनएस)। धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) का विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) अदाणी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (एएनडीपीएल) ने मंगलवार को धारावी दीदी नामक 24x7 एआई-संचालित इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। इसका उद्देश्य देश की सबसे बड़ी शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं में से एक से जुड़ी आधिकारिक और सत्यापित जानकारी धारावी के निवासियों तक पहुंचाना है।
कंपनी ने बताया कि जैसे-जैसे पुनर्विकास परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, विश्वसनीय जानकारी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए इस एआई सहायक को शुरू किया गया है।
धारावी के निवासी अक्सर यह जानना चाहते हैं कि क्या उनके घर का सर्वे हो चुका है, वे पुनर्वास के लिए पात्र हैं या नहीं, किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी और नया घर कब मिलेगा।
अब तक लोग इन सवालों के जवाब के लिए अनौपचारिक चर्चाओं और अपुष्ट स्रोतों पर निर्भर रहते थे, जिससे कई बार भ्रम और गलत जानकारी फैलती थी।
वीडियो कॉल, वॉयस कॉल और व्हाट्सऐप के माध्यम से उपलब्ध धारावी दीदी हिंदी, मराठी और अंग्रेजी में तुरंत जवाब देती है।
कंपनी ने कहा कि धारावी की बहुभाषी आबादी को ध्यान में रखते हुए आने वाले महीनों में तमिल, तेलुगु और गुजराती भाषाओं का भी समर्थन जोड़ा जाएगा।
एएनडीपीएल के अनुसार, यह पहल कंपनी के सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) कार्यक्रमों का विस्तार है, जिससे फील्ड विजिट और कार्यालय समय के बाहर भी लोगों तक आधिकारिक जानकारी पहुंचाई जा सकेगी।
एआई सहायक को इस तरह तैयार किया गया है कि परियोजना से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी दिन के किसी भी समय निवासियों को उपलब्ध हो सके।
एएनडीपीएल के एक अधिकारी ने कहा, चाहे निवासी सर्वे, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज या परियोजना से जुड़े अपडेट के बारे में जानकारी लेना चाहें, धारावी दीदी चौबीसों घंटे सरल और बातचीत के अंदाज में स्पष्ट जवाब देने के लिए उपलब्ध है। हमारे सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) कार्यक्रमों के साथ यह एक और कदम है, जिससे हर धारावीवासी तक प्रमाणिक जानकारी आसानी से पहुंच सके। अब लोगों को आधिकारिक जवाब पाने के लिए कार्यालय समय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
कंपनी ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म का इंटरफेस बेहद सरल रखा गया है, ताकि पहली बार डिजिटल माध्यम का उपयोग करने वाले लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
सत्यापित जानकारी तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराकर इसका उद्देश्य निवासियों को पुनर्विकास प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने और हर चरण में अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद करना है।
अधिकारी ने कहा, हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक निवासी को सही और सत्यापित जानकारी सीधे उपलब्ध हो। धारावी दीदी को इस तरह तैयार किया गया है कि वह स्पष्ट जवाब दे, पारदर्शिता के जरिए भरोसा बनाए और पुनर्विकास की पूरी प्रक्रिया के दौरान लोगों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करे।
कंपनी ने बताया कि धारावी दीदी नाम इसलिए चुना गया है क्योंकि यह मंच निवासियों के लिए एक भरोसेमंद मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा। जिस तरह एक बड़ी बहन धैर्यपूर्वक सुनती है और सही मार्गदर्शन देती है, उसी तरह इस एआई सहायक को धारावीवासियों की जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक के दौरान उनका साथ देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
--आईएएनएस
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