अभिजीत दिपके का दावा- वांगचुक पर हमले की कोशिश हुई:पत्थर फेंका; 21वें दिन अनशन, ऋतिक रोशन ने समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) फाउंडर अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर हमला करने की कोशिश की। उनके मुताबिक, वांगचुक की ओर पत्थर फेंका गया, लेकिन उन्हें चोट नहीं आई। दिपके ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा- कुछ दिन पहले ही मैंने चेतावनी दी थी कि प्रदर्शन को रोकने के लिए लोगों को भेजा जाएगा। मुझे पुलिस के अंदरूनी सूत्र से इसकी जानकारी मिली थी। दिपके ने कहा- अगर वांगचुक को कुछ हुआ तो जिम्मेदारी सरकार की होगी। पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगों को लेकर वांगचुक का अनशन 21वें दिन में पहुंच गया है। उनके समर्थन में एक्टर ऋतिक रोशन ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा- मुझे भी छात्रों के मानसिक तनाव का एहसास तब हुआ, जब मैंने अपनी एक फिल्म में टीचर का किरदार निभाया था। वांगचुक बोले- 20% शरीर खत्म पर 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा जंतर-मंतर के धरने पर बैठे वांगचुक ने शुक्रवार देर रात जारी एक वीडियो में कहा- मैं अभी जिंदा हूं। मेरा 20% शरीर चला गया है। फैट के बाद मसल्स जाएंगी। फिर दिमाग... पर अभी वो नौबत नहीं आई है। इससे पहले उन्होंने कहा था- 20 जुलाई को हर हाल में संसद मार्च होगा और मैं जिंदा रहूंगा। लोग नहीं आए तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।’ कॉकरोच जनता पार्टी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया है। भूख हड़ताल से वांगचुक का वजन 9.5 किलो घटा वांगचुक के सेहत की निगरानी कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार भूख हड़ताल की वजह से वांगचुक का वजन अब तक करीब 9.5 किलो घट चुका है। शुक्रवार को 24 घंटे के दौरान उनका वजन 350 ग्राम और कम होकर 56.55 किलो रह गया था। वांगचुक के साथ आईसा की नेहा, आमीन और मनीष भी पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। नेहा को गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई है, जबकि आमीन और मनीष की तबीयत भी लगातार बिगड़ रही है। CJP का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नीट पेपर लीक के विरोध में 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वांगचुक भी उनके आंदोलन में शामिल हैं। CJP चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने के बाद बनी थी। पक्ष-विपक्ष की अपील, वांगचुक भूख हड़ताल खत्म करें लद्दाख को राज्य बनाने की मांग, वांगचुक 170 दिन जेल में रहे वांगचुक इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे। उन पर आरोप था कि अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए। सरकार ने हिंसा भड़काने का आरोप वांगचुक पर लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया। ------------------------------- वांगचुक से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… आमिर खान बोले- 3 इडियट्स सोनम वांगचुक पर नहीं बनी, फिल्म के दौरान उन्हें जानता नहीं था सोनम वांगचुक के आमरण अनशन के बीच आमिर खान ने पहली बार इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी है। लंबे समय से सोशल मीडिया पर उनकी चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब आमिर ने कहा है कि उन्हें सोनम वांगचुक की सेहत की चिंता है और वे उम्मीद करते हैं कि वह जल्द अपना अनशन खत्म करेंगे। लेकिन साथ ही आमिर ने कहा है कि फिल्म 3 इडियट्स सोनम वांगचुक पर नहीं बनी है। फिल्म बनाते हुए वो उन्हें जानते तक नहीं थे। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट बोला- यात्रियों को सेकेंड क्लास कहना गलत:यह शब्द रेलवे कोच के लिए; ट्रेन हादसे के पीड़ित को 10 साल बाद ₹8 लाख मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी यात्री की श्रेणी उसके खर्च से तय नहीं होनी चाहिए। रेलवे के नियमों में इस्तेमाल होने वाले ‘सेकेंड क्लास पैसेंजर’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि ‘सेकेंड क्लास’ का संबंध कोच से होना चाहिए, यात्री से नहीं। कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का फैसला पलटते हुए ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के परिवार को 8 लाख रुपए मुअवाजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि मृत यात्री के पास टिकट नहीं मिलने भर से उसके परिवार को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर मुअवाजा राशि जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। देरी होने पर दावा दायर करने की तारीख से 8% सालाना ब्याज भी देना होगा। 10 साल पहले ट्रेन से गिरकर हुई थी मौत मामला नवंबर 2015 का है। मध्य प्रदेश के चंद्रकांत ठक्कर रायपुर से अहमदाबाद जा रहे थे। यात्रा के दौरान वे अहमदाबाद-हावड़ा मेल से गिर गए और उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद उनका बैग भी गायब हो गया, जिसमें टिकट होने की बात कही गई थी। टिकट बरामद नहीं होने पर रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल और बाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें बोना फाइड यात्री नहीं माना और मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब दोनों फैसलों को पलट दिया और मृतक चंद्रकांत ठक्कर की पत्नी लता ठक्कर को मुआवजा देने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट बोला- यात्रियों को भी सतर्क रहना होगा, 3 बड़ी बातें… ट्रेन हादसों की पूरी जिम्मेदारी केवल रेलवे की नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रेन हादसों के लिए पूरी जिम्मेदारी केवल रेलवे पर नहीं डाली जा सकती। यात्रियों को भी अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना होगा। चलती ट्रेन पकड़ना, दरवाजे पर लटककर सफर करना और अनावश्यक जोखिम उठाना खतरनाक है। कोर्ट ने कहा कि कई बार यात्रियों के सामने व्यावहारिक मजबूरियां होती हैं, लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए यात्रियों को सावधानी बरतनी चाहिए। भीड़भाड़ रोकें, रेलवे स्टाफ बढ़ाए: कोर्ट ने कहा कि भीड़भाड़ वाली ट्रेनों से गिरने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। रेलवे ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए नियम बनाए हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन जरूरी है। अदालत ने रेलवे में स्टाफ बढ़ाने का सुझाव भी दिया ताकि यात्रियों की सुरक्षा बेहतर हो और रोजगार के अवसर बढ़ें। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त मानवबल उपलब्ध होने से टिकट जांच, भीड़ नियंत्रण त्वरित सहायता देना भी अधिक प्रभावी हो सकेगा। वैध यात्री का दर्जा खत्म नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे दुर्घटना मुआवजा कानून एक कल्याणकारी कानून है, इसलिए इसकी संकीर्ण नहीं बल्कि उदार व्याख्या होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ टिकट बरामद नहीं होने से किसी व्यक्ति का वैध यात्री होना समाप्त नहीं हो जाता। दावेदार शपथपत्र और साक्ष्यों के आधार पर अपना प्रारंभिक दावा साबित कर सकता है। इसके बाद दावे को गलत साबित करने की जिम्मेदारी रेलवे की होगी।
























