40 करोड़ की स्मार्ट सिटी सड़क में धंसा हिस्सा, पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान हुआ बड़ा गड्ढा
इंदौर के गोराकुंड इलाके में नई पानी की पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान बड़ा हादसा होते-होते बच गया। पानी के दबाव के बाद गोराकुंड चौराहे के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक जमीन में धंस गया।
कुछ ही सेकंड में सड़क का हिस्सा नीचे चला गया और मौके पर गहरा गड्ढा बन गया। घटना के समय वहां से कोई राहगीर या वाहन नहीं गुजर रहा था, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। सड़क धंसने की पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।
गोराकुंड में पानी की पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान धंसी सड़क
गोराकुंड क्षेत्र में नई पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम किया गया था। लाइन डालने के बाद उसकी टेस्टिंग की जा रही थी। इसी दौरान पाइपलाइन में पानी का दबाव बढ़ाया गया। बताया जा रहा है कि पानी के दबाव के बाद सड़क के नीचे की मिट्टी खिसकने लगी। देखते ही देखते सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया।
मौके पर मौजूद लोगों को जब यह घटना दिखाई दी तो वे भी हैरान रह गए। सड़क कुछ ही समय पहले तैयार हुई थी और उसके बाद पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान ही उसका बड़ा हिस्सा जमीन में चला गया।
40 करोड़ की स्मार्ट सिटी सड़क पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सड़क की गुणवत्ता को लेकर है। जिस सड़क के धंसने की बात सामने आई है, वह स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके निर्माण पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी राशि से तैयार सड़क अगर पानी की पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान धंस जाती है तो स्वाभाविक तौर पर निर्माण प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
सड़क सिर्फ ऊपर से मजबूत दिखना काफी नहीं है। उसके नीचे का बेस, मिट्टी की मजबूती, पानी की निकासी और पाइपलाइन के आसपास की भराई भी उतनी ही जरूरी होती है।
CCTV में रिकॉर्ड हुआ सड़क धंसने का पूरा घटनाक्रम
गोराकुंड में हुई यह घटना इसलिए भी सामने आई क्योंकि इसका CCTV फुटेज उपलब्ध है। फुटेज में सड़क का हिस्सा अचानक नीचे जाता दिखाई देता है। पानी की पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान दबाव बढ़ने के बाद सड़क के नीचे की मिट्टी प्रभावित हुई और उसके बाद सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया।
सड़क का हिस्सा जिस तेजी से नीचे गया, उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जमीन के अंदर कुछ समय से दबाव या पानी का असर हो रहा होगा। CCTV फुटेज जांच के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सड़क धंसने से ठीक पहले वहां क्या स्थिति थी और पानी का रिसाव किस दिशा में हुआ।
16,000 करोड़ रुपए के निवेश से विझिंजम पोर्ट की क्षमता बढ़कर सालाना 57 लाख टीईयू होगी; 5,000 लोगों को मिलेगा रोजगार
तिरुवनंतपुरम, 18 अगस्त (आईएएनएस)। विझिंजम इंटरनेशनल पोर्ट पर आयात-निर्यात (ईएक्सआईएम) ऑपरेशन पूरी तरह से शुरू हो गए हैं। वहीं, अब दूसरे चरण के तहत 16,000 करोड़ रुपए के निवेश से पोर्ट की क्षमता बढ़कर 57 लाख टीईयू हो जाएगी और1,200 मीटर के कंटेनर बर्थ जुड़ेगी। साथ ही, इसके तहत रेल और रोड़ कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स पार्क्स, वेयरहाउसिंग और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्टर विकसित किया जाएगा। यह ऐलान मंगलवार को किया गया।
दिसंबर 2028 तक तेजी से पूरे फेज का डेवलपमेंट पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 5,000 से ज्यादा अतिरिक्त प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की भी उम्मीद है, जिससे बड़े मैरीटाइम और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में नए मौके खुलेंगे।
विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट ने आयात-निर्यात ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही, यह एक बेहतरीन प्रदर्शन वाले ट्रांसशिपमेंट हब से बदलकर भारतीय व्यापार और ग्लोबल मार्केट के लिए एक गेटवे बन गया है।
आयात-निर्यात ऑपरेशन का मतलब है देश से निर्यात या आयात होने वाले कार्गो को संभालना, साथ ही इंटरनेशनल शिपिंग सर्विस के बीच ट्रांसशिपमेंट का काम करना।
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) के सीईओ और पूर्ण-कालिक निदेशक अश्वनी गुप्ता ने कहा, यह एक नए गेटवे की शुरुआत है जो केरल के टैलेंट, भारत के एंटरप्राइज और लाखों लोगों की उम्मीदों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस पोर्ट का मकसद सिर्फ कार्गो की आवाजाही तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और समुद्री क्षेत्र में नेतृत्व की आकांक्षाओं को भी पूरा करता है।
विझिंजम में किया गया यह निवेश, केरल और वहां इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए होने वाले विकास के प्रति अदाणी ग्रुप की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
दूसरे चरण के निवेश के साथ, विझिंजम प्रोजेक्ट में ग्रुप का कुल निवेश 30,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा, जो केरल में किसी भी बिजनेस हाउस द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।
यह निवेश अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने, कनेक्टिविटी को मजबूत करने और राज्य में बिजनेस व निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाने में ग्रुप की भूमिका को दर्शाता है।
कंपनी के अनुसार, आयात-निर्यात ऑपरेशन की ओर बढ़ने से भारत के समुद्री व्यापार की क्षमता पर बड़ा असर पड़ेगा। इस व्यवस्था से विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब पर निर्भरता कम हो सकती है, सामान लाने-ले जाने का समय घट सकता है और सप्लाई चेन की क्षमता बेहतर हो सकती है।
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने कहा, यह हमारे लिए गर्व का पल है और विझिंजम अब दुनिया के लिए एक गेटवे बन गया है। हमारे सामने चुनौती यह है कि हम मिशन समुद्र के जरिए इस मौके का पूरा फायदा उठाएं। इसमें विझिंजम को बेस बनाना, सड़क और रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और ज्यादा प्राइवेट इन्वेस्टमेंट लाना शामिल है। सरकार रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहण पर 3,200 करोड़ रुपए खर्च करेगी, जबकि प्राइवेट इन्वेस्टमेंट लाने के लिए बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है।
विझिंजम का महत्व भारत की समुद्री व्यापार क्षमता के लिए भी बहुत ज्यादा है।
अभी भारत का 75 प्रतिशत से ज्यादा कंटेनर ट्रांसशिपमेंट कार्गो विदेशी बंदरगाहों के जरिए हैंडल किया जाता है, जिससे लॉजिस्टिक्स का खर्च और सामान लाने-ले जाने का समय बढ़ जाता है।
विझिंजम के आयात-निर्यात ऑपरेशन से इस ढांचागत निर्भरता को दूर करने और समुद्री व्यापार से ज्यादा फायदा उठाने की भारत की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
एबीएस
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