अवैध खनन मामले में HC सख्त, SDM के खिलाफ अवमानना कार्रवाई के निर्देश, तथ्य छिपाने का आरोप
डबरा क्षेत्र में कथित अवैध खनन (Dabra Illegal Mining) से जुड़े मामले को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने SDM रूपेश रतन सिंघई (एसडीओ डबरा) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने भ्रामक और अधूरी अनुपालन रिपोर्ट की गंभीरता को ध्यान में रखते में उनके खिलाफ अवमानना (कंटेम्पट ऑफ कोर्ट) कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले को लेकर 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल का निर्देश भी कोर्ट ने दिया है। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार की अनुपालन रिपोर्ट में शामिल 16 खनन पट्टों की समीक्षा की। इस दौरान पाया गया कि वर्ष 2017 में जारी कई कारण बताओ नोटिस अब तक लंबित हैं। कई ऐसे मामले भी हैं, जिसमें अवैध खनन के आरोपों की जांच पूरी नहीं हुई है इसके बावजूद खनन पट्टों का नवीनीकरण कर दिया गया है।
रूपेश रतन सिंघई पर तथ्य छुपाने का आरोप
सुनवाई ने दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चन सिंह के मामले में एसडीएम (एसडीओ डबरा) रूपेश रतन सिंघई ने यह तथ्य छिपाया कि संबंधित व्यक्ति के पास पहले से खनन पट्टा था। अदालत ने इसे जानबूझकर तथ्य छिपाने का मामला माना। न्यायालय के सामने भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करना गंभीर विषय, जिसे मद्देनजर रखते हुए कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है।
खनन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश
सुनवाई के दौरान एसडीएम ने भी यह स्वीकार किया है कि कई खदानों का स्थल निरीक्षण किए बिना रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया है। कोर्ट ने कहा कि, “अधिकारियों का यह रवैया गंभीर लापरवाही दर्शाता है। वे गलत काम करने वालों के प्रति नरमी बरत रहे हैं।” कई मामलों में अदालत ने सैटेलाइट इमेज भी तलब की है।
कोर्ट ने सूचीबद्ध 16 खनन पट्टाधारकों की खनन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कलेक्टर ग्वालियर को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है कि अवैध खनन और अवैध खनिज परिवहन पूरी तरह रोका जाए।
बिना अनुमति नए सीमांकन रोक, कोर्ट ने की CCTV फुटेज की तलब
कोर्ट ने सभी ई-चेकगेट के सीसीटीव, डीवीआर और खनन क्षेत्र से निकलने वाले ट्रकों के ई-परमिट से जुड़े रिकॉर्ड की तलब की है। यह भी स्पष्ट किया कि यदि सीसीटीवी फुटेज डिलीट पाई जाती है, इसे साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास माना जाएगा। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जाएगा। हाईकोर्ट ने बिना अनुमति नए सीमांकन पर भी रोक लगा दी है। मुख्य प्रकरण की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
श्रीकृष्ण पर विवादित बयान देने के मामले में मौलाना जरजिस पर दर्ज हुई FIR, महंत रविंद्र पुरी ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से की ये अपील
उत्तर प्रदेश के इटावा में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए मौलाना जरजिस के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। दरअसल उनपर आरोप है कि 23 जून को उन्होंने अपने संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण को मुसलमान बताते हुए उन्हें पांच वक्त का नमाजी कहा था। वहीं कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इस बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं है।
वहीं विरोध बढ़ने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और अब लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वीडियो वायरल होने के बाद कई हिंदू संगठनों और संतों ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।
स्वामी शांडिल्य महाराज ने बयान की आलोचना की
दरअसल हिंदू संगठनों का कहना था कि इस तरह की टिप्पणियां धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं और समाज में विवाद पैदा कर सकती हैं।दरअसल श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर स्वामी शांडिल्य महाराज ने बयान की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व पर इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है।
महंत रविंद्र पुरी ने भी दिया बड़ा बयान
वहीं, जुना अखाड़े से जुड़े स्वामी शैलेशानंद महाराज ने कहा कि इस तरह के बयान केवल विवाद पैदा करते हैं और समाज में तनाव बढ़ाते हैं। हरिद्वार में महंत रविंद्र पुरी ने भी बयान पर दुख जताते हुए मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की कि वे ऐसे मामलों में जिम्मेदारी से आगे आएं और समाज में सौहार्द बनाए रखने का संदेश दें।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब आगे क्या होगा?
वहीं हजरतगंज थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब पूरे प्रकरण की जांच करेगी। जांच के दौरान वायरल वीडियो की सत्यता, बयान का पूरा संदर्भ और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। इसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
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