Aamir Khan Marriage Controversy: आमिर खान की तीसरी शादी के खिलाफ जारी हुआ फतवा, देखें वीडियो
Aamir Khan Marriage Controversy: बॉलीवुड एक्टर आमिर खान (Aamir Khan) ने गौरी स्प्रैट (Gauri Spratt) संग हाल ही में तीसरी शादी की थी. उनकी शादी को लेकर लगातार विरोध हो रहा है. कुछ दिन पहले बजरंग दल के सदस्यों ने आमिर की तीसरी शादी का विरोध करते हुए उनका पुतला फूंका था. वहीं, महाराष्ट्र के एक मंत्री ने उनकी शादी को लव जिहाद बताया था. अब इसी बीच मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना ईफराहिम हुसैन ने एक फतवा जारी किया है. उन्होंने आमिर खान की तीसरी शादी को इस्लाम के मुताबिक, नाजायज बताया है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में गैर-मुस्लिम महिला से शादी करना जायज नहीं माना जाता है. उन्होंने कहा कि अगर कोई ईमान वाला यानी मुस्लिम मर्द ऐसा करता है तो वह शरीयत के अनुसार गुनहगार होगा.
कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए 62,500 करोड़ रुपए को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने बुधवार को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को 62,500 करोड़ रुपए के बजट के साथ मंजूरी दी। इसके जरिए केंद्र की कोशिश मोबाइल के घरेलू उत्पादन एवं निर्यात को बढ़ाना और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देश की स्थिति को मजबूत करना है।
यह स्कीम वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक यानी पांच साल तक चलेगी। इसका मकसद आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाना और डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) में निवेश के जरिए भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड के विकास को बढ़ावा देना है।
एमपीएमस के तहत, मैन्युफैक्चरर्स को भारत में बने मोबाइल फोन की योग्य बिक्री पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक की अलग-अलग दरों पर इंसेंटिव सपोर्ट मिलेगा।
इसके अलावा, यह स्कीम मुख्य पार्ट्स और सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग से जुड़े 1.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी देती है।
घरेलू ब्रांड्स को बढ़ावा देने के लिए, मैन्युफैक्चरर्स प्रोडक्ट डिजाइन और आरएंडडी के लिए योग्य बिक्री पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव पाने के हकदार होंगे।
कैबिनेट के अनुसार, इस स्कीम की अवधि के दौरान लगभग 39 लाख करोड़ रुपए का कुल मोबाइल फोन प्रोडक्शन होने की उम्मीद है, साथ ही देश से हैंडसेट के निर्यात में भी काफी बढ़ोतरी होगी।
एमपीएमएस से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने का भी अनुमान है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।
कैबिनेट ने कहा कि यह पहल सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम की सफलता पर आधारित है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सात गुना और निर्यात में 11 गुना बढ़ोतरी हुई है।
भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर है और देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन घरेलू स्तर पर ही बनाए जाते हैं।
सरकार ने कहा कि 2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी बनकर उभरी है, जिन्होंने डीजल फ्यूल और कटे हुए हीरे जैसे पारंपरिक निर्यात कैटेगरी को पीछे छोड़ दिया।
इसके अलावा, यह नई स्कीम बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की जगह लेगी, जिसका कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हो गया था।
सरकार ने कहा कि पीएलआई स्कीम ने भारत को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट के लिए एक ग्लोबल हब के तौर पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
--आईएएनएस
एबीएस
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