नॉर्वे: भीषण आग से 100 घर जलकर खाक, सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
नॉर्वे: भीषण आग से 100 घर जलकर खाक, सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गयाPlastic Currency India: कागज के मुकाबले लंबी होगी पॉलीमर नोटों की उम्र, एटीएम, कैश डिपॉजिट और नोट गिनने वाली मशीनें होगी अपग्रेड
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की मौद्रिक व्यवस्था में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। केंद्रीय बैंक जल्द ही देश में पॉलीमर प्लास्टिक बैंकनोटों के परिचालन को लेकर एक नए पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा कर सकता है। हालांकि यह पिछले 16 सालों में आरबीआई द्वारा की जा रही तीसरी बड़ी कोशिश है, लेकिन इस बार बदली हुई रणनीतियों के कारण इस परियोजना के पूरी तरह सफल होने की उम्मीद काफी ज्यादा जताई जा रही है।
इन नोटों को पॉलीमर बैंकनोट कहा जाता है, जो पारंपरिक कॉटन-बेस्ड कागज की जगह विशेष प्लास्टिक सब्सट्रेट से तैयार किए जाते हैं। ये नोट क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह सख्त नहीं होते, बल्कि पूरी तरह हल्के और लचीले होते हैं, जिन्हें आम नोटों की तरह आसानी से मोड़ा जा सकता है।
हर साल अरबों रुपये की छपाई और खराब नोटों को नष्ट करने का खर्च बनेगा इतिहास; नकली नोटों पर लगेगी लगाम
आरबीआई द्वारा प्लास्टिक नोटों पर दोबारा गंभीरता से विचार करने के पीछे मुख्य वजह छपाई पर होने वाला विशाल वित्तीय खर्च और कागजी नोटों की कम उम्र है। रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बैंकनोटों की छपाई पर कुल 6,372.8 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो इससे पिछले वर्ष के 5,101.4 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है।
इसके अलावा, अकेले वित्त वर्ष 2025 में करीब 23.8 अरब पुराने और खराब हो चुके बैंकनोटों को नष्ट करना पड़ा, जिनमें ₹500 और ₹100 के नोटों की तादाद सबसे ज्यादा थी। आरबीआई का मानना है कि ₹10 और ₹20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के कागजी नोट बाजार में बार-बार इस्तेमाल होने के कारण बहुत जल्दी फट और गल जाते हैं।
पॉलीमर नोटों की उम्र लंबी होने के कारण यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। साथ ही, इन नोटों में पारदर्शी, विंडो, माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और विशेष सुरक्षा स्याही जैसे हाई-टेक फीचर्स शामिल किए जाएंगे, जिससे देश में नकली नोटों की छपाई और जालसाजी पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी।
पूर्व के दोनों प्रयासों की कमियों को दूर करने की तैयारी; अब भारत में ही होगा पॉलीमर शीट का निर्माण, अपग्रेड होंगे एटीएम
भारत में प्लास्टिक नोट लाने की पहली आधिकारिक प्रक्रिया अप्रैल 2010 में शुरू हुई थी। इसके बाद साल 2017 में केंद्र सरकार ने ₹10 के पॉलीमर नोटों का जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि जैसे विभिन्न जलवायु वाले पांच शहरों में फील्ड ट्रायल करने की मंजूरी दी थी। हालांकि, पूर्व के दोनों प्रयास तकनीकी और परिचालन संबंधी भारी चुनौतियों के चलते ठंडे बस्ते में चले गए थे।
उस समय देश के अधिकांश एटीएम, कैश डिपॉजिट मशीनें और नोट गिनने वाली मशीनें कागजी नोटों के हिसाब से डिजाइन थीं, जो पॉलीमर नोटों को प्रोसेस नहीं कर पा रही थीं और मशीनों को अपग्रेड करने का खर्च बहुत ज्यादा था। इसके अलावा पॉलीमर शीट का पूरी तरह आयात करना पड़ता था। इस बार आरबीआई ने रणनीति बदलते हुए केवल आयात करने के बजाय देश के भीतर ही पॉलीमर शीट का उत्पादन कराने के लिए कंपनियों की तलाश शुरू कर दी है, जिससे लागत काफी कम आएगी।
इसके साथ ही सभी एटीएम और बैंकिंग मशीनरी को इसके अनुकूल अपग्रेड किया जा रहा है। वर्तमान में दुनिया के 60 से अधिक देश जैसे- ऑस्ट्रेलिया, यूके, कनाडा, सिंगापुर में यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू है। भारत में सबसे पहले ₹10 और ₹20 के नोटों पर इसका परीक्षण होगा और सफलता के बाद ही चरणबद्ध तरीके से इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।
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