US Iran War: Gulf Countries और Israel में बढ़ेंगी नजदीकियां, एशिया में नए सवालों को जन्म दिया
मिडिल ईस्ट के संग्राम के बीच में बड़ा सवाल बदलते समीकरणों का है. क्या इस जंग से पश्चिम एशिया का समीकरण बदलने वाला है? क्या ईरान के हमलों की वजह से खाड़ी देश इजराइल के करीब जाएंगे? इजराइली मीडिया में इसका व इसकी वकालत भी की जा रही है. पश्चिम एशिया में ईरान अमेरिकी सैन्य बेस के अलावा नागरिक ठिकानों को भी निशाना बना रहा है. दुनिया के सुपर पावर और पश्चिम एशिया के क्षेत्रीय शक्ति के बीच विनाशकारी जंग चल रही है.
पश्चिम एशिया में नए सवालों को जन्म
सवाल मिडिल ईस्ट में दबदबे का है. दुनिया के अहम तेल मार्ग पर कंट्रोल करें. लेकिन इन सबके बीच बड़ा सवाल इजराइल का है. इजराइल इस जंग से क्या हासिल करना चाहता है? क्या ईरान के खिलाफ इजराइल और खाड़ी देशों का स्थाई गठबंधन बनेगा? इजराइयली मीडिया का कहना है कि बहरीन, कुवैत, कतर और खाड़ी के दूसरे देशों पर ईरान के हमलों ने पश्चिम एशिया में नए सवालों को जन्म दिया है.
कूटनीतिक बातचीत के रास्ते खुले रखे
खाड़ी देशों पर हमले से ईरान, अमेरिका टकराव और पूरे इलाके में मौजूद सुरक्षा खतरों के बीच फर्क को खत्म कर दिया है. दशकों तक खाड़ी देशों की सरकारें अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर रही. ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के रास्ते खुले रखे. यह देश इजराइल के साथ खुलकर सहयोग करने से बचते रहे क्योंकि इन्हें डर था कि ऐसा करने से ईरान नाराज हो सकता है. लेकिन हमलों ने पूरे समीकरण को बदल दिया. खाड़ी देशों में भी नए सिरे से सुरक्षा के मुद्दे पर बहस हो रही है. ईरान ने खाड़ी देशों के डिसलिनेशन प्लांट को भी टारगेट किया है. कुवैत में डिसलिनेशन पर हमले का यह वीडियो है. डिसलिनेशन प्लांट समुद्र के खारे पानी से नमक और दूसरी अशुद्धियों को हटाकर उसे पीने लायक बनाता है.यूएई से लेकर कुवैत तक अरब की खाड़ी के किनारे 400 से ज्यादा डिसलिनेशन प्लांट है. जहां तक डिसलिनेशन प्लांट पर निर्भरता का सवाल है तो कुवैत का 90% पेयजल डिसलिनेशन प्लांट से आता है.
मिलिट्री ताकत को लगातार बढ़ा रहा
ओमान का 86% सऊदी अरब का 70% और यूएई के 42% पीने के पानी का स्रोत डिसलिनेशन प्लांट है. कुल मिलाकर डिसलिनेशन प्लांट पर हमले के जरिए ईरान ने लाल लकीर को पार कर दिया है. सवाल है कि इन हमलों का खाड़ी देशों पर क्या असर होगा? क्या पश्चिम एशिया के देश ईरान के खिलाफ लामबंद होंगे? जहां तक इजराइल का सवाल है मिडिल ईस्ट में उसके मिशन की बात करें तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना ईरान के प्रभाव को रोकना ईरान के प्रॉक्सी हिजबुल्ला और हमास से सुरक्षा सऊदी अरब सहित दूसरे खाड़ी देशों के साथ साझा मोर्चा इजराइल का मिशन तो क्या इजराइल और अरब देशों के बीच साझा मोर्चे का वक्त आ गया. वैसे इजराइल पश्चिम एशिया में खुद को महफूज रखने के लिए अपनी मिलिट्री ताकत को लगातार बढ़ा रहा है. पारंपरिक युद्धों के साथ-साथ इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए उन्नत तकनीक पर आधारित इजराइल लगातार अपने हथियारों के प्रोडक्शन को भी बढ़ा रहा है.
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