नारियल उत्पादन में भारत सबसे आगे, वैश्विक स्तर पर हिस्सेदारी 31 प्रतिशत से अधिक
नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस) भारत वैश्विक स्तर पर नारियल उत्पादन में 31.24 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ पहले और खेती के क्षेत्रफल के मामले में 17.90 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। यह जानकारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में मंगलवार को दी गई।
भारत ने 2024-25 के दौरान 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का उत्पादन किया। इस दौरान औसत उत्पादकता 9,249 नारियल प्रति हेक्टेयर रही।
2025-26 में बागानों की स्थापना और रखरखाव के लिए 632.77 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिससे दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिली।
बयान में कहा गया कि 2024-25 के दौरान 2,979 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को नई नारियल खेती के तहत लाने के लिए करीब 209.24 लाख रुपए का उपयोग किया गया। इस पहल से देश के विभिन्न राज्यों के 13,068 किसानों को लाभ मिला।
देश में केरलम में नारियल की खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो करीब 7.54 लाख हेक्टेयर में फैला है और यहां लगभग 5,149.87 मिलियन नारियल का उत्पादन होता है। नारियल उत्पादन में तमिलनाडु सबसे आगे है, जबकि उत्पादकता के मामले में आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है। इसके बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का स्थान है।
भारत का निर्यात पोर्टफोलियो पारंपरिक उत्पादों से आगे बढ़कर वर्जिन नारियल तेल, नारियल दूध और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों तक विस्तारित हुआ है।
बयान के अनुसार, सरकार मुख्य रूप से नारियल विकास बोर्ड के माध्यम से नारियल क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू कर रही है। 2025-26 में सीडीबी की गतिविधियों के लिए 147.21 करोड़ रुपए जारी किए गए।
केंद्रीय बजट 2026-27 में स्थिरता, निर्यात और किसानों की आय को मजबूत करने के लिए नारियल संवर्धन योजना भी शुरू की गई।
बयान में कहा गया, लगातार मिल रहे नीतिगत समर्थन के साथ भारत का नारियल क्षेत्र उत्पादन, मूल्यवर्धन, निर्यात और आजीविका के क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है।
नारियल क्षेत्र के लिए सरकार की बहुआयामी नीति में सूखे नारियल की गिरी (कोपरा) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, लक्षित विकास योजनाएं तथा पूरी मूल्य श्रृंखला में कौशल विकास और उद्यम निर्माण के लिए केंद्रित पहल शामिल हैं।
कोपरा (नारियल की सूखी हुई गिरी) उन 22 अनिवार्य कृषि फसलों में शामिल है जिन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था के तहत कवर किया जाता है।
—आईएएनएस
एबीएस
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सुप्रीम कोर्ट का छात्र आंदोलन पर बड़ा फैसला, बनेगी हाई पावर्ड कमेटी, करेगी ये जांच
Supreme Court on Student Protests: दिल्ली में जंतर मंतर पर हुआ छात्र आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन मामले की जांच अभी तक चल रही है. प्रदर्शन में पुलिस और छात्रों के बीच हिंसक झड़प होने से आंदोलन काफी चर्चित हो गया था. पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल भी किया था. यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था. अब कोर्ट ने मामले में एक्शन लिया है.
NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए हाई पावर कमेटी गठित करने का फैसला किया है. कमेटी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों व पुलिसकर्मियों के घायल होने की घटनाओं की जांच करेगी. इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए कथित बदसलूकी, यौन उत्पीड़न और ऑनलाइन उत्पीड़न के आरोपों को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े हर पीड़ित को अपनी शिकायत और पक्ष कमेटी के सामने रखने का अवसर मिलेगा. इसके लिए शिकायतों और संबंधित साक्ष्यों को कमेटी के समक्ष पेश किया जा सकेगा.
Supreme Court says it will constitute a high-powered committee headed by a former Supreme Court judge to investigate allegations of police excesses against student protesters and other related issues.
— ANI (@ANI) August 18, 2026
Supreme Court also says that the committee will have a former High Court judge… pic.twitter.com/SxrOGCq41A
कैसी होगी हाई कमेटी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों और इससे जुड़े अन्य मुद्दों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस कमेटी में हाई कोर्ट के एक पूर्व जज और एक रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल सदस्य के तौर पर शामिल होंगे.
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क्या करेगी कमेटी?
CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि हाई पावर कमेटी मुख्य रूप से तथ्यों की जांच करेगी. फेस रिकग्निशन, निगरानी, निजता और अनुच्छेद 21 से जुड़े संवैधानिक और कानूनी सवालों पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट खुद करेगा. कमेटी इन मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट दे सकती है, लेकिन अंतिम फैसला कोर्ट का ही होगा.
कोर्ट ने नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर भी सहमति जताई है, जो अलग-अलग पक्षों से जानकारी लेकर कमेटी तक पहुंचाएंगे. कमेटी सभी पक्षों को सुनेगी और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेगी. जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल हटाने का मुद्दा भी कोर्ट में उठा, जिस पर कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन स्थल बदलना प्रशासनिक मामला है.
प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR का मुद्दा भी उठा
कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR का मुद्दा भी उठा. CJI सूर्यकांत ने कहा कि सिर्फ छात्रों और प्रदर्शनकारियों से जुड़ी FIR की अलग सूची दी जाए. कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर ऐसी FIR को अनुच्छेद 142 के तहत खत्म करने पर विचार किया जा सकता है. हालांकि हत्या, रेप, POCSO और अपहरण जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों को अलग रखा जाएगा. कोर्ट ने आरोपियों की पहचान और FIR की पूरी जानकारी भी मांगी है.
सीजेपी प्रवक्ता ने सकार पर उठाए सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि जब कोर्ट (सरकार से) उन FIRs की लिस्ट मांग रहा है जिन्हें रद्द किया जाना है, तो आप उसे कोर्ट में क्यों नहीं सौंप रहे हैं? लेकिन आप (सरकार) कोर्ट में इस मामले में हिचकिचाहट दिखा रहे हैं. हमारे साथ देरी करने वाली चालें न चलें. कहा कि हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने लगभग 2,800 पक्के अपराधियों की पहचान की है; अगर उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी है, तो वह बिल्कुल अलग मामला है. छात्रों से जुड़ा मुद्दा उनके खिलाफ दर्ज FIRs को रद्द करने का है.
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