Rahul Narwekar: Shiv Sena पर दिया फैसला कानून के मुताबिक था, कपिल सिब्बल के तर्क गलत
महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने कानूनी दायरे में रहकर और उच्चतम न्यायालय द्वारा तय मानदंडों के अनुरूप 2024 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को ‘असली’ शिवसेना के रूप में मान्यता देने का फैसला लिया था। शिवसेना में जून 2022 में उस समय विभाजन हो गया था, जब महाराष्ट्र के तत्कालीन मंत्री शिंदे ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नेतृत्व को चुनौती दी और 39 बागी विधायकों के साथ अलग हो गए। इसके कारण महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार गिर गई थी।
नार्वेकर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मेरा फैसला कानूनी दायरे में था। मेरा निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा तय मानदंडों के अनुरूप भी है।’’ उन्होंने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से उच्चतम न्यायालय में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा पार्टी की मान्यता और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में दी गई दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए यह बात कही। नार्वेकर ने कहा, ‘‘सिब्बल अदालत में एक राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
वह जो कह रहे हैं, वह उनका तर्क है। इससे कुछ साबित नहीं होता।’’ उन्होंने सवाल किया कि सिब्बल को उनके द्वारा लिए गए फैसले की पहले से जानकारी कैसे हो सकती थी और उच्चतम न्यायालय में उनके फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को ‘निराधार’ बताया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘सिब्बल को कैसे पता चला कि हमने क्या फैसला किया है?
ये निराधार याचिकाएं हैं। मैंने जो फैसला दिया है, वह कानूनी रूप से टिकाऊ है और मुझे नहीं लगता कि इसमें बदलाव किया जाएगा।’’ नार्वेकर ने शिवसेना में विभाजन के बाद दोनों गुटों के दावों पर विस्तृत सुनवाई के बाद 10 जनवरी 2024 को अपना फैसला सुनाया था। शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता देने के उनके फैसले की ठाकरे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट ने आलोचना की थी।
ठाकरे गुट ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ठाकरे गुट की उन याचिकाओं पर अंतिम दलीलें सुन रही है, जिनमें निर्वाचन आयोग के शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता देने और उसे पार्टी का नाम तथा ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न आवंटित करने के फैसले को चुनौती दी गई है। सिब्बल ने मंगलवार को कहा कि निर्वाचन आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने कानून की मूल रूप से गलत व्याख्या की तथा ‘‘विधायी बहुमत’’ को राजनीतिक दल के साथ मिला दिया।
उन्होंने जनवरी 2024 में विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें ठाकरे गुट की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था।
600 एक्सपर्ट्स NTA से बाहर, समीक्षा बैठक में गिरी गाज, प्रश्नपत्रों की जांच के लिए बनी नई व्यवस्था
NTA Review Meeting: नीट पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी होने लगी है. परीक्षा प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए एजेंसी ने अपनी टीम और प्रश्नपत्रों की जांच प्रक्रिया में बदलाव करने का फैसला लिया है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में मंगलवार को समीक्षा बैठक हुई. इसमें NTA के महानिदेशक ने अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी. बैठक में बताया गया कि परीक्षा टीम का पुनर्गठन किया जा रहा है और इसी प्रक्रिया के तहत करीब 600 परीक्षा विशेषज्ञों को हटाया गया है. इनकी जगह नई विशेषज्ञ टीम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
As a follow up meeting on NTA, Union Education Minister Shri @JoshiPralhad directed that all necessary security and related infrastructural facilities should be put in place for the smooth conduct of examinations.
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) August 18, 2026
Following directions from the Minister, DG, NTA apprised on the… pic.twitter.com/SCSnko504d
प्रश्नपत्रों की जांच के लिए 4 टियर सिस्टम
परीक्षाओं में किसी भी तरह की गलती या गड़बड़ी की संभावना कम करने के लिए प्रश्नपत्रों की जांच और समीक्षा के लिए चार-स्तरीय प्रणाली लागू की जाएगी. इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर अंतिम रूप दिए जाने तक उसकी कई स्तरों पर जांच सुनिश्चित करना है. इसके अलावा NTA में मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में भी काम चल रहा है. अगले दो से तीन सप्ताह में 20 से 25 नए अधिकारियों को शामिल करने की योजना है. समीक्षा बैठक में आगे की भर्तियों और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई.
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