सिक्किम के नामची जिले में बड़ा हादसा, निर्माणाधीन सुरंग ढहने से 8 मजदूरों की मौत, पढ़ें खबर
आठ मजदूरों ने अपनी जान गंवा दी जब सिक्किम के नामची जिले में एक निर्माणाधीन सुरंग ढह गई। दरअसल यह भीषण हादसा समरडुंग, झोलुंगे के पास हुआ, जहां सुरंग का निर्माण कार्य प्रगति पर था। सुरंग के अचानक ढह जाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में अब तक कुल आठ मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 20 अन्य मजदूर अभी भी सुरंग के मलबे में फंसे हुए हैं। इन फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है।
दरअसल नामची जिले में हुए इस बड़े सुरंग हादसे ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मौके से अब तक आठ शव बरामद किए जा चुके हैं। ये सभी मृतक मजदूर सुरंग निर्माण परियोजना में कार्यरत थे। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और विभिन्न आपदा राहत दल तत्काल मौके पर पहुंच गए। घायलों को निकालने और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने का काम बिना किसी देरी के शुरू कर दिया गया। जिला प्रशासन ने प्रारंभिक तौर पर सात लोगों की मौत की सूचना दी थी, लेकिन बाद में शवों की बरामदगी के साथ यह आंकड़ा बढ़कर आठ हो गया।
फंसे हुए मजदूरों को बाहर निकालने का काम किया जा रहा
बचाव अभियान को गति देने के लिए नामची जिला प्रशासन ने कई विभागों और विशेषज्ञ एजेंसियों को सक्रिय कर दिया है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सिक्किम पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के कर्मी चौबीसों घंटे मौके पर डटे हुए हैं। ये सभी दल मिलकर फंसे हुए 20 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। सुरंग के पास खोज और बचाव अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चलाया जा रहा है। बचाव दल मलबे को हटाने और सुरंग के अंदर तक पहुंचने के लिए भारी मशीनरी और विशेष उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं।
मृतकों के शवों को STNM ले जाया गया
मृतकों के शवों को गंगटोक के सिंगतम जिला अस्पताल (STNM) और नामची जिला अस्पताल ले जाया गया है। इन अस्पतालों में शवों की पहचान और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सूचित करने और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की है। सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) भी इस पूरी स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है। प्राधिकरण ने एक बयान जारी कर बताया है कि वे राहत और बचाव कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर आगे की जानकारी साझा की जाएगी।
यह दुखद घटना निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर अपनाई जाने वाली सावधानियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। समरडुंग और झोलुंगे का यह क्षेत्र अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, और ऐसे में सुरंग निर्माण कार्य अत्यंत सावधानी और उच्च सुरक्षा मानकों के साथ किया जाना चाहिए। बचाव दल दिन-रात एक कर फंसे हुए मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। घटनास्थल पर एंबुलेंस और मेडिकल टीमें भी तैनात हैं ताकि निकाले जाने वाले मजदूरों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके। यह एक भीषण त्रासदी है जिसने कई परिवारों को प्रभावित किया है। प्रशासन ने हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
भोपाल-लखनऊ स्लीपर वंदे भारत को मिली मंजूरी, सिर्फ 8 घंटे में पूरा होगा सफर, 20 कोच की ट्रेन जल्द दौड़ेगी
भोपाल और लखनऊ के बीच जल्द ही स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस दौड़ सकती है। रेलवे की मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। नई ट्रेन शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, व्यापारियों और पर्यटकों को बड़ा फायदा मिलेगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अभी भोपाल और लखनऊ के बीच चलने वाली सामान्य ट्रेनों को गंतव्य तक पहुंचने में करीब 12 घंटे लगते हैं। लेकिन प्रस्तावित स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस यह दूरी लगभग 8 घंटे में तय करेगी। यह ट्रेन आधुनिक तकनीक, बेहतर गति और आरामदायक सुविधाओं से लैस होगी।
स्लीपर वंदे भारत की खासियत
भोपाल-लखनऊ स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस को यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 20 कोच के साथ चलाने की तैयारी की जा रही है। शुरुआत में इसे 16 कोच के साथ संचालित करने का प्रस्ताव था, लेकिन भविष्य की जरूरतों और संभावित यात्री भार को देखते हुए रेलवे ने कोचों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है।
स्लीपर वंदे भारत ट्रेन में आरामदायक बर्थ, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक शौचालय, चार्जिंग पॉइंट, सीसीटीवी निगरानी और यात्रियों की सुविधा के लिए कई नई तकनीकी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। यह ट्रेन लंबी दूरी की यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाएगी।
अगस्त में आ सकती है अधिसूचना
रेलवे सूत्रों के अनुसार, भोपाल-लखनऊ स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस की आधिकारिक अधिसूचना अगस्त में जारी हो सकती है। इसके बाद ट्रेन का रूट, स्टॉपेज, किराया और संचालन की तारीख सार्वजनिक की जाएगी। हालांकि ट्रेन शुरू होने से पहले रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर पिट लाइन की क्षमता बढ़ाने का काम भी पूरा किया जा रहा है। नई पिट लाइन बनने के बाद ट्रेन के रखरखाव और संचालन में आसानी होगी।
फिलहाल मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर, रीवा और खजुराहो को जोड़ने वाली पांच वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं। भोपाल-लखनऊ स्लीपर वंदे भारत शुरू होने के बाद राज्य की रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी। इससे दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा का विकल्प मिलेगा। रेलवे की ओर से टाइमटेबल और टिकट बुकिंग शुरू होने के बाद यात्री आधिकारिक पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए अपनी सीट आरक्षित कर सकेंगे। नई ट्रेन के शुरू होने से लंबी दूरी की रेल यात्रा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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