Hydrogen Train Launch: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज से ट्रैक पर, पीएम नरेंद्र मोदी दिखाएंगे हरी झंडी
भारतीय रेलवे ने देश में स्वच्छ और टिकाऊ गतिशीलता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को हरियाणा के जींद से सोनीपत रेल खंड के बीच भारत की पहली स्वदेशी 'हाइड्रोजन-संचालित' विशेष पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
यह आधुनिक परियोजना भारतीय रेलवे को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी जहां पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल वाणिज्यिक परिवहन में किया जाता है। रेल मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह नई शुरुआत देश के रेलवे नेटवर्क में पूरी तरह से शून्य-उत्सर्जन आधारित टिकाऊ रेल परिवहन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
PM Modi will launch India’s first hydrogen train on the Jind-Sonipat route tomorrow.
— Akash Sharma (@kaidensharmaa) July 16, 2026
The 10-coach Namo GreenRail will be the world's most powerful hydrogen train.
It runs on indigenous fuel cells and leaves behind nothing but water. #IndianRailways pic.twitter.com/CNuEXcqCQU
बिना ओवरहेड बिजली तारों के खुद बिजली पैदा करेगी ट्रेन; जानिए किस अत्याधुनिक तकनीक पर चलती है हाइड्रोजन ट्रेन
तकनीकी दृष्टिकोण से, यह नई ट्रेन पारंपरिक डीजल या ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों पर निर्भर रहने वाली इलेक्ट्रिक ट्रेनों से पूरी तरह अलग है। इस ट्रेन के भीतर स्वदेशी 'हाइड्रोजन फ्यूल सेल' तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से यह ट्रेन अपना ऊर्जा स्रोत खुद साथ लेकर चलती है। ट्रेन की छत पर विशेष गैस सिलेंडर लगाए गए हैं जिनमें अत्यधिक सुरक्षित दबाव में हाइड्रोजन गैस भरी होती है।
India's First Hydrogen Fuel Cell Train Set to Redefine Sustainable Rail Mobility with Capacity of Around 2,600 Passengers
— PIB India (@PIB_India) July 16, 2026
The Smokeless Magic of Hydrogen Helps Build a Greener Indian Railways as It Powers the New-Era Train
With Multi-layer Safety Systems Detecting Hydrogen… pic.twitter.com/gpmrzZxRpm
परिचालन के दौरान, इस हाइड्रोजन गैस को बाहर की हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन के साथ मिलाकर एक विशेष रासायनिक प्रक्रिया कराई जाती है। इस सुरक्षित प्रक्रिया से जो बिजली उत्पन्न होती है, वह सीधे ट्रेन के शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर को चलाती है। चूंकि इसमें किसी भी प्रकार का कोई ईंधन नहीं जलाया जाता, इसलिए इस ट्रेन से बिल्कुल भी वायु प्रदूषण नहीं होता है।
2400 किलोवाट का दमदार इंजन और उन्नत सुरक्षा मानक; 120 किमी प्रति घंटा की गति से दौड़ने में सक्षम
यह नई ट्रेन 10 कोच वाली एक ब्रॉडगेज ट्रेन है, जिसे दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनों में से एक माना जा रहा है। इसमें 2400 किलोवाट क्षमता का एक बेहद शक्तिशाली इंजन लगाया गया है, जिसमें 1200 किलोवाट क्षमता की दो विशेष ड्राइविंग पावर कार शामिल हैं। हालांकि इस ट्रेन को तकनीकी रूप से 120 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति से दौड़ने के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन शुरुआती चरण में इसका परिचालन 75 किलोमीटर प्रति घंटा की नियंत्रित रफ्तार से किया जाएगा।
सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ट्रेन के भीतर उन्नत सुरक्षा उपकरण जैसे हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्शन सिस्टम और निरंतर गैस निगरानी तकनीक लगाई गई है, जो किसी भी आपात स्थिति या गैस रिसाव का आभास होते ही हाइड्रोजन की मुख्य आपूर्ति को अपने आप तुरंत बंद कर देगी।
महज 25 रुपये में पूरा होगा 89 किलोमीटर का सफर; जींद से सोनीपत के बीच कुल 12 स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन
यह ट्रेन न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि आम जनता की जेब के लिए भी बेहद किफायती साबित होने वाली है। जींद से सोनीपत के बीच कुल 89 किलोमीटर की इस यात्रा को पूरा करने के लिए रेल मंत्रालय ने अधिकतम किराया महज 25 रुपये निर्धारित किया है, जबकि यात्रा का न्यूनतम किराया सिर्फ 5 रुपये से लेकर 25 रुपये के बीच रहेगा।
लगभग 82 करोड़ रुपये की कुल लागत से निर्मित यह 682 सीटों वाली ट्रेन अपनी पूरी यात्रा के दौरान कुल 12 स्थानीय स्टेशनों पर रुकेगी, जिनमें मुख्य रूप से जींद सिटी, पांडू पिंडारा, ललित खेड़ा, भांवेबा, इसापुर खेड़ी, बुताना, खंडराई, गोहाना, रबड़ा, लाठ, मोहन हरियाणा और बरवासनी शामिल हैं। इन सभी ठहरावों को कवर करते हुए यह ट्रेन करीब दो घंटे में अपना सफर पूरा करेगी, जिससे इस रूट पर दैनिक यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को बेहद सस्ती और विश्वस्तरीय सुविधा प्राप्त होगी।
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