आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च, टिकट बुकिंग होगी तेज और आसान (लीड-1)
नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने अपनी नई टिकट बुकिंग वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया है। रेलवे मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि पिछले दो दशकों में यह वेबसाइट का पहला बड़ा बदलाव है।
नई वेबसाइट फिलहाल बीटा वर्जन में उपलब्ध है। यात्री इसका उपयोग कर सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं। अंतिम वर्जन अगले कुछ हफ्तों में जारी किया जाएगा।
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, नई वेबसाइट का बीटा वर्जन मौजूदा आईआरसीटीसी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। इसके लिए होमपेज पर एक विशेष लिंक दिया गया है, जिसके माध्यम से यात्री नई वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं।
यह पहल रेलवे की डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने और यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग अनुभव को बेहतर करने के उद्देश्य से की गई है।
मंत्रालय ने बताया कि वेबसाइट के नए डिजाइन को तैयार करने में मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्रों के सुझावों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बातचीत के दौरान छात्रों ने वेबसाइट को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए सुझाव दिए थे। इनमें से कई सुझावों को नई वेबसाइट में शामिल किया गया है।
आईआरसीटीसी की वेबसाइट पहली बार वर्ष 2002 में शुरू की गई थी। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना औसतन 14.5 लाख टिकटों की बुकिंग की जाती है।
नई वेबसाइट में साफ-सुथरा इंटरफेस, आसान नेविगेशन और सरल टिकट बुकिंग प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई है।
नई वेबसाइट में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जिससे टिकट बुकिंग पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी। इसमें अनावश्यक कैप्चा, पॉप-अप, चमकती ग्राफिक्स और अन्य बाधक तत्वों को हटा दिया गया है।
इसके अलावा यात्रियों को अब सभी श्रेणियों में सीटों की उपलब्धता एक साथ दिखाई देगी, जिससे वे आसानी से विभिन्न विकल्पों की तुलना कर सकेंगे।
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, टिकट बुकिंग प्रक्रिया में चेकआउट के चरणों की संख्या कम कर दी गई है। साथ ही पहले से सेव यात्रियों की जानकारी उपलब्ध रहने से बार-बार टिकट बुक करने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
मंत्रालय ने कहा कि बीटा वर्जन लॉन्च करने का उद्देश्य यात्रियों से फीडबैक प्राप्त करना है। उपयोगकर्ताओं के सुझावों के आधार पर वेबसाइट में और सुधार किए जाएंगे।
नई वेबसाइट को रेलवे के नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम से भी जोड़ा जाएगा, जिसे समानांतर रूप से अपग्रेड किया जा रहा है।
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, उन्नत आरक्षण प्रणाली और नई आईआरसीटीसी वेबसाइट का पूर्ण संस्करण अगले कुछ हफ्तों में शुरू किए जाने की संभावना है।
--आईएएनएस
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Explainer: भारत–यूरोपीय संघ (EU) की साझेदारी क्यों हो रही है मजबूत? जानिए जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा का पूरा मतलब
India- EU Partnership: भारत और यूरोपीय संघ (European Union-EU) के बीच रिश्ते लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं. इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर 14-15 जुलाई को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स दो दिवसीय दौरे पर रहे. इस दौरान उन्होंने यूरोपीय परिषद (European Council) के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग (European Commission) की उपाध्यक्ष काजा कैलास और बेल्जियम के फ्लैंडर्स क्षेत्र के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की.
इस यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार (Trade), तकनीक (Technology), सुरक्षा (Security), रक्षा (Defence) और सप्लाई चेन (Supply Chain) जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना था. साथ ही तीसरी भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (Trade and Technology Council-TTC) की बैठक में भी भारत ने हिस्सा लिया.
Concluded a productive meeting of the India - EU Trade and Technology Council alongside CIM @PiyushGoyal, MoS MEITY @JitinPrasada and Principle Scientific Advisor Prof Ajay K Sood.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 15, 2026
Thank EVP @HennaVirkkunen, Commissioners @EZaharievaEU and @MarosSefcovic, for their useful inputs… pic.twitter.com/9yI5qwZCYy
क्या है भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC)?
भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल दोनों पक्षों के बीच ऐसा मंच है जहां व्यापार, नई तकनीक, डिजिटल इकोनॉमी, सप्लाई चेन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन एनर्जी और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होती है. इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी शामिल हुए.
इस मंच का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं है, बल्कि भविष्य की तकनीकों में साझेदारी विकसित करना भी है ताकि दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की ताकत बन सकें.
एंटोनियो कोस्टा से मुलाकात में क्या हुआ?
ब्रसेल्स में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से मुलाकात की. इसके बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस साल की शुरुआत में नई दिल्ली में हुए भारत-EU शिखर सम्मेलन के बाद दोनों पक्षों की साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कोस्टा के मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच की वे सराहना करते हैं. इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की.
जनवरी में हुए भारत-EU शिखर सम्मेलन की क्यों हो रही है चर्चा?
इस साल जनवरी में नई दिल्ली में भारत-EU शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत आए थे. वे गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भी बने थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय नेताओं की सह-अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए.
सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहे—
- भारत और EU के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA)
- नया सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौता
- तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति
- निवेश और उद्योगों के लिए नए अवसर
इन्हीं फैसलों को आगे बढ़ाने के लिए अब ब्रसेल्स में अगली स्तर की बातचीत हो रही है.
काजा कैलास के साथ किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
ब्रसेल्स पहुंचने के बाद विदेश मंत्री जयशंकर की पहली मुलाकात यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष और EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास से हुई. दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया (West Asia) की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की. इसके अलावा उन्होंने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, वैश्विक सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर भी विचार साझा किए. जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहना चाहिए क्योंकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इसी पर निर्भर हैं.
समुद्री सुरक्षा क्यों बनी बड़ी प्राथमिकता?
आज दुनिया का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री रास्तों से होता है.अगर किसी क्षेत्र में युद्ध, संघर्ष या समुद्री हमले बढ़ते हैं तो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित होती है. हाल के वर्षों में लाल सागर (Red Sea), होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ा है.
ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ दोनों चाहते हैं कि—
- समुद्री व्यापार सुरक्षित रहे.
- जहाजों की आवाजाही बिना बाधा जारी रहे.
- ऊर्जा और सामान की सप्लाई प्रभावित न हो.
- वैश्विक व्यापारिक व्यवस्था मजबूत बनी रहे.
सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर क्यों है जोर?
कोविड महामारी और कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बाद दुनिया ने महसूस किया कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम बढ़ा सकती है. इसी कारण भारत और EU अब ऐसी सप्लाई चेन बनाना चाहते हैं जो मजबूत, सुरक्षित और विविध हो.
इसका फायदा यह होगा कि—
- उद्योगों को कच्चा माल समय पर मिलेगा.
- उत्पादन प्रभावित नहीं होगा.
- व्यापार तेजी से बढ़ेगा.
- नई कंपनियों को निवेश के अवसर मिलेंगे.
काजा कैलास ने क्या कहा?
काजा कैलास ने कहा कि यह वर्ष भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों के लिए ऐतिहासिक साबित हो रहा है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत और EU को मिलकर समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता की रक्षा करनी होगी, मजबूत सप्लाई चेन विकसित करनी होगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को और गहरा करना होगा. उन्होंने भारतीय नौसेना और यूरोपीय संघ के समुद्री अभियानों ATALANTA तथा ASPIDES के बीच सहयोग बढ़ाने की भी बात कही.
बेल्जियम के फ्लैंडर्स क्षेत्र के साथ क्या चर्चा हुई?
जयशंकर ने बेल्जियम के फ्लैंडर्स क्षेत्र के मंत्री-प्रधान मैथियास डीपेंडेले और मंत्री एनीक डी रिडर से भी मुलाकात की. उन्होंने कहा कि भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते के बाद बेल्जियम के उद्योगों और निवेशकों के लिए भारत में कई नए अवसर खुल गए हैं. दोनों पक्षों ने निवेश, व्यापार, उद्योग और कारोबारी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. फ्लैंडर्स बेल्जियम का प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र माना जाता है, इसलिए वहां की कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा सकती हैं.
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भारत और EU के लिए यह साझेदारी क्यों अहम है?
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक समूहों में से एक है.
दोनों के बीच मजबूत साझेदारी से—
- व्यापार बढ़ेगा.
- निवेश में तेजी आएगी.
- नई तकनीकों का विकास होगा.
- रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
- रक्षा और समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी.
- वैश्विक सप्लाई चेन अधिक सुरक्षित बनेगी.
- ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इकोनॉमी में सहयोग बढ़ेगा.
एक नजर में समझिए
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर 14-15 जुलाई को ब्रसेल्स दौरे पर रहे.
- एस. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास और बेल्जियम के फ्लैंडर्स क्षेत्र के नेताओं से मुलाकात की.
- दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की बैठक में भाग लेना और व्यापार, तकनीक, निवेश, सुरक्षा तथा सप्लाई चेन पर सहयोग बढ़ाना था.
- दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, समुद्री सुरक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और सुरक्षित वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी चर्चा की.
- जनवरी में हुए भारत-EU शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से व्यापार एवं निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है.
कुल मिलाकर एस. जयशंकर का ब्रसेल्स दौरा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच तेजी से गहराते रणनीतिक रिश्तों का संकेत है. आज दोनों पक्ष व्यापार, तकनीक, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, निवेश और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करना चाहते हैं. वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों और बदलते आर्थिक माहौल के बीच भारत और EU की यह साझेदारी न केवल दोनों क्षेत्रों के लिए, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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