एसबीआई फंड आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स: 42 गुना सब्सक्राइब, जानें कितना हो सकता लिस्टिंग गेन?
SBI Funds Management IPO: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला। 9813 करोड़ रुपये का यह पब्लिक इश्यू बोली के आखिरी दिन जबरदस्त ओवरसब्सक्राइब हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, 16 जुलाई शाम 5 बजे तक यह आईपीओ 41.66 गुना सब्सक्राइब हो चुका था।
ग्रे मार्केट में भी इस इश्यू को लेकर पॉजिटिव माहौल बना हुआ और करीब 16 फीसदी लिस्टिंग गेन की संभावना जताई जा रही। आईपीओ के लिए कुल 12.45 करोड़ शेयर ऑफर किए गए थे, जबकि निवेशकों ने 518.90 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए आवेदन किया।
कितने गुना हुआ सब्सक्राइब?
सबसे ज्यादा रुचि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने दिखाई, जिनका हिस्सा 140.11 गुना सब्सक्राइब हुआ। वहीं, नॉन इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स का कोटा 22.51 गुना और रिटेल इंडिविजुअल इंवेस्टर्स का हिस्सा 3.6 गुना सब्सक्राइब हुआ।
कितना है आईपीओ का जीएमपी
ग्रे मार्केट प्रीमियम भी इस आईपीओ को लेकर मजबूत संकेत दे रहा। बाजार ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म इंवेस्टरगेन और आईपीओ वॉच के मुताबिक, 16 जुलाई तक इसका जीएमपी 92 रुपये प्रति शेयर चल रहा। कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड 545 से 574 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ऐसे में मौजूदा जीएमपी के आधार पर शेयर की संभावित लिस्टिंग करीब 662 रुपये पर हो सकती, जो निवेशकों को करीब 16 फीसदी का शुरुआती मुनाफा दे सकती है।
एसबीआई फंड आईपीओ ऑफर फॉर सेल है
यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है। यानी कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं कर रही और इस इश्यू से मिलने वाली पूरी राशि मौजूदा शेयरधारकों स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और अमुंडी इंडिया होल्डिंग को जाएगी। कंपनी के पास इस इश्यू से कोई नई पूंजी नहीं आएगी।
ब्रोकरेज हाउस भी इस आईपीओ को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे। कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति, बेहतर मुनाफे और उचित वैल्यूएशन को देखते हुए सब्सक्राइब की रेटिंग दी है। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेस का कहना है कि 574 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का प्राइस टू अर्निंग यानी पीई रेशियो 38 गुना है, जो समान कंपनियों की तुलना में आकर्षक माना जा सकता।
आईपीओ का अलॉटमेंट 17 जुलाई को होने की संभावना है, जबकि कंपनी के शेयर 21 जुलाई को एनएसई और बीएसई पर लिस्टेड हो सकते।
कंपनी के पास कितना एयूएम
साल 1992 में स्थापित एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, एसबीआई म्यूचुअल फंड की निवेश प्रबंधन कंपनी है। यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और फ्रांस की अमुंडी के बीच जॉइंट वेंचर है। साल 2025 तक कंपनी के पास करीब 16.32 लाख करोड़ रुपये की Assets Under Management थी और भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में इसकी 15.5 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है।
(प्रियंका कुमारी)
ITR Filing AY 2026-27: ITR फॉर्म में हुए 8 बड़े बदलाव, रिटर्न भरने से पहले जान लें नए नियम
ITR Filing new changes: आयकर रिटर्न दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका और असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 31 जुलाई अंतिम तारीख। ऐसे में नौकरीपेशा, पेंशनभोगी, कारोबारी और अन्य करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले नए आईटीआर फॉर्म में हुए बदलावों को समझना बेहद जरूरी।
वित्त अधिनियम 2025 के तहत सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म में कई अहम संशोधन किए हैं, जिनका सीधा असर टैक्स फाइलिंग प्रोसेस पर पड़ेगा।
F&O से होने वाली इनकम अनिवार्य रूप से बतानी होगी
इस बार सबसे बड़ा बदलाव फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए किया गया। अब टैक्सपेयर्स को F&O का टर्नओवर और उससे हुई इनकम अलग से बतानी होगी। इसके लिए आईटीआर फॉर्म में अलग कॉलम जोड़े गए, जिससे ट्रेडिंग से जुड़े लेनदेन की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा भी 7 और बड़े बदलाव हुए हैं। आइए एक-एक इसे जानते हैं।
- एमएसएमई से जुड़े कारोबारियों के लिए भी नया नियम लागू हुआ। सेक्शन 43B(h) के तहत अगर एमएसएमई को ब्याज भुगतान समय पर नहीं किया गया और उस पर ब्याज अयोग्य माना गया है, तो उसकी जानकारी पार्ट ए-ओआई में देना अनिवार्य होगा।
- अगर कोई व्यक्ति किसी पार्टनरशिप फर्म में भागीदार है, तो अब उसे उस फर्म से मिलने वाले ब्याज और पारिश्रमिक की पूरी डिटेल ITR में भरना होगा।
- संशोधित आईटीआर फॉर्म में सेक्शन 234-I के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर चुकाई गई फीस की जानकारी देने के लिए भी अलग कॉलम जोड़ा गया।
- धारा 80 जी के तहत दान पर टैक्स छूट लेने वाले करदाताओं को अब दान से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देनी होगी। इसमें आईएफएसी कोड और ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर जैसी जानकारियां भी शामिल होंगी।
- प्रिजम्पटिव टैक्सेशन योजना का लाभ लेने वाले करदाताओं को अब अपने निवेश का डिटेल विवरण भी देना होगा।
- चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए भी नियम बदले गए हैं। अब उन्हें निवेश का वास्तविक बाजार मूल्य बताना होगा। साथ ही अन्य कानूनों के तहत मिले रजिस्ट्रेशन की वैधता अवधि का भी खुलासा करना होगा।
- नॉन रेसिडेंट करदाताओं के लिए सेक्शन 44बी, 44बीबी, 44बीबीए, 44बीबीसीऔर 44बीबीडी के तहत कारोबार करने वालों को कारोबार का टर्नओवर और शुद्ध लाभ अलग-अलग बताना होगा।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार ITR दाखिल करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज और वित्तीय जानकारी तैयार रखें, क्योंकि नए नियमों के तहत अधूरी या गलत जानकारी देने पर रिटर्न में देरी या नोटिस मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
(प्रियंका कुमारी)




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