Responsive Scrollable Menu

Jan Gan Man: 'दिमागी नक्सल' टिप्प्णी कटाक्ष नहीं चेतावनी है, क्या खुद को गर्व से Dimagi Naxal कहने वाले नेता नक्सली हिंसा के पीड़ितों का दर्द सुनना चाहेंगे?

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकारी कार्रवाई की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए एक नया राजनीतिक शब्द ''दिमागी नक्सल'' देश के विमर्श के केंद्र में ला दिया। प्रधानमंत्री का तर्क था कि जंगलों में बंदूक उठाने वाले सशस्त्र नक्सलियों की ताकत लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन नक्सली या माओवादी मानसिकता रखने वाले लोग अब भी व्यवस्था और सत्ता के गलियारों में प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों को पहचानने और अलग-थलग करने की जरूरत बताई तथा युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने नक्सली हिंसा की कीमत भी याद दिलाई। उन्होंने बताया कि वर्षों तक “लाल आतंक” ने देश के अनेक हिस्सों को भय में रखा और माओवादी हिंसा के खिलाफ अभियानों में 3,500 से अधिक सुरक्षा कर्मियों की जान गई। उन्होंने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प लिया था और अब सशस्त्र नक्सलवाद अंतिम सांसें गिन रहा है।

इसे भी पढ़ें: ‘दिमागी नक्सली’ यानी सियासी तापमान ब़ढ़ाने वाले शब्द

जहां तक दिमागी नक्सल टिप्पणी के निहितार्थों की बात है तो सबसे पहले इसकी अवधारणा को समझना जरूरी है। दुनिया के अनेक उग्रवादी आंदोलनों का अनुभव बताता है कि किसी हिंसक विचारधारा की चुनौती केवल हथियारबंद दस्तों से नहीं होती। उसके लिए वैचारिक समर्थन, प्रचार, वैधता, भर्ती और सामाजिक सहानुभूति का वातावरण भी महत्वपूर्ण होता है। यदि कोई व्यक्ति सचमुच लोकतांत्रिक व्यवस्था को नकारता है, हिंसक माओवादी आंदोलन को वैचारिक समर्थन देता है या संवैधानिक व्यवस्था के स्थान पर हिंसा को राजनीतिक साधन मानता है, तो उसके विचारों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी पहले “अर्बन नक्सल” जैसे शब्द का इस्तेमाल कर चुके हैं।

उधर, दिमागी नक्सल टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए पी. चिदम्बरम या अरविंद केजरीवाल जैसे नेता जो खुद को गर्व से दिमागी नक्सल बता कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं उन्हें केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान को सुनना चाहिए। किरेन रिजिजू ने साफ कहा है कि प्रधानमंत्री का आशय सिर्फ उन लोगों के लिए है जो माओवाद का समर्थन करते हैं और संविधान को अस्वीकार करते हैं, अलगाववादियों का समर्थन करते हैं या पूर्वोत्तर को भारत के बाकी हिस्से से अलग करने की कोशिशों के पक्ष में हैं। साथ ही भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दिमागी नक्सल टिप्पणी के दायरे को और विस्तार देते हुए ऐसे लोगों का उल्लेख किया है जो नक्सलियों को वैचारिक समर्थन देते हैं, सुरक्षा बलों की मौत का जश्न मनाते हैं, संसद की जगह सड़क के संघर्ष को राजनीतिक समाधान मानते हैं अथवा राष्ट्रीय एकता से जुड़े सवालों पर ऐसे विचार रखते हैं जोकि खतरनाक हैं।

इस राजनीतिक रस्साकशी के बीच ही “Dimagi Naxal Party” नाम का एक इंस्टाग्राम अकाउंट भी सामने आया है जिसका नारा “Think | Research | Resist” बताया गया है। इस सोशल मीडिया खाते ने बहुत कम समय में लाखों की संख्या में फॉलोअर जुटा लिए और खुद को एक स्थापित राजनीतिक दल की बजाय मुख्यतः सोशल मीडिया आधारित व्यंग्यात्मक आंदोलन के रूप में पेश किया। इसकी पोस्टों में स्वतंत्र चिंतन, प्रतिरोध और भगत सिंह की विचारधारा का संदर्भ भी दिखाई देता है। देखना होगा कि आगे चलकर दिमागी नक्सल पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी जैसी लोकप्रियता हासिल कर पाती है या फिर सोशल मीडिया से शुरू होकर इसी मंच तक सिमट जाती है।

उधर, गर्व से खुद को दिमागी नक्सल बताने वाले नेताओं के खिलाफ नक्सल हिंसा से पीड़ित लोग भी खड़े हो गये हैं। पीड़ितों ने कहा है कि इस तरह की टिप्पणियां केवल “फॉलोअर्स बढ़ाने” या किसी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नहीं की जानी चाहिए। बस्तर शांति समिति के तत्वावधान में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में माओवादी हिंसा के पीड़ितों ने अपनी आपबीती साझा की। माओवादी हिंसा में घायल हुए सीआरपीएफ जवान रुद्रेश सिंह ने कहा कि नक्सली हिंसा में वर्षों के दौरान सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल हुए और अपने शरीर के अंग खो चुके हैं। उन्होंने कहा, “यह कोई मजाक नहीं है।” रुद्रेश सिंह छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट और माओवादियों की गोलीबारी में घायल हुए थे। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद उनका एक पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा। रुद्रेश सिंह ने चिदंबरम की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दिल्ली में वातानुकूलित कमरे में बैठकर ‘मैं दिमागी नक्सली होने पर गर्व करता हूं’ कहना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां किसी के फॉलोअर्स बढ़ाने या किसी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नहीं की जानी चाहिए।

साथ ही बस्तर क्षेत्र से आए अन्य नक्सली हिंसा पीड़ितों ने भी चिदंबरम के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी से वे “गहराई से आहत” हैं। बस्तर के एक अन्य पीड़ित सियाराम रामटेके ने चिदंबरम की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे उनकी टिप्पणी को सहन नहीं कर सके, इसलिए दिल्ली आए हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई पूर्व गृह मंत्री और एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता इस तरह का बयान देता है, तो हमारे साथ कौन खड़ा होगा?” रामटेके ने कहा कि नक्सली हिंसा से बचे लोग किसी तरह अपना जीवन आगे बढ़ा रहे हैं और वे चाहते हैं कि ‘दिमागी नक्सली’ उसी रास्ते पर वापस जाने की कोशिश न करें। उन्होंने कहा, “हमें शांति के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। बस्तर विकास चाहता है और सभी को इसका समर्थन करना चाहिए।”

बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि यदि कोई व्यक्ति सचमुच हिंसक माओवादी विचारधारा, संविधान विरोधी गतिविधियों या सशस्त्र विद्रोह का समर्थन करता है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। देश को ऐसे किसी भी नेटवर्क से सावधान रहना चाहिए जो युवाओं को हिंसा, अलगाववाद या लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ उकसाए। प्रधानमंत्री ने दिमागी नक्सल संबंधी जो टिप्पणी की है उसको व्यंग्य या कटाक्ष के रूप में नहीं बल्कि एक चेतावनी के रूप में देखना चाहिए और देश को हिंसक माओवादी विचारधारा और उसके संभावित समर्थन नेटवर्क के प्रति सचेत रहना चाहिए।

Continue reading on the app

'क्या आपको बीफ पसंद आया?':केरलम में एक्ट्रेस मालविका शर्मा से पूछा गया सवाल तो हुईं अनकम्फर्टेबल, बोलीं- मैं शाकाहारी हूं

एक्ट्रेस मालविका शर्मा हाल ही में केरलम में एक रिपोर्टर के सवाल से असहज हो गईं, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बीफ पसंद आया। जिस पर एक्ट्रेस ने कहा कि वह शाकाहारी हैं। रिपोर्टर के सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने नाराजगी जताई। दरअसस एक्ट्रेस मालविका शर्मा अपनी अपकमिंग फिल्म ‘खलीफा’ के प्रमोशन के दौरान केरलम में मीडिया से बातचीत कर रही थीं। इसी दौरान उनसे पूछा गया कि केरलम में उन्हें कौन सा खाना पसंद आया? जिस पर उन्होंने कहा कि मुझे बहुत सारा खाना चखने का समय नहीं मिला, लेकिन आमतौर पर मुझे लगता है कि मैंने काफी सारा चावल, ग्रेवी और करी जैसी चीजें खाई हैं। इसके बाद उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा, क्या आपको बीफ पसंद आया? इस सवाल पर मालविका थोड़ी असहज नजर आईं और उन्होंने जवाब दिया, "मैं शाकाहारी हूं, इसलिए मैंने बीफ नहीं चखा है।" कई यूजर्स ने रिपोर्टर के सवाल पर नाराजगी जताई सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने रिपोर्टर के इस सवाल को लेकर नाराजगी जताई। एक एक्स यूजर ने लिखा, “क्या ऐसा बेवकूफी भरा सवाल पूछना वाकई जरूरी था?” वहीं दूसरे यूजर ने कहा, “वे सिर्फ विवाद पैदा करना चाहते हैं।” एक अन्य यूजर ने दावा किया कि इसी केरलम मीडिया ने फिल्म प्रमोशन के दौरान प्रिय प्रकाश को भगवा रंग के कपड़े पहनने को लेकर भी ताना मारा था। कौन हैं मालविका शर्मा? मालविका शर्मा एक एक्ट्रेस और मॉडल हैं, जो मुख्य रूप से तेलुगु फिल्मों में काम करती हैं। उनका जन्म 26 जनवरी 1999 को मुंबई में हुआ। उन्होंने साल 2018 में रवि तेजा के साथ फिल्म ‘नेला टिकट’ से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2021 में वह फिल्म ‘रेड’ में नजर आईं। इस फिल्म में उन्होंने महिमा का किरदार निभाया था। मालविका ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी काम किया। 2022 में वह ‘कॉफी विद काधल’ में दिखाई दीं। इसके बाद 2024 में उन्होंने तेलुगु फिल्मों ‘भीमा’ और ‘हरोम हारा’ में काम किया। बता दें कि मालविका ने रिजवी लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की, जिसमें क्रिमिनोलॉजी उनकी स्पेशलाइजेशन रही। मालविका की अपकमिंग प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वह मलयालम फिल्म ‘खलीफा’ और कन्नड़ फिल्म ‘बृंदाविहारी’ में नजर आएंगी। गौरतलब है कि हाल ही में फिल्म 'ओरु अदार लव' में अपनी मशहूर विंक से चर्चा में आईं एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर केरलम में एक इवेंट में शामिल हुईं। जहां पर उनके कपड़ों के रंग को लेकर सवाल किया गया था। इवेंट में प्रिया ने नारंगी यानी केसरिया रंग की ड्रेस पहनी थी। मीडिया से बातचीत के दौरान एक यूट्यूबर ने उनसे पूछा था कि क्या उन्होंने किसी खास वजह से केसरिया रंग की ड्रेस चुनी है। इस पर प्रिया ने शांति से जवाब देते हुए पूछा, “ड्रेस में समस्या क्या है?” पूरी खबर यहां पढ़ें….

Continue reading on the app

  Sports

WTC में करिश्मे से लेकर वर्ल्ड रिकॉर्ड तक... ऋषभ पंत ने 100वां छक्का जड़कर बनाए किए 5 बड़े कीर्तिमान

Rishabh pant 100th six in Test: ऋषभ पंत को भारत और श्रीलंका के बीच जारी गॉल टेस्ट हमेशा यदा रहने वाला है. उन्होंने इस मैच की दूसरी पारी के दौरान एक ऐतिहासिक उपलब्धि नाम की. पंत ने एक बार फिर अपने विस्फोटक अंदाज में बैटिंग की और 66 रन की पारी के दौरान कई रिकॉर्ड नाम कर लिए. दूसरी पारी में उन्होंने दो छक्के लगाए. पारी का दूसरा छक्का लगाते ही पंत ने रिकॉर्ड्स की भी झड़ी लगा दी. पंत के टेस्ट करियर का यह 100वां सिक्स था. चलिए जानते हैं इस सिक्स के साथ उन्होंने कौन-कौन से 5 रिकॉर्ड नाम किए. Tue, 18 Aug 2026 17:43:34 +0530

  Videos
See all

CM Yogi Strict Action: दबंगों ने रोका महिला का रास्ता, सीएम योगी ने अधिकारियों पर गिराई गाज! #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-18T12:45:18+00:00

India-US Relations | Rashtravad: ट्रंप को 'इंडियन इलेक्शन' पर भरोसा..राहुल-अखिलेश कब यकीन करेंगे ? #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-18T12:45:02+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers