चंडीगढ़ में ब्रिक्स टीसीआईएम बैठक शुरू, पारंपरिक चिकित्सा में शोध और क्षमता निर्माण पर रहेगा फोकस
चंडीगढ़, 21 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ में मंगलवार से चार दिवसीय ब्रिक्स टीसीआईएम बैठक का आगाज हो गया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इन महत्वपूर्ण हेल्थ मीटिंग्स में 21 देशों के स्वास्थ्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।
बैठक का मकसद पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने और वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना है। इस बैठक में शामिल ब्राजील और रूस के अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत की।
ब्राजील के विदेश मंत्रालय से जुड़ी राजनयिक कैमिला मैंडेल बैरोस ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, जब ट्रेडिशनल मेडिसिन की बात आती है, तो हमारा फोकस इसके साइंटिफिक बेस, इसकी शुरुआत और प्रैक्टिस को समझने और सही रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने पर होता है। ये उन सवालों और चिंताओं में से हैं जिन्हें लोग अक्सर स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने उठाते हैं। हम लोगों को यह बताने के लिए काम कर रहे हैं कि ये सुरक्षित और असरदार प्रैक्टिस हैं जो हमारे लोगों के लिए एक स्वस्थ्य जीवनशैली को बढ़ावा देती हैं। यह एक जरूरी क्षेत्र है जिसे हमें और मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारी पहले से ही एक करीबी साझेदारी है और हम आने वाले समय में इसे और मजबूत करने की उम्मीद करते हैं। हम ब्राजील में अपने तरीकों को बेहतर बनाने और ट्रेडिशनल मेडिसिन में भारत के अनुभव से सीखने की उम्मीद करते हैं।
बैरोस ने कहा, हम ब्रिक्स सदस्यों के साथ पारंपरिक चिकित्सा पर अपनी अच्छी प्रैक्टिस और जानकारी साझा करने के इस मौके के लिए सच में शुक्रगुजार हैं। यह हमारे लिए एक शानदार मौका है।
इसके अलावा, रूस की प्रसिद्ध क्वांटम भौतिक विज्ञानी ए. मार्चेनकोवा ने कहा, रूस में लोक चिकित्सा के लिए एक कानूनी ढांचा है और रूसी पारंपरिक चिकित्सा की सदियों पुरानी परंपरा है। एपिथेरेपी, हिरुडोथेरेपी, हेल्थ रिसॉर्ट ट्रीटमेंट और प्राकृतिक उपचार संसाधनों के इस्तेमाल जैसी प्रैक्टिस बड़े पैमाने पर अपनाई जाती हैं। रूस में, हम योग और आयुर्वेद जैसी भारतीय पारंपरिक प्रैक्टिस से भी परिचित हैं और इन तरीकों का इस्तेमाल हमारे हेल्थकेयर प्रैक्टिस के हिस्से के तौर पर अलग-अलग मेडिकल सेंटर में किया जाता है।
उन्होंने कहा कि रूस में योग बहुत मशहूर है। इसके साथ ही रशियन मैनुअल थेरेपी टेक्नीक भी काफी चर्चित है।
मार्चेनकोवा ने कहा, मैं ब्रिक्स की पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा पर होने वाली बैठक में एक प्रतिनिधि हूं। मैं भारतीय टीम को उनकी मेहमाननवाजी और इस मीटिंग को इतने अच्छे से आयोजित करने के लिए धन्यवाद देना चाहती हूं।
वहीं, आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, आज हमारे साथ ब्रिक्स देशों के पारंपरिक चिकित्सा के विशेषज्ञ जुड़े हैं। भारत ने अपनी ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) के लिए एक कार्य समूह (वर्किंग ग्रुप) बनाने का प्रस्ताव रखा था और इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई और सहमति बन गई है।
राजेश कोटेचा ने आगे कहा, आज सुबह हुई बैठक में हमने संदर्भ की शर्तों पर चर्चा की, जिसे आगे अंतिम रूप दिया जाएगा। आज पारंपरिक चिकित्सा में क्षमता निर्माण और अनुसंधान पर एक ब्रिक्स साइड इवेंट आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सभी ब्रिक्स देशों की भागीदारी होगी। इस साइड इवेंट के बाद मुख्य ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों का सम्मेलन कल से शुरू होगा।
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Monsoon Care Tips: बारिश के मौसम में बढ़ जाती हैं पेट की बीमारियां, बचने के लिए खाएं ये 5 हेल्दी फूड्स
Monsoon Care Tips: बारिश का मौसम हमें गर्मी से राहत जरूर दिलाता है लेकिन इस दौरान हमें पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. उमस, दूषित पानी, खुले में बिकने वाली खाने-पीने की चीजें और साफ-सफाई की कमी के चलते डायरिया, फूड पॉइजनिंग, गैस, अपच, उल्टी और स्टमक इंफेक्शन हो जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, मानसून में हमारा पाचन तंत्र ज्यादा संवेदनशील हो जाता है, इसलिए खान-पान में थोड़ी सी भी लापरवाही सेहत को बिगाड़ सकती है. इन दिनों देश के लगभग हर राज्य में बारिश और जलभराव जैसी स्थितियां पैदा हो रही हैं. इससे मच्छर और पानी से होने वाली बीमारियों का पनपना लाजमी है. तो चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि मानसून में अपनी डाइट में किन चीजों को शामिल कर हम खुद को इम्यून रख सकते हैं.
बारिश में क्यों बढ़ती हैं पेट की बीमारियां?
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में जब हम दूषित पानी या संक्रमित भोजन का सेवन करते हैं तो उससे पेट के संक्रमण हो सकते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि सड़क किनारे मिलने वाले कटे हुए फल, खुले में तैयार किए गए खाने-पीने की चीजें र्थ और लंबे समय तक रखा हुआ भोजन भी बरसात में खराब होने लगता है. इन्हें खाने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है. इसके अलावा, बारिश के दौरान शारीरिक गतिविधियां कम होने लगती है और लोग मौसम का बहाना देकर ज्यादा तला-भुना भोजन खाने लगते हैं. इससे कब्ज, एसिडिटी और अपच की समस्या भी बढ़ जाती है.
अपनी डाइट में शामिल करें ये 5 हेल्दी फूड्स
1.हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन
मानसून में आपको अपने खाने में खिचड़ी, मूंग दाल, दलिया और हल्की सब्जियों का सेवन करना चाहिए. ये खाद्य पदार्थ पेट पर ज्यादा बोझ नहीं डालते हैं और शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं.
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2.दही और प्रोबायोटिक फूड्स
हालांकि, दही ठंडी होती है इसलिए समय के अनुसार खाने की सलाह दी जाती है. मगर दही में मौजूद गुड बैक्टीरिया हमारी आंतों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. जिन लोगों को दूध या डेयरी उत्पादों से परेशानी होती है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए.
3.फाइबर से भरपूर भोजन
फाइबर हमारी पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. मानसून के दौरान अच्छी तरह धोकर और संभव हो तो पकाकर सब्जियों का सेवन करना बेहतर माना जाता है. फलों को भी साफ पानी से धोकर ही खाएं.
4.पर्याप्त मात्रा में पानी
बरसाती मौसम में प्यास कम लग सकती है, लेकिन हमारे शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. इसलिए, इन दिनों हमेशा साफ और सुरक्षित पानी का ही सेवन करें. जरूरत पड़ने पर पानी को उबालकर या फिल्टर करके पिएं.
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5.अदरक और हल्के मसालों का सेवन करें
अदरक-हल्दी, काली-मिर्च औ लौंग जैसे मसालों का सीमित मात्रा में सेवन करना सही रहेगा. इस मौसम में ये चीजें पाचन में मदद कर सकती है. सर्दी-खांसी से बचाती हैं और इम्यूनिटी को मजबूत करती हैं. हालांकि, ज्यादा तेज मसाले वाली और तैलीय भोजन खाने से बचना चाहिए.
मानसून में पिएं ये हेल्दी ड्रिंक्स
- गुनगुना पानी
- नींबू पानी (साफ पानी से बना हुआ)
- नारियल पानी
- अदरक-तुलसी की हर्बल टी
- हल्दी वाला दूध (रात में)
बरसात में डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत
- बार-बार प्यास लगना
- मुंह सूखना
- चक्कर आना
- कमजोरी
- पेशाब का रंग गहरा होना
कुछ सावधानियां बरतना जरूरी हैं
डॉक्टरों का मानना है कि मानसून के दौरान पेट की बीमारियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति भोजन और पानी की स्वच्छता पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दे. घर का ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाएं. खुले में रखे खाने-पीने की चीजों, कटे हुए फलों और कहीं से भी या खुला पानी पीने से बचें. घर से पानी साथ लेकर जाएं या फिर सील पैक बोतल से पानी पिएं.
डॉक्टरी सलाह का पालन जरूर करें
यदि किसी को लगातार उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में हमें अपने हाथों की स्वच्छता का भी विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए. खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं. खाने को ढककर रखें और बचे हुए खाने को लंबे समय तक रूम के तापमान पर न रखें.
खुद से दवाएं बिल्कुल न लें
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक मेडिसिन या दस्त रोकने वाली दवाएं लेने से बचना चाहिए. बारिश के मौसम में थोड़ी सावधानी और संतुलित खान-पान अपनाकर भी आप पेट से जुड़ी कई समस्याओं से बच सकते हैं. ताजा, साफ और हल्का भोजन इस मौसम में आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त होता है.
किन लोगों को बरतनी चाहिए ज्यादा सावधानी?
- छोटे बच्चे
- 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग
- गर्भवती महिलाएं
- डायबिटीज और किडनी रोगी
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
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Disclaimer: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.
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