ICC ने बदला पूरा खेल! 2028 टी20 वर्ल्ड कप से पहले चेंज हुआ फॉर्मेट, टूर्नामेंट को रोमांचक बनाने के लिए उठाए ये खास कदम
ICC Mens T20 World Cup 2028 : इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने एडिनबर्ग में हुई एनुअल जनरल मीटिंग में आईसीसी मेन्स T20 वर्ल्ड कप 2028 के फॉर्मेट में सुधार को मंज़री दे दी है. अब टी20 वर्ल्ड कप 2028 बदले हुए फॉर्मेट के साथ खेला जाएगा. ये बदलाव ज्यादा अच्छे मुकाबले बनाने, कॉम्पिटिटिव स्टैंडर्ड को बेहतर बनाने, दोनों इवेंट्स के कॉम्पिटिटिव स्ट्रक्चर को मजबूत करने और एथलीट्स और फैंस के लिए टूर्नामेंट के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किए गए थे.
टी20 वर्ल्ड कप का बलदा फॉर्मेट
आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2028 एडिशन में भी 20 टीमों का इवेंट बना रहेगा, जिसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड मिलकर होस्ट करेंगे. टूर्नामेंट का बदला हुआ फॉर्मेट कॉम्पिटिशन के दूसरे स्टेज में टीमों की संख्या बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे सुपर 10 स्टेज में उभरती टीमों का रिप्रेजेंटेशन बढ़ाने का वादा किया गया है.
ग्रुप स्टेज (30 मैच) - हिस्सा लेने वाली 20 टीमों को अब चार-चार के पांच ग्रुप में बांटा जाएगा, जो आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में इस्तेमाल किए गए पांच-पांच के चार ग्रुप के पिछले फॉर्मेट की जगह लेगा. हर ग्रुप से टॉप दो टीमें सुपर 10 स्टेज में आगे बढ़ेंगी.
सुपर 10 (20 मैच) - इस राउंड में पांच-पांच के दो ग्रुप होंगे, जो राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में खेलेंगे. हर सुपर 10 ग्रुप के विजेता सीधे सेमी-फाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगे.
एलिमिनेटर (2 मैच) - बाकी दो सेमी-फाइनल स्पॉट एक नए एलिमिनेटर राउंड से तय होंगे, जिसमें हर सुपर 10 ग्रुप की दूसरे नंबर की टीमों का मुकाबला दूसरे ग्रुप की तीसरे नंबर की टीमों से होगा.
ICC have revamped the format of its marquee men's events to enhance competitive structure and elevate sporting standards.https://t.co/MbpROsVn4w
— ICC (@ICC) July 15, 2026
उन एलिमिनेटर के विजेता सेमी-फाइनल लाइन-अप को पूरा करेंगे, जबकि सेमी-फाइनल और फाइनल मौजूदा फॉर्मेट में ही होंगे.
???? NEW T20 WORLD CUP FORMAT ????
— Cricbuzz (@cricbuzz) July 15, 2026
The Men's T20 World Cup gets a new look: five groups of four, a 10-team second stage replacing the Super Eights, and Eliminators before the semifinals. pic.twitter.com/UU53aaf3jn
आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2028 क्वालिफिकेशन
जो टीमें पहले ही क्वालिफाई कर चुकी हैं. 2026 टी20 वर्ल्ड कप में अपने परफॉर्मेंस और टीम रैंकिंग के आधार पर 12 टीमों ने 2028 टूर्नामेंट के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है. अफगानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, इंग्लैंड, इंडिया, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, वेस्ट इंडीज और जिम्बाब्वे.
ग्लोबल क्वालिफायर – 2028 टी20 वर्ल्ड कप में बची हुई आठ जगहें 16-टीम ग्लोबल क्वालिफायर कॉम्पिटिशन के जरिए भरी जाएंगी.
आठ टीमें जिन्होंने 2026 एडिशन में हिस्सा लिया था, लेकिन ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन हासिल नहीं कर पाईं, वो सीधे 16-टीम ग्लोबल क्वालिफायर में आगे बढ़ेंगी. ये हैं - कनाडा, इटली, नामीबिया, नेपाल, नीदरलैंड्स, ओमान, यूनाइटेड अरब अमीरात और यूनाइटेड स्टेट्स
ग्लोबल क्वालिफायर में बाकी आठ जगहें रीजनल क्वालिफायर से भरी जाएंगी
• अफ्रीका – 2 जगहें
• एशिया – 2 जगहें
• यूरोप – 2 जगहें
• अमेरिका – 1 जगह
• ईस्ट-एशिया पैसिफिक – 1 जगह
T20 World cup 2028 will feature a new structure aimed at giving more teams a bigger chance to compete at the highest level.
— Vipin Tiwari (@Vipintiwari952) July 15, 2026
Group Stage:
- 20 teams will be divided into 5 groups of 4 teams.
- Each team will play 3 matches.
- The top 2 teams from each group will qualify for the… pic.twitter.com/we4adO8yPc
ग्लोबल क्वालिफायर में हर रीजन से सबसे ऊपर रहने वाली टीम और कुल मिलाकर अगली तीन सबसे ऊपर रहने वाली टीमें एक मिनिमम परफॉर्मेंस क्राइटेरिया के तहत आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2028 के लिए क्वालीफाई करेंगी. आईसीसी डेवलपमेंट और चीफ एग्जीक्यूटिव्स कमेटियों द्वारा रिकमेंड किए जाने के बाद इस नए मार्की टूर्नामेंट को बोर्ड ने एंडोर्स किया है. हालांकि, इसे ICC की फाइनेंस और कमर्शियल अफेयर्स कमिटी द्वारा नवंबर की मीटिंग्स में रिव्यू के बाद बोर्ड द्वारा फाइनली अप्रूव किया जाएगा.
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कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े डेटा लीक का दावा, साइबर सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर एक गंभीर साइबर सुरक्षा दावा सामने आया है. रैंसमवेयर ग्रुप 'वर्ल्ड लीक्स' ने दावा किया है कि उसने इस परियोजना से जुड़ी हजारों संवेदनशील फाइलें डार्क वेब पर जारी कर दी हैं. इस दावे के बाद देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की साइबर सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
हालांकि, अभी तक संबंधित सरकारी एजेंसियों ने लीक हुई सभी फाइलों की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. मामले की जांच जारी है.
19 हजार से ज्यादा फाइलें लीक होने का दावा
हैकर समूह के अनुसार, डार्क वेब पर अपलोड की गईं 19,000 से अधिक फाइलें लगभग 8.58 लाख दस्तावेजों के बड़े डेटा सेट का हिस्सा हैं. दावा किया गया है कि यह डेटा परियोजना से जुड़े एक ठेकेदार के माध्यम से हासिल किया गया.
रिलायंस ग्रुप ने भी यह स्वीकार किया है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर प्रदाता योटा के सर्वर पर उनके कुछ डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई थी. कंपनी ने कहा कि मामले की जानकारी संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी गई है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस प्रकार का डेटा प्रभावित हुआ.
लीक दस्तावेजों में क्या-क्या होने का दावा?
रिपोर्टों के अनुसार, कथित तौर पर लीक हुए दस्तावेजों में कई तकनीकी और प्रशासनिक जानकारियां शामिल हैं. इनमें वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम के इंजीनियरिंग ब्लूप्रिंट, कॉमन कंट्रोल रूम के फ्लोर प्लान, उपकरणों की निरीक्षण रिपोर्ट, सप्लायर सूची, वेंडर प्रस्ताव, बैठकों के रिकॉर्ड और बीमा संबंधी दस्तावेज शामिल बताए गए हैं.
बताया जा रहा है कि ये दस्तावेज मुख्य रूप से कुडनकुलम परियोजना की यूनिट-3 और यूनिट-4 से जुड़े हैं, जिनका निर्माण कार्य जारी है और जिनके आने वाले वर्षों में चालू होने की उम्मीद है.
क्या परमाणु रिएक्टर की गोपनीय जानकारी भी लीक हुई?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कथित रूप से लीक हुए दस्तावेजों में परमाणु रिएक्टर के मुख्य डिजाइन या कोर सिस्टम से जुड़ी संवेदनशील तकनीकी जानकारी शामिल होने के संकेत नहीं मिले हैं. इन प्रणालियों की आपूर्ति रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम करती है.
इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि सहायक प्रणालियों, लेआउट और संचालन से जुड़ी जानकारी भी किसी संभावित साइबर या भौतिक हमले की योजना बनाने वालों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
साइबर विशेषज्ञों ने जताई चिंता
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारी का लीक होना गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है. यदि किसी हमलावर को यह पता चल जाए कि परियोजना में कौन-से सिस्टम, ठेकेदार और नेटवर्क जुड़े हैं, तो वह भविष्य में कमजोर कड़ियों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है.
हालांकि फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि चालू परमाणु रिएक्टरों के संचालन या नियंत्रण प्रणाली से किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई है.
जांच में जुटीं एजेंसियां
सूत्रों के अनुसार, कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. डेटा सेंटर प्रदाता योटा ने भी बताया कि मई के अंत में एक सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि का पता चलने के बाद आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए गए थे. इस बीच संबंधित सरकारी विभागों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है.
बढ़ती साइबर चुनौतियों का संकेत
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत में साइबर हमलों और डेटा लीक की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा, रक्षा, बैंकिंग और दूरसंचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने की जरूरत है. महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय भी है. ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लगातार अपडेट करना भविष्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है.
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