दक्षिण कोरिया में मूसलाधार बारिश से तबाही, संवेदनशील इलाकों में आवाजाही पर प्रतिबंध
South Korea: दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने भारी तबाही मचाई है. अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि शनिवार से जारी मूसलाधार बारिश के कारण अब तक कुल 2,574 ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें लोगों को भारी नुकसान पहुंचा है. इनमें घरों और सड़कों में पानी भरने, पेड़ गिरने और अन्य घटनाएं शामिल हैं.
योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि केंद्रीय आपदा एवं सुरक्षा प्रतिरोध मुख्यालय के अनुसार, मंगलवार सुबह छह बजे तक दर्ज मामलों में 162 मामले बचाव अभियानों से जुड़े हैं. बारिश से अब तक एक व्यक्ति की मौत हुई है और चार लोग घायल हुए हैं. इनमें से दो घायलों और मृतक का मामला दक्षिणी शहर जियोझे में भूस्खलन से जुड़ा है, जहां भारी बारिश के कारण एक अपार्टमेंट इमारत प्रभावित हुई. बारिश के कारण दक्षिण ग्योंगसांग प्रांत, पड़ोसी शहर बुसान और दक्षिणी द्वीप जेजू में 560 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. इनमें से 316 लोग अपने घर लौट चुके हैं, जबकि 248 लोग अभी भी वापस नहीं जा सके हैं.
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भारी बारिश से बिजली आपूर्ति और जलापूर्ति भी प्रभावित हुई है. दक्षिण ग्योंगसांग प्रांत के जियोझे में शुक्रवार आधी रात से मंगलवार सुबह पांच बजे तक 956.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. इसी अवधि में टोंगयोंग में 766.9 मिमी, बुसान के गाडेओक द्वीप पर 518 मिमी, जेजू के सेओगसन में 477 मिमी और साचेओन में 430.5 मिमी बारिश हुई. मेट विभाग के अनुसार, शुक्रवार आधी रात से मंगलवार सुबह 5 बजे तक साउथ ग्योंगसांग प्रांत के जिओजे में 956.1 मिमी; टोंगयोंग में 766.9 मिमी; बुसान के गादेओक आइलैंड पर 518.0 मिमी; जेजू के सेओंगसान में 477.0 मिमी; और साउथ ग्योंगसांग प्रांत के साचेओन में 430.5 मिमी तक पहुंच गई. हालांकि, भारी बारिश की चेतावनियां अब हटा ली गई हैं, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है. तीन राष्ट्रीय उद्यानों के 255 हिस्सों और नदी किनारे के पैदल मार्गों तथा निचले पुलों समेत 306 संवेदनशील क्षेत्रों में आवाजाही पर प्रतिबंध जारी है। वहीं, विमान, रेल और फेरी सेवा जारी है.
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रेजरपे ने लॉन्च किया भारत का पहला एआई-संचालित पेमेंट्स फाउंडेशन मॉडल 'रेजरपे वल्कन', डिजिटल ट्रांजैक्शन होगा अधिक सुरक्षित और प्रभावी
नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनी रेजरपे ने देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और कुशल बनाने के उद्देश्य से एआई-संचालित पेमेंट्स फाउंडेशन मॉडल रेजरपे वल्कन लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, यह भारत का पहला ट्रांसफॉर्मर-आधारित एआई फाउंडेशन मॉडल है, जिसे विशेष रूप से पेमेट्स इकोसिस्टम के लिए विकसित किया गया है।
रेजरपे ने बताया कि यह मॉडल एनवीडिया और अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) की तकनीक के सहयोग से तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य भुगतान विफलताओं, धोखाधड़ी, ट्रांजैक्शन रूटिंग और चेकआउट प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को कम करना है। भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के बीच यह तकनीक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को और अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद करेगी।
कंपनी के मुताबिक, इस मॉडल को विकसित करने से पहले 15 लाख उपभोक्ताओं और 51,000 से अधिक व्यवसायों पर आधारित एक आंतरिक अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी समस्याएं केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों के उपभोक्ता भी इन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस एआई मॉडल के शुरुआती घटकों को पहले ही रेजरपे के पेमेंट नेटवर्क पर मौजूद लगभग 3 ट्रिलियन डेटा पॉइंट्स पर लागू किया जा चुका है। इसका उपयोग वास्तविक समय में ट्रांजैक्शन रूटिंग, जोखिम मूल्यांकन और धोखाधड़ी की पहचान के लिए किया गया।
कंपनी का दावा है कि इस तकनीक की मदद से पेमेंट सक्सेस रेट में 10 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कार्ड धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम की क्षमता 8 गुना तक बढ़ी है। इसके अलावा मॉडल ने बिना अतिरिक्त अलर्ट बढ़ाए पांच गुना अधिक संदिग्ध और विवादित ट्रांजैक्शन की पहचान की है।
रेजरपे ने यह भी बताया कि उसके मैजिक चेकआउट प्लेटफॉर्म पर अब 40 प्रतिशत अधिक उपभोक्ताओं को उनकी पसंदीदा यूपीआई एप्लिकेशन दिखाई जा रही है, जिससे हर महीने अतिरिक्त 1 से 2 लाख खरीदारी ट्रांजैक्शन संभव हो रहे हैं।
रेजरपे के सह-संस्थापक और सीईओ हर्षिल माथुर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना है जो अभी भी नकद भुगतान और डिजिटल भुगतान के बीच निर्णय लेने की स्थिति में हैं। उनके अनुसार, अधिक विश्वसनीय और निर्बाध भुगतान अनुभव डिजिटल लेनदेन को तेजी से अपनाने में मदद करेगा।
एनवीडिया में ग्लोबल इंडस्ट्री बिजनेस डेवलपमेंट एंड पेमेंट्स के प्रमुख पहल पटांगिया ने कहा कि भारत की तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था भुगतान प्रणालियों को अधिक बुद्धिमान, सुरक्षित और कुशल बनाने का बड़ा अवसर प्रदान कर रही है।
वहीं एडब्ल्यूएस इंडिया एवं दक्षिण एशिया के एफएसआई और कॉन्ग्लोमेरेट्स प्रमुख किरण जगन्नाथ ने कहा कि अमेजन सेजमेकर पर निर्मित यह एआई फाउंडेशन मॉडल अरबों ट्रांजैक्शन से प्राप्त जानकारियों को एकीकृत कर एक ऐसा इंटेलिजेंट प्लेटफॉर्म तैयार करता है, जो लगातार सीखता रहता है और पारंपरिक मशीन लर्निंग मॉडलों की सीमाओं को पार करता है।
भारत का डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम आज यूपीआई, कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट और कैश ऑन डिलीवरी जैसे कई माध्यमों पर आधारित है, जिनका संचालन सैकड़ों बैंकों और पेमेंट गेटवे के जरिए होता है। रेजरपे का कहना है कि उसका एआई मॉडल रीयल-टाइम में विभिन्न भुगतान मार्गों का विश्लेषण कर सबसे उपयुक्त रूट का चयन कर सकता है, जिससे विफल ट्रांजैक्शन की संभावना कम होती है।
कंपनी ने बताया कि भविष्य में वल्कन का उपयोग केवल भुगतान माध्यमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे ऑथेंटिकेशन, फ्रॉड डिटेक्शन, रिस्क मैनेजमेंट और डिजिटल लेंडिंग जैसे क्षेत्रों में भी विस्तारित किया जाएगा। जैसे-जैसे भारत का डिजिटल कॉमर्स बाजार बढ़ेगा, यह प्लेटफॉर्म भुगतान निर्णयों को अधिक स्मार्ट और स्वचालित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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